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विधायक खरीद-फरोख्त प्रकरण: मुझे धमकी दे रहे, मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन लाएंगे- महेश जोशी

जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनावों के बाद एक बार फिर सियासी पारा उफान पर है. लगातार विधायकों की खरीद-फरोख्त का प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप जारी है. अब मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी ने कहा कि मुझे धमकी दे रहे हैं, मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन लाएंगे. कटारिया जी-पूनिया जी विशेषाधिकार हनन लेकर तो आए. CM के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव उनकी बौखलाहट का परिचायक है. फिर भी हम स्वागत करते हैं, संवैधानिक प्रक्रिया का जवाब देंगे. 

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बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के बयानों पर पलटवार:
इसके साथ ही डॉ. महेश जोशी ने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के बयानों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा है कि हमारी सरकार जांच एजेंसियों को प्रभावित नहीं कर रही है. ये कार्य बीजेपी राज में होता था. SOG की जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से हो रही है. मुझे भी बयान देने के लिए बुलाया गया है. हम तो इसलिये आगाहै क्योंकि पड़ोसी राज्यों में बीजेपी ने क्या किया यह सबकों पता है. 

जिसका ईमान डिग जाये वो कांग्रेसी नहीं:
इसके साथ ही मुख्य सचेतक ने कहा कि किसी भी कांग्रेसी का ईमान नहीं डिगेगा, जिसका ईमान डिग जाये वो कांग्रेसी नहीं. इस बात का मुझे पूरा भरोसा है. बता दें कि डॉ. महेश जोशी को भी SOG ने नोटिस जारी किया है. SOG ने महेश जोशी को बयान देने के लिए बुलाया है. 

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2 मोबाइल नम्बर की बात में कई बड़े खुलासे:
SOG की FIR में कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों को 20-25 करोड़ का प्रलोभन देने की बात भी सामने आई है. 2 मोबाइल नम्बर की बात में कई बड़े खुलासे हुए हैं. प्रदेश में नया मुख्यमंत्री बनाने की भी बात हुई है. भाजपा का कहना है कि CM हमारा होगा और उप मुख्यमंत्री को केन्द्र में मंत्री बना दिया जाएगा. उप मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बारे में भी इन मोबाइल पर बात हुई है. 

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जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय मामले पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. मदन दिलावर की ओर से हरीश साल्वे ने बहस की है. हरीश साल्वे लंदन से VC के जरिए जुड़े थे. हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी कर कल सुबह 10.30 बजे तक जवाब मांगा है. ऐसे में अब इस मामले पर कल सुनवाई होगी. 

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बता दें कि बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ के 30 जुलाई के आदेश को अब खण्डपीठ में चुनौती दी गयी थी. अपील पेश करने के साथ बसपा और भाजपा विधायक मदन दिलावर के अधिवक्ताओं की ओर से शीघ्र सुनवाई की अर्जी भी पेश की गयी. इसी के चलते हाईकोर्ट ने दोनों ही अपीलों पर शीघ्र सुनवाई की अर्जी मंजूर करते हुए बुधवार को सुनवाई के लिए रखा. मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ बुधवार को इन अपीलों पर सुनवाई हुई. 

विलय को लेकर कोई अंतरिम राहत नहीं: 
बहुजन समाज पार्टी और भाजपा विधायक मदन दिलावर की ओर से अपील पेश कर विलय को रद्द करने की भी गुहार लगायी गयी है. अपील में कहा गया है कि एकलपीठ ने उनकी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विलय को लेकर कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. विधानसभा अध्यक्ष सचिव और बसपा विधायकों को केवल नोटिस ही जारी किये गये है. जबकि वर्तमान हालात में बसपा के सभी 6 विधायक जैसलमेर की एक होटल में है और उन्हे नोटिस सर्व कराना आसान नहीं है. उनके परिजन भी नोटिस प्राप्त कर रहे हैं. गौरतलब है कि 30 जुलाई को जस्टिस महेन्द्र गोयल की एकलपीठ ने मदन दिलावर और बसपा की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और बसपा के 6 विधायकों को नोटिस जारी कर 11 अगस्त तक जवाब पेश करने के आदेश दिये है. लेकिन एकलपीठ ने बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी. 

क्या है मामला:
18 सितंबर 2019 को बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के आदेश जारी हुए थे. जिस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए भाजपा विधायक मदन दिलावर ने 16 मार्च 2020 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत में बसपा विधायको का कांग्रेस में विलय को अमान्य करार देते हुए रद्द करने की मांग कि गई. 4 माह तक जब शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की गई तो 17 जुलाई केा पुन: विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर कार्यवाही करने की मांग की. विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं करने पर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कि गई. 

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बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को अमान्य करार देने की मांग: 
याचिका की सुनवाई के दौरान विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जानकारी दी गयी की 24 जुलाई को ही शिकायत खारिज कर दी गयी है. विधानसभा अध्यक्ष के जवाब के आधार पर याचिका को सारहीन मानते हुए हाईकोर्ट ने मदन दिलावर की याचिका को खारिज कर दिया. लेकिन साथ ही मदन दिलावर को मामले में नयी याचिका पेश करने की छूट दी. बाद में सशोधित याचिका पेश कर मदन दिलावर ने बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को अमान्य करार देने की मांग की. बहुजन समाज पार्टी ने भी इसमें शामिल होते हुए अलग से याचिका दायर की. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 30 जुलाई को दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और बसपा के 6 विधायकों को नोटिस जारी किये. लेकिन बसपा विधायकों के विलय को अमान्य घोषित करने के मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी. 

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जयपुर: पिछले दिनों लगातार सोशल मीडिया में दीया कुमारी के महामंत्री बनाए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं थी लेकिन जब दिया कुमारी से मंगलवार को वसुंधरा राजे को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह उनका बहुत सम्मान करती है पहली बार संगठन में मंत्री उन्हें वसुंधरा राजे ने ही बनाया था. साथ ही विधायक बनने के पीछे भी दीया कुमारी ने वसुंधरा राजे को श्रेय दिया. उन्होंने सोशल मीडिया से लेकर पार्टी के गलियारों में चल रही चर्चाओ को सिरे से खारिज किया. नई जिम्मेदारी मिलने पर जेपी नड्डा सतीश पूनियां व चंद्रशेखर का खास आभार जताया.

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हम राम के वंशज है हमारे लिए यह गर्व की बात:
इस दौरान उन्होंने प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्र शेखर से भी मुलाकात की और  आभार जताया. पूनिया और चंद्रशेखर ने उन्हें नई जिम्मेदारी की बधाई और शुभकामनाएं दी. दिया कुमारी ने कहा की पार्टी ने मुझे जो इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है. मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी जितना भी मुझे पार्टी की और काम दिया जाएगा उसको पूरी तरह से निभाउंगी. वहीं दीया कुमारी ने राम मंदिर के शिलान्यास को लेकर कहा की हम राम के वंशज है हमारे लिए यह गर्व की बात है की पांच सौ साल बाद राम मंदिर बनेगा.

अभयारण्यों की बुरी स्थिति को लेकर नाराजगी भी जताई:
कल देश में एतिहासिक काम होने जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी प्रहार करते हुए कहा कि सरकार ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है और प्रदेश की जो वर्तमान में स्थिति है वह जनता के सामने है साथ ही उन्होंने कहा कि 2 दिनों में बाघों की मौत होने को लेकर वह प्रकाश जावड़ेकर से बातचीत करेंगे और उन्हें पत्र भी लिखेंगी. प्रदेश के अभयारण्यों की बुरी स्थिति को लेकर नाराजगी भी जताई. दीया कुमारी ने कहा है कि अब वह समयबद्ध रूप से पार्टी कार्यालय आती रहेंगी. प्रदेश अध्यक्ष द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के लिहाज से संगठन में सतत मेहनत और परिश्रम करेंगे. दीया कुमारी से संवाददाता ऐश्वर्य प्रधान ने खास बातचीत की .

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Rajasthan Political Crisis: विधायकों के वेतन भत्ते रोकने से जुड़ी जनहित याचिका खारिज

Rajasthan Political Crisis: विधायकों के वेतन भत्ते रोकने से जुड़ी जनहित याचिका खारिज

जयपुर: प्रदेश के सियासी संकट के बीच विधायकों के वेतन भत्ते रोकने से जुड़ी पत्रकार विवेक सिंह जादौन की जनहित याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने संबंधित अथॉरिटी के समक्ष प्रतिवेदन पेश करने की छूट दी है. सीजे इंद्रजीत महांति, जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने याचिका को खारिज किया है. 

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प्रदेश में वित्तीय हालात सही नहीं:  
इससे पहले पत्रकार विवेक सिंह जादौन ने जनहित याचिका दायर कर होटलों में रुके विधायकों को वेतन भत्ते रोकने को लेकर यह कहते हुए चुनौती दी थी कि कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश में वित्तीय हालात सही नहीं है. लेकिन फिर भी एमएलए अपने मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों में नहीं जा रहे हैं. जनहित याचिका में कहा गया कि विधायक ना ही अपने क्षेत्र में जा रहे है और ना ही विधायी कार्य कर रहे है ऐसे में उन्हें वेतन-भत्तों का भुगतान क्यों किया जाए. 

एमएलए आमजन के धन का दुरुपयोग कर रहे:  
पीआईएल में कहा कि प्रदेश में एक ही राजनीतिक दल से जुड़े ये एमएलए आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते आमजन के धन का दुरुपयोग कर रहे है. इसलिए जयपुर व मानेसर की होटलों में रुके हुए एमएलए के वेतन-भत्तों को रोका जाए. याचिका में सीएम सहित विधानसभा स्पीकर, विधानसभा सचिव व मुख्य सचिव को पक्षकार बनाया है. मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति की खण्डपीठ में याचिका पर सुनवाई होगी. 

राज्यपाल को पद से हटाने से जुड़ी याचिका को खारिज किया: 
वहीं इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने आज राज्यपाल से जुड़ी 2 महत्वपूर्ण जनहित याचिकाओं को भी खारिज कर दिया. राज्यपाल को पद से हटाने से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने जनहित याचिका को सारहीन बताया. शांतनु पारीक द्वारा लगाई गई याचिका को सीजे इंद्रजीत महांति ने सारहीन बताते हुए खारिज किया. याचिका में विधानसभा सत्र नहीं बुलाने को लेकर राज्यपाल को हटाने की गुहार की गई थी. इसके साथ ही केंद्र सरकार को राष्ट्रपति को सिफारिश भेजने के निर्देश देने की भी मांग की गई थी. 

जैसलमेर में विधायक मन से साथ, हम फ्लोर टेस्ट को तैयार- परसादी लाल मीणा  

राज्यपाल से जुड़ी दूसरी जनहित याचिका भी खारिज: 
इसके साथ ही राज्यपाल से जुड़ी दूसरी जनहित याचिका भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. एडवोकेट एसके सिंह की जनहित याचिका को विड्रॉ करने पर हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह जनहित याचिका राज्यपाल को सत्र आहूत करने के निर्देश देने को लेकर दायर की गई थी. 

 
 

जैसलमेर में विधायक मन से साथ, हम फ्लोर टेस्ट को तैयार- परसादी लाल मीणा

जैसलमेर में विधायक मन से साथ, हम फ्लोर टेस्ट को तैयार- परसादी लाल मीणा

जयपुर: जैसलमेर में बाड़े बंदी से लौटकर उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने सचिवालय आकर कामकाज संभाला और उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक ली. बैठक के बाद उन्होंने मौजूदा सियासी संकट से लेकर उद्योग विभाग की गतिविधियों तक से जुड़े कई मुद्दों पर बेबाकी से बातचीत की. परसादी लाल मीणा ने कहा कि जैसलमेर में विधायक मन से साथ हैं और विधायकों के आपस में एक दूसरे के कमरे में न जाने या पूछकर ही बाहर आने जैसी बातें मनगढ़ंत हैं जो हॉर्स ट्रेडिंग में लिप्त लोगों ने उड़ाई हैं जिसमे सच्चाई नहीं है. 

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300-400 करोड़ के इस पैकेज से उद्योगों को उबरने में राहत मिलेगी:
उन्होंने बताया कि कोरोनावायरस के चलते झटका खा रहे उद्योगों को राहत देने का प्रस्ताव कैबिनेट ने अप्रूव किया है और 300-400 करोड़ के इस पैकेज से उद्योगों को उबरने में राहत मिलेगी. उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने वन स्टॉप शॉप का फैसला किया है लेकिन इसका अभी ऑर्डिनेंस नहीं बन सकता लेकिन विधानसभा में इसी सत्र में इस का बिल लाएंगे जिसकी तैयारी की जा रही है. इसके बाद उद्योग लगाने के लिए सौ तरह की अनुमति 1 ही जगह ली जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि पूर्व राजस्व प्रमुख सचिव संदीप वर्मा ने गलत तरीके से पावर रीको की भूमि अधिग्रहण की पावर ले ली थी जिसे अब वापस संशोधित किया गया है. इस संशोधन के कल तक आदेश निकल जाएंगे जिसके बाद 22 क्षेत्र में उद्योगों के लिए जमीन रीको एक्वायर करके उद्योग शुरू करवाए जाएंगे. उन्होंने खुद के सचिवालय आने को लेकर कहा कि जनता के काम मे अड़चन नहीं आएगी...

सरकारी काम सारे हो रहे हैं: 
कोई फाइल पेंडिंग नहीं है और इस बारे में विपक्षी आलोचक गलत बातें मीडिया में प्रचारित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 13-14 अगस्त या इससे पूर्व भी सारे विधायक विधानसभा में भाग लेने के लिए जयपुर आ सकते हैं और उन पर किसी तरह की बंदिश नहीं है. 

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विधायकों ने ही जैसलमेर को चूज किया: 
बाड़े बंदी की जगह बदलने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि विधायकों ने ही जैसलमेर को चूज किया है. सभी विधायकों का लोकतंत्र और सरकार बचाने का संकल्प है. मीणा ने कहा कि जब विपक्ष मांग करें तो फ्लोर टेस्ट के लिए हम तैयार हैं...103 विधायक हमारे साथ हैं. 

VIDEO: आखिर कहां है इस वक्त पायलट कैंप के विधायक? जानकार सूत्रों ने दिए संकेत

जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस वक्त सचिन पायलट कैंप के विधायक कहां हैं? इसको लेकर जानकार सूत्रों ने कुल 22 में से 18 विधायकों के गुजरात में किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाए जाने के संकेत दिए हैं. वहीं इसके साथ ही खुद पायलट और तीन विधायकों के फिलहाल दिल्ली में रहने के संकेत हैं. 

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मुख्यमंत्री पद से नीचे किसी भी और बात के लिए नहीं होगा समझौता: 
अलबत्ता कल सुबह मानेसर होटल में कुछ और कमरे बुक होने की खबर है. इसी बीच गहलोत और पायलट के बीच आलाकमान द्वारा समझौता वार्ता शुरू किए जाने की संभावना पर पायलट कैंप से जुड़े एक सूत्र ने खुलासा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद से नीचे किसी भी और बात के लिए समझौता नहीं होगा. इसका अर्थ ये हुआ कि खुलने से पहले ही बातचीत के दरवाजे बंद हो गए. 

 Rajasthan Political Crisis: प्रदेश के सियासी संग्राम से जुड़ी 5 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज 

20 दिन बाद मानेसर से लौटी SOG की टीम:
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के बागी विधायक भंवरलाल शर्मा सहित अन्य को नोटिस तामील कराने गई SOG की टीम 20 दिन बाद मानेसर से लौट आई. तीन बार तीन अलग-अलग टीमों को हरियाणा पुलिस ने होटल में नहीं जाने दिया. ऐसे में दो दिन बाद फिर नई टीम जाएगी. 
 

VIDEO: PCC की नई टीम की घोषणा जल्द, युवा चेहरों को मिलेगी जिम्मेदारी

जयपुर: प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई टीम पर काम शुरु हो चुका है. इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे के साथ विचार विमर्श हो चुका है. माना जा रहा है सचिन पायलट की तर्ज पर नहीं बनाई जाएगी जंबो टीम, नये, युवा और अनुभवी चेहरों को वरियता मिलेगी. बाड़ाबंदी के बाद उम्मीद है कि अगले एक महिने में डोटासरा की टीम सामने आ जाएगी.  

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कुछ विधायकों को भी संगठन में दायित्व सौंपे जायेंगे: 
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की टीम आ चुकी है और अब इंतजार है गोविन्द सिंह डोटासरा की टीम का. गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर  कुर्सी तो संभाल ली लेकिन पहली प्राथमिकता के तहत जुट गये सरकार बचाने में. कहा जा रहा है उन्होंने कवायद शुरु कर दी है, जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के साथ ही नये, युवा और अनुभवी चेहरों को वे टीम में शामिल करेंगे, लेकिन ये भी ध्यान रखेंगे कि टीम जंबो की बजाये मजबूत हो. सचिन पायलट के समय टीम का आकार बड़ा रहा, सचिवों की संख्या ही 50 से अधिक थी. हालांकि उनकी टीम जब बनी थी तब कांग्रेस सत्ता में नहीं थी. गोविन्द सिंह डोटासरा की कोशिश रहेगी कि संतुलित टीम बने. माना ये भी जा रहा है कि कुछ विधायकों को भी संगठन में दायित्व सौंपे जायेंगे.  हालांकि अभी मशक्कत हो रही संगठन महासचिव को लेकर, महेश शर्मा का उत्तराधिकारी ढूंढा जा रहा.  

-----संगठन महासचिव के दावेदार------

---पुखराज पाराशर- सी एम गहलोत के विश्वस्त माने जाते है पहले भी ये दायित्व संभाल चुके है, हालांकि इन्हें सरकार में नियुक्ति देने की भी चर्चाएं, लेकिन इस पद पर प्रमुख नाम इन्हीं का चल रहा. 

---मुमताज मसीह- मसीह भी सी एम गहलोत के निष्ठावान, पचास सालों से संगठन का अनुभव, हालांकि इन्हें भी सियासी नियुक्ति देने की चर्चा. 

---गिरिराज गर्ग- लंबे समय से संगठन को दे रहे सेवाएं , संगठन का व्यापक अनुभव

---सत्येन्द्र भारद्वाज - संगठनात्मक कौशल में निपुण,जोधपुर कांग्रेस के रह चुके प्रभारी 

Rajasthan Political Crisis: मायावती इन दिनों भाजपा के इशारे पर काम कर रही- मेघवाल  

संगठन महासचिव की जिम्मेदारी इस बार काफी अहम होगी. उसे सबसे पहले पंचायत और निकाय चुनावों की गणित से जूझना होगा. इतना ही नहीं डोटासरा का सारथी बनकर नई टीम को गति देने का कार्य करना होगा. कहा जा रहा है कि पीसीसी प्रदेश टीम के साथ ही जिलों में अध्यक्ष बनाने के कार्य को भी संपन्न किया जाएगा. सचिन पायलट के समय प्रभावी रहे संगठनात्मक पदाधिकारी और जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की छुट्टी तय मानी जा रही अर्थ ये है कि इन्हें फिर से जिम्मेदारी नहीं मिलेगी. सर्दियों से पहले डोटासरा के नई टीम लाने की योजना है.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

Rajasthan Political Crisis: मायावती इन दिनों भाजपा के इशारे पर काम कर रही- मेघवाल

Rajasthan Political Crisis: मायावती इन दिनों भाजपा के इशारे पर काम कर रही- मेघवाल

जैसलेमर: खाजूवाला से विधायक गोविंद मेघवाल ने फर्स्ट इंडिया न्यूज़ से खास बातचीत करते हुए कहा कि राजस्थान में जो संकटचल रहा है वह भाजपा की देन है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान के सच्चे जननायक है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 36 कोम को साथ लेकर चलते रहे हैं और दलितों के हितैषी रहे हैं. दरअसल, गांधीवादी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भाजपा को पच नहीं रहे इसलिए लगातार ऐसे षड्यंत्र रचे जा रहे हैं. 

Rajasthan Political Crisis: अब दिल्ली से आ रही एक चौंकाने वाली खबर, सोनिया गांधी के स्तर पर हो रही एक आखिरी कोशिश!

मायावती इन दिनों भाजपा के इशारे पर काम कर रही: 
दूसरी बार विधायक बने मेघवाल ने कहा कि दुर्भाग्य है की मायावती इन दिनों भाजपा के इशारे पर काम कर रही है. जनता की चुनी हुई सरकार है विधायकों का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में पूरा भरोसा है. हम आखिरी दम तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और हमारे आलाकमान के साथ रहेंगे. ये लड़ाई लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ी जा रही है. मुख्यमंत्री जी ने रक्षाबंधन त्यौहार हमारे बीच मनाकर ये संदेश छोड़ा कि कांग्रेस और विधायक उनके परिवार से भी बढ़कर है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए जैसलमेर से लक्ष्मण राघव की रिपोर्ट

Rajasthan Political Crisis: अब दिल्ली से आ रही एक चौंकाने वाली खबर, सोनिया गांधी के स्तर पर हो रही एक आखिरी कोशिश!

Rajasthan Political Crisis: अब दिल्ली से आ रही एक चौंकाने वाली खबर, सोनिया गांधी के स्तर पर हो रही एक आखिरी कोशिश!

जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच अब दिल्ली से चौंकाने वाली खबर आ रही है.  सूत्रों की माने तो गहलोत और पायलट कैंप के झगड़ों को निपटाने के लिए सोनिया गांधी के स्तर पर आखिरी कोशिश हो रही है. सोनिया कल ही अस्पताल से लौटी है. ऐसे में अब अगले तीन-चार दिनों में गांधी परिवार राजस्थान में कांग्रेस को टूटने से बचाने की आखिरी कोशिश कर सकता है. 

देर रात राजस्थान में बदली प्रशासनिक व्यवस्था, 57 IFS, 31 RAS अधिकारियों के तबादले 

2 दिन पहले खुद गहलोत दे चुके इसका इशारा: 
2 दिन पहले खुद गहलोत बागी विधायकों के माफी मांगने पर उन्हें गले लगा लेने का इशारा दे चुके हैं. लेकिन पायलट कैंप से जुड़े सूत्रों ने बागी विधायकों के किसी भी सूरत में माफी नहीं मांगने के स्पष्ट संकेत दिए हैं. फिर अब गहलोत-पायलट की लड़ाई में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से BJP भी एक फैक्टर बना नजर आ रहा है. 

कांग्रेस में लौटने का फैसला अकेले नहीं ले पाएंगे पायलट: 
पायलट और भाजपा मानसिक एवं वैचारिक रूप से एक-दूसरे के काफी निकट आ चुके हैं. ऐसे में वापस कांग्रेस में लौटने का फैसला पायलट अकेले नहीं ले पाएंगे. इसके लिए उन्हें दिल्ली में अपने 'राजनीतिक मित्रों' से बाकायदा सलाह-मशविरा करना होगा. इसलिए कुल मिलाकर पायलट कैंप के कदम वापस खींचने की संभावना बहुत क्षीण नजर आ रही है. 

मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला, राजस्थान न्यायिक सेवा में एमबीसी को 5 प्रतिशत आरक्षण की मंजूरी 

सचिन पायलट गुट के रुख पर सस्पेंस बरकरार:
दूसरी ओर विधानसभा सत्र के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट गुट के रुख पर सस्पेंस बरकरार है.वहीं मिली जानकारी के अनुसार पायलट कैम्प के सभी विधायक विधानसभा सत्र में शामिल होंगे. हालांकि सदन में सरकार के विश्वासमत हासिल करने के लिए फ्लोर टेस्ट होने की संभावना पर आखिरी फैसला सचिन पायलट ही तय करेंगे. 


 

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