Live News »

प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में टिड्डियों ने मचा रखा कोहराम, नियंत्रण की कोशिश जारी
प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में टिड्डियों ने मचा रखा कोहराम, नियंत्रण की कोशिश जारी

जोधपुर: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से हवाओं के माध्यम से भारत आकर आधा दर्जन से अधिक जिलों में कोहराम मचाने वाली टिड्डी ने किसानों की नाक में दम कर रखा है. फसलें चौपट हो रही है तो वहीं केंद्र सरकार ने विदेशी मशीने मंगाकर नियंत्रण की कोशिश की है तो उधर राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद मॉनिटरिंग करने के साथ अपने मंत्रियों के जरिए पल पल का फीडबैक भी ले रहे हैं और किसानों के गिरदवारी कराने के साथ मुआवजे की भी व्यवस्था की है, तो उधर टिड्डी नियंत्रण दल भी लगातार टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैदी से जुटी हुए है. 

टिड्डियों ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी: 
हवाओं के साथ एक देश से दूसरे देश में टिड्डियों का आना वैसे तो प्राकृतिक आपदा में माना जाता है लेकिन जिस तरह पाकिस्तान में टिड्डियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने का खामियाजा भारत के किसानों को भुगतना पड़ा है. खासतौर पर जब पाकिस्तान से हवाओं के साथ पश्चिम क्षेत्र के उन जिलों में टिड्डियों ने फसलों को नुकसान किया है जो भारत और पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए हैं वहां टिड्डियों ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है. यह एक अलग बात है कि टिड्डियों के आने से पहले दूर दृष्टि रखते हुए राजस्थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया और राजस्व मंत्री हरीश चौधरी पहले से सक्रिय हो गए थे तो किसानों को सूचित कर दिया था जिसके चलते किसानों ने तो अपने स्तर पर टिड्डियों को रोकने की कोशिश की थी मगर टिड्डियों के आने का सिलसिला इतना तेज रहा कि बाड़मेर व जैसलमेर के बाद जालौर पाली, सिरोही व जोधपुर भी चपेट में आ गए.

टिड्डियों की वजह से किसानों को काफी नुकसान हुआ: 
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रभावित क्षेत्र में दौरा करने के साथ पहले गिरदावरी और बाद में मुआवजे की व्यवस्था भी कर दी. यही नही केंद्रीय मंत्रियों के दौरे के साथ-साथ भारत सरकार की ओर से भी विदेशों से मशीनें भिजवाई गई और दमकलों के जरिए भी दवाई का छिड़काव करवाया जिससे टिड्डी का कोई भी दल यहां रह नहीं जाए और फसलों को नुकसान नहीं कर दें. कांग्रेस नेता ललित सुराणा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सूखा और अकाल का प्रबंधन किया उसी तरह टिड्डी नियंत्रण के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई है. काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ विपिन चौधरी ने बताया कि टिड्डियों की वजह से किसानों को काफी नुकसान हुआ है मगर प्रभावी नियंत्रण के चलते अब टिड्डियां पुनः पाकिस्तान की ओर वापस जाने भी लगी है.

टिड्डी की उड़ान दो हजार मील तक पाई गई: 
गौरतलब है कि टिड्डी  ऐक्रिडाइइडी परिवार के ऑर्थाप्टेरा गण का कीट है. हेमिप्टेरा गण के सिकेडा वंश का कीट भी टिड्डी या फसल डिड्डी कहलाता है. इसे लधुश्रृंगीय टिड्डा भी कहते हैं. संपूर्ण संसार में इसकी केवल छह जातियां पाई जाती हैं. यह प्रवासी कीट है और इसकी उड़ान दो हजार मील तक पाई गई है. इस बार जब टिड्डी आई है तो उसका असर केवल भारत और पाकिस्तान में नहीं बल्कि अफगानिस्तान व ईरान में भी रहा है.  

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें
और पढ़ें

Stories You May be Interested in