पुत्र की मृत्यु से दुखी होकर महाराजा विजयसिंह ने शीतला माता को कर दिया था शहर से निष्कासित

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/27 09:23

जोधपुर। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी सूर्य नगरी जोधपुर में आज शाम ऐतिहासिक शीतला माता मेले का आगाज होगा। घरों में कल ठंडे भोजन का सेवन किया जाएगा तो वहीं अकेला जोधपुर ही ऐसा जिला है जहां अष्टमी को शीतला पूजन होता है। जोधपुर की कागा पहाड़ियों स्थित शीतला माता मंदिर में कल सुबह से पूजा-अर्चना का दौर शुरू होगा जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

पूरे देश में होली के सात दिन बाद सप्तमी का शीतला माता का पूजन किया जाता है, लेकिन जोधपुर में यह पूजा अष्टमी को होती है। जोधपुर में सदियों से दैवीय पूजन विधि विधान की अपेक्षा एक राजा के आदेशानुसार अब तक होता आ रहा है। माता निकलने की वजह से पुत्र की मृत्यु होने पर जोधपुर के तत्कालीन महाराजा विजयसिंह ने शीतला माता को जोधपुर शहर से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद से अब तक जोधपुर में शीतला माता की पूजा अष्टमी को की जाती है। 

जोधपुर के तत्कालीन महाराजाविजयसिंह साल सत्रह सौ बावन में अपने पिता महाराजा बखतसिंह के निधन होने पर जोधपुर के महाराजा बने थे। इसके अगले वर्ष महाराजा रामसिंह ने उनसे सत्ता हथिया ली थी। इसके बाद में उनका निधन होने पर सत्रह सौ बहत्तर में एक बार फिर जोधपुर के महाराजा बने। इसके कुछ वर्ष बाद माता चेचक निकलने के कारण शीतला सप्तमी को उनके बड़े पुत्र का निधन हो गया। माता के प्रकोप से पुत्र की मौत से दुखी महाराजा ने शीतला माता को शहर से निष्कासन का आदेश जारी कर दिया। इस पर जूनी मंडी स्थित शीतला माता मंदिर से शीतला माता की प्रतिमा को उठाकर कागा की पहाडिय़ों में पहुंचा दिया गया। 

जोधपुर में कागा क्षेत्र श्मशान स्थल था। इसके निकट ही एक बाग भी था। श्मशान के निकट पहाड़ी में माता की प्रतिमा को रखवा दिया गया। महाराजा का गुस्सा इससे भी शांत नहीं हुआ। उन्होंने कागा की तरफ खुलने वाले नगर के द्वार नागौर गेट को लूण नमक से चुनवा दिया। कई लोग आज भी बोलचाल में इस द्वार को नागौर गेट के बजाय लूणिया दरवाजा कहते है। समय के साथ महाराजा का गुस्सा शांत अवश्य हुआ, लेकिन शीतला माता का निष्कासन रद्द नहीं हो पाया। कई साल बाद कागा की पहाडिय़ों में शीतला माता की प्रतिमा के इर्द-गिर्द मंदिर का निर्माण कराया गया। तब से लेकर अब तक शहर के लोग सप्तमी के बजाय अष्टमी को शीतला माता की पूजा करते हैं।

नवजात शिशुओं और बच्चों को चर्म संबंधी बीमारियों से संरक्षण की मनौती से जुड़े शीतला माता पूजन और ऐतिहासिक मेले का विधिवत उद्घाटन आज शाम 4:30 बजे गाजे बाजों के साथ किया जाएगा और सीता माता के पूजन के बाद मंदिर पर ध्वजारोहण किया जाएगा।

...राजीव गौड़ फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर

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