इलाज के अभाव में जंजीरों से जकड़ी नाबालिग की जिंदगी, गरीबी बनी अभिशाप

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/05 11:13

बारां। जिले के नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के कदली गांव में मानसिक रूप से विक्षिप्त एक नाबालिग को जानवरों की भांति पेड़ से या खूंटे से बांधना बेबस बाप की मज़बूरी बना हुआ है। इस परिवार की गरीबी इस कदर अभिशाप बनी हुई है कि अपने नेत्र व मानसिक दिव्यांग पुत्र का इलाज भी कराना मुश्किल हो रहा है जिसके चलते बेबस बाप बुद्धाराम बैरवा अपने इस नाबालिग बेटे को कुत्तों की तरह रोटी डालकर घर के आंगन में लगे नीम के पेड़ से जानवरो की तरह बांध देता है। दिव्यांग  के पिता ने फर्स्ट इंडिया से बातचीत करते हुए बताया कि अगर इसे वो बांध कर नहीं रखे तो वह समीप ही बस्ती या जंगल की राह पकड़ लेता है जिसके चलते बांधकर रखना मज़बूरी है। परिजनों ने बताया कि परिवार में सब मेहनत मजदूरी करके पेट पालते है ऐसे में इलाज भी कराये तो कैसे? 

नाहरगढ़ थाना इलाके के कदली गांव में नाबालिग को पेड़ से बांधने की विवशता मामले पर नाहरगढ़ पुलिस ने प्रसंज्ञान लिया है थानाधिकारी दलपत सिंह के निर्देश पर जलवाड़ा चोकी एएसआई जाकिर हुसैन कदली गांव पहुंचे और परिजनों से नाबालिग की विक्षिप्तता की जानकारी ली। हम आपको बता दे कि इस गांव के बुद्धाराम बैरवा का 17 वर्ष का नाबालिग नेत्र व मानसिक विकलांग है जो कहीं भी निर्वस्त्र होकर भाग जाता है। 

गौरतलब है कि सरकार व स्वयंसेवी संस्थाये बारां जिले में बंधक व विकलांगो की मुक्ति के दावे तो कर रही है मगर इनके दावों की पोल खोल रही है।  अब सोचना यह है कि आर्थिक मार से जूझते इस बेबस परिवार को कोई सम्बल दे पायेगा।

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