VIDEO: स्वाइन फ्लू के तेवर कम, लेकिन आंकड़ा बना रहा 'रिकार्ड'

Vikas Sharma Published Date 2019/03/27 06:15

जयपुर। आईए अब हम बात करते हैं राजस्थान में मौत बनकर उभर रहे स्वाइन फ्लू को लेकर नई तस्वीर की। प्रदेश में इस साल जनवरी-फरवरी की तुलना में भले की मार्च माह में स्वाइन फ्लू के तेवर कम हुए हो, लेकिन पिछले चार सालों में देखे तो यह आंकड़ा रिकॉर्ड छू रहा है। स्वाइन फ्लू को लेकर क्या है राजस्थान में मौजूदा स्थिति और विभाग रोकथाम के लिए किस प्लानिंग पर कर रहा है काम, एक रिपोर्ट: 

मरूधरा में मौसमी बीमारियों ने पूरे 12 महीने घर कर लिया है। फिर चाहे स्वाइन फ़्लू हो या डेंगू, हर बीमारी मौत के रूप में कहर बरपा रही है। भले ही चिकित्सा विभाग दावा कर रहा हो कि राजस्थान को बीमारू प्रदेश की स्थिति से बाहर ला दिया गया है, लेकिन सच्चाई ये है कि अकेले स्वाइन फ्लू ने इस साल में 186 जानें लील ली है। यानी हर दो दिन में पांच लोग बने मौत का ग्रास। इस दौरान रिकॉर्ड तोड 4808 मरीज पॉजिटिव चिन्हित किए गए। हालांकि चिकित्सा विभाग मार्च आते-आते थोड़ा राहत की सांस ले रहा है। मौत और पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ कुछ कम होता नजर आ रहा है, लेकिन चिंता ये है कि यह आंकड़ा भी पिछले सालों की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में अब चिकित्सा विभाग स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर केन्द्र सरकार की गाइडलाइन पर फोकस कर रहा है। 

पिछले चार सालों में मार्च में स्वाइन फ्लू की स्थिति:
वर्ष             मौत             पॉजिटिव 

2016           5                   17
2017           9                   39
2018          211                19
2019          644                49

इस साल आधा दर्जन जिलों में सर्वाधिक मौतें:
- प्रदेश में छह जिलों में स्वाइन फ्लू के मौत का आंकड़ा पहुंचा दहाई पार 
- जोधपुर में सर्वाधिक 34 मौत, जयपुर 17, बाड़मेर में 16, कोटा 14, उदयपुर 11, चूरू 10 लोग गंवा चुके जान 
- सिरोही, बारां व झालावाड़ा जिले में इस बार नहीं किसी भी व्यक्ति की मौत 
- पॉजिटिव मरीजों के आंकड़े में जयपुर सबसे ऊपर, 2081 मरीज किए गए पॉजिटिव चिन्हित 

राजस्थान में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को चिकित्सा विभाग माइक्रो सर्विलांस से जोड़कर देख रहा है। विभाग का मानना है कि राजस्थान में जांच का दायरा जिला स्तर पर उपलब्ध है, जिसके चलते मामले बढ़े है। जबकि अगर गाइडलाइन के हिसाब से देखें तो सर्दी, खांसी, जुखाम के केटेगेरी ए के मरीजों को जांच के बजाय सीधे दवा दी जानी चाहिए, लेकिन अब विभाग देशभर में राजस्थान की बदनामी को देखते हुए गाइडलाइन की पालना पर जोर दे रहा है। फील्ड अधिकारियों को गाइडलाइन को समझाने के लिए बकायदा वीडिया कांफ्रेस का आयोजन किया गया है। 

स्वाइन फ्लू के वायरस को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत फील्ड में झोक रखी है। हालांकि अभी इसके सकारात्मक परिणाम आने बाकी है। ऐसे में अब जरूरत इस बात की है कि विभाग जागरूकता पर और फोकस करे। खुद चिकित्सकों की मानें तो अगर स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखते ही उपचार लेना शुरू किया जाए, तो निश्चित तौर पर स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों पर लगाम कसी जा सकती है। 

...संवाददाता विकास शर्मा की रिपोर्ट 

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