कैसे हुई माँ दुर्गा की उत्त्पति, जानिए पूरी कहानी ज्योतिषचार्य पंडित मुकेश शास्त्री जी से

Pandit Mukesh Shastri Published Date 2017/09/20 02:09

इस बार दुर्गा उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रा पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानि दिनांक 21 सितम्बर 2017 गुरुवार के दिन से आरम्भ हो रहा है| इस बार शारदीय नवरात्र हस्त्र नक्षत्र रक्षा योग में प्रारंभ हो रहे हैं और नवरात्र के आठवें दिन महाअष्टमी धूम्र योग में और नवमी प्रबर्ध योग में मनाई जाएगी| इस बार शारदीय नवरात्र के 9 दिनों में से 7 दिन शुभ संयोग होंगे। सर्वार्थसिद्धी योग, अमृतसिद्धी योग, रवि योग जैसे शुभ संयोगों में किसी भी कार्य की शुरुआत करना श्रेष्ठ रहेगा।

इस वर्ष मां दुर्गा डोली पर सवार हो कर आ रही है| इसका आम जनमानस पर बहुत ही मंगलदायक प्रभाव पड़ेगा है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाले इन नवरात्रों को ‘शारदीय नवरात्र’ कहा जाता है| शारदीय नवरात्रों में दिन छोटे होने लगते है| मौसम में परिवर्तन प्रारम्भ हो जाता है| प्रकृ्ति सर्दी की चादर में सिकुडने लगती है| नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में जो लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं| माँ दुर्गा की कृपा से उन्हें सभी संकटो से मुक्ति मिलती है|

इस समय में माँ दुर्गा की पूजा उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है एवं सभी संकटों को हरने वाली माँ ना सिर्फ निरोगी काया बल्कि धन में वृद्धि एवं पारिवारिक शान्ति भी प्रदान करती है। व्यापारी को व्यापार लाभ के लिए, कर्मचारी को पदोन्नति के लिए, गृहस्थी को घर में सुख, शांति के लिए माँ दुर्गा की आराधना करनी चाहिए।

कैसे हुई मां दुर्गा की उत्त्पति:
दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय में आता है कि जब दानव राज महिषासुर ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर उनसे स्वर्ग का आधिपत्य छीन लिया तब सभी देवता त्रिदेव यानि (ब्रम्हा विष्णु और महेश) की शरण में पहुंचे और अपनी व्यथा उनसे कही| तब महिषासुर के इस कृत्य को सुनकर त्रिदेव बड़े क्रोधित हुए और उनके मुख मंडल से एक तेज निकलता है जो एक सुन्दर देवी में परिवर्तित हो जाता है| भगवान शिव के तेज से उस देवी का मुख बना| यमराज के तेज से सर के बाल, श्री विष्णु के तेज से बलशाली भुजाये, चंद्रमा के तेज से स्तन,धरती के तेज से नितम्ब, इंद्र के तेज से मध्य भाग, वायु से कान, संध्या के तेज से भोहै, कुबेर के तेज से नासिका और अग्नि के तेज से तीनो नेत्र उत्पन्न हुए|

तब भगवान शिव ने उस देवी को अपना त्रिशूल, श्री हरि विष्णु ने अपना चक्र, वरुण ने अपना शंख, वायु ने धनुष बाण, अग्नि ने शक्ति, बह्रमा ने कमण्डल इंद्र ने वज्र, हिमालय ने सवारी के लिए सिंह, कुबेर ने मधुपान, विश्वकर्मा ने फरसा और ना मुरझाने वाले कमल भेंट किये| इस प्रकार सभी देवताओ ने माँ भगवती को अपनी अपनी शक्तिया प्रदान की और इस प्रकार माँ दुर्गा उत्पन्न हुईं| तब माँ दुर्गा ने महिषासुर और उसकी सम्पूर्ण सेना का वध करके देवताओ को फिर से स्वर्ग दिला दिया और तीनों लोकों में माँ की जय जयकार हुई|

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