SP-BSP गठबंधन पर मायावती का बड़ा बयान, कहा...

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/04 11:43

लखनऊ: सपा बसपा गठबंधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में चल रहे कयास पर अब लगाम लग गया है. बीएसपी प्रमुख मायावती ने आज सुबह प्रेस-कॉंफ्रेंस करके इस पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हमारा संबंध केवल राजनीति के लिए नहीं, यह हमेशा के लिए जारी रहेगा.
बसपा प्रमुख ने कहा कि जब से सपा-बसपा गठबंधन हुआ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव ने मुझे बहुत सम्मान दिया है. मैंने राष्ट्र के हित में हमारे सभी मतभेदों को भी भूला दिया, और उन्हें सम्मान दिया. हमारा संबंध केवल राजनीति के लिए नहीं है, यह हमेशा के लिए जारी रहेगा.''

गठबंधन में राजनीतिक मजबूरियां
सपा-बसपा गठबंधन पर बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, हालांकि, हम राजनीतिक मजबूरियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते. यूपी में लोकसभा चुनाव के नतीजों में, समाजवादी पार्टी, 'यादव' समुदाय का आधार वोट, पार्टी का समर्थन नहीं करता था. यहां तक ​​कि सपा के मजबूत दावेदार भी हार गए

गठबंधन में नही चल रहा कुछ भी ठीक
इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन अखिलेश यादव और मायावती के बयानों से साफ है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. मायावती ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि चुनाव नतीजों से साफ है कि बेस वोट भी सपा के साथ खड़ा नहीं रह सका है. सपा की यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं. 

उल्लेखनीय है कि बसपा अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को पार्टी नेताओं की एक समीक्षा बैठक की थी. इसमें मायावती ने घोषणा की कि बसपा राज्य में अकेले 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव लड़ेगी. इसका साफ मतलब है कि मायावती समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन जारी रखने के मूड में नहीं हैं. बसपा सामान्य तौर पर उपचुनाव नहीं लड़ती है लेकिन इस बार उसने घोषणा की है कि वह राज्य के उपचुनावों में अपने उम्मीदवार उतारेगी.

गठबंधन का नहीं हुआ फायदा
हालांकि गठबंधन के भविष्य पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी, सूत्रों ने कहा कि  मायावती ने मूल्यांकन रिपोर्ट पेश की थी कि सपा के साथ गठबंधन से पार्टी को बहुत फायदा नहीं हुआ क्योंकि वोटों का हस्तांतरण खराब था, विशेषकर यादव समुदाय के, जो मूल रुप से सपा के वोटर थे, उन्होंने सपा को ही वोट नहीं दिया. अगर ऐसा होता तो पार्टी हारती नहीं.वहीं एक सूत्र ने कहा कि गठबंधन को खारिज करना जल्दबाजी होगी. सूत्र ने कहा, "जब तक दोनों नेता इसे सार्वजनिक रूप से नहीं कहते, तब तक यह कहना जल्दबाजी होगी."

अखिलेश ने दिए संकेत
जहां एक तरफ दिल्ली में मायावती गठबंधन तोड़ने के संकेत दे रही थीं और वहीं आजमगढ़ में अखिलेश जीत के लिए वोटरों को धन्यवाद दे रहे थे. लेकिन चुनाव नतीजों के बाद पहली बार कैमरे पर आए अखिलेश यादव ने आगे की लड़ाई के लिए नए प्लान पर काम करने की बात कही. उन्होंने कहा कि अब अपना साधन और अपने संसाधन से हम चुनाव लड़ेंगे. हालांकि यादवों का वोट ट्रांसफर नहीं होने की मायावती की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया देने से अखिलेश यादव बचते हुए नजर आए.

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