भोपाल OBC आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के हंगामे के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

OBC आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के हंगामे के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

OBC आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के हंगामे के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

भोपाल: कांग्रेस विधायकों ने मंगलवार को कमलनाथ के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा ओबीसी के लिए घोषित 27 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में हंगामा किया. इसके चलते अध्यक्ष ने शोर शराबे बीच जरूरी कामकाज निपटाकर तय समय से दो दिन पहले ही विधानसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया.

सदन में हंगामे के बीच भाजपा नीत सरकार द्वारा पेश जहरीली शराब से मौतों से संबंधित मामलों में मृत्युदंड व आजीवान कारावास के प्रावधान वाले विधेयक ‘मध्यप्रदेश आबकारी (संशोधन) विधेयक सहित छह अन्य विधेयकों को बिना बहस के पारित किया गया. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2021-22 की पहली अनुपूरक मांगों को भी मंजूरी दे दी गई. मध्यप्रदेश विधानसभा की वेबसाइट के अनुसार विधानसभा की कुल 230 सीटों में से तीन सीटें खाली हैं तथा भाजपा के 125, कांग्रेस के 95, बसपा के दो और सपा का एक तथा चार निर्दलीय विधायक हैं.

कांग्रेस सदस्य हंगामा करते हुए आसन के सामने आ गए. इसके कारण प्रश्नकाल बाधित हुआ. कांग्रेस के विधायक बढ़ती महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. इसके चलते अध्यक्ष गिरीश गौतम ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सदस्य, सरकार विरोधी नारों के साथ काले एप्रन पहने एक बार फिर आसन के सामने आ गए और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए घोषित 27 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने में देरी कर रही है.

विपक्ष के नेता कमलनाथ ने कहा कि राज्य सरकार आरक्षण को लागू नहीं करके ओबीसी विरोधी रुख अपना रही है. विपक्षी विधायकों की नारेबाजी के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए कुछ नहीं किया. चौहान ने कांग्रेस पर पाखंड और पिछड़े वर्गों को धोखा देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस इस मुद्दे पर ड्रामा कर रही है. इस बीच, कांग्रेस विधायकों ने कहा कि उच्च न्यायालय (जहां ओबीसी आरक्षण का मुद्दा लंबित है) में भाजपा सरकार के जवाब से पता चलता है कि उसे आरक्षण प्रदान करने में कोई दिलचस्पी नहीं है.

उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था लेकिन भाजपा सरकार इस फैसले के समर्थन में उच्च न्यायालय में दृढ़ता से जवाब पेश करने में विफल रही है. इसके बाद दोनों पक्षों के शोर शराबे के कारण कुछ सुनाई नहीं दिया और कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी के बीच अध्यक्ष गिरीश गौतम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कामकाज पूरा करते रहे. सूचीबद्ध कार्य पूरे करने के बाद अध्यक्ष ने हंगामे के बीच सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. वैसे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मानसून सत्र का समापन 12 अगस्त को होना था.

बाद में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पर पाखंड करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि लेकिन भाजपा सरकार ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. पीटीआई-भाषा से बात करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक कमलेश्वर पटेल ने दावा किया कि राज्य के महाधिवक्ता ने उच्च न्यायालय में कहा है कि सुनवाई पूरी होने तक ओबीसी आरक्षण पर रोक जारी रखी जाए.

पटेल ने आरोप लगाया कि इससे पता चलता है कि राज्य सरकार इस आरक्षण को लागू करने को तैयार नहीं है. दिग्विजय सिंह सरकार (1993-2003) ने ओबीसी आरक्षण को लागू करने का फैसला किया था लेकिन बाद की भाजपा सरकार ने इस मामले को अदालत में ठीक से नहीं लड़ा. अब, सरकार फिर वही कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछली कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी को दिए गए आरक्षण को लागू करने के लिए भाजपा सरकार उच्च न्यायालय में मजबूत जवाब नहीं दे रही है.

उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा का रुख स्पष्ट नहीं है. तत्कालीन कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मार्च 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था. इसके बाद उच्च न्यायालय ने इस फैसले पर रोक लगा दी.  (भाषा) 

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