Maharashtra: 6 महिनें के बाद फिर खुले धार्मिक स्थल, सीएम ठाकरे ने परिवार समेत किया मुंबा देवी का दर्शन

Maharashtra: 6 महिनें के बाद फिर खुले धार्मिक स्थल, सीएम ठाकरे ने परिवार समेत किया मुंबा देवी का दर्शन

Maharashtra: 6 महिनें के बाद फिर खुले धार्मिक स्थल, सीएम ठाकरे ने परिवार समेत किया मुंबा देवी का दर्शन

मुंबई: कोविड-19 महामारी के कारण लगभग 6 महीने तक बंद रहने के बाद महाराष्ट्र में धार्मिक स्थल गुरुवार को पुनः खुले और मुंबई तथा अन्य स्थानों पर मंदिरों और मस्जिदों में सुबह से ही श्रद्धालुओं को देखा गया. नवरात्र के पहले दिन धार्मिक स्थलों के खुलने के साथ ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे और दोनों बेटे आदित्य और तेजस यहां सुबह आठ बजकर 45 मिनट पर मुंबा देवी के मंदिर गए और देवी के दर्शन किये. 

मुंबई में सुबह से ही मंदिरों और मस्जिदों में मास्क लगाए सामाजिक दूरी का पालन करते हुए श्रद्धालु देखे गए. ठाकरे परिवार ने भी मास्क लगा कर और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मुंबा देवी मंदिर में लगभग आधे घंटे बिताए. मुख्यमंत्री के साथ मुंबई की महापौर किशोरी पेडनेकर भी मौजूद रहीं, दर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री ने लोगों को नवरात्र की शुभकामनाएं दी. 

कोरोना महामारी की पूरी तरह समाप्त होने की प्रार्थना:
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मद्देनजर प्रार्थना स्थल पर स्वास्थ्य नियमों का पालन करना सभी का दायित्व है. ठाकरे ने कहा कि उन्होंने कोरोना वायरस जनित महामारी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए मुंबा देवी से प्रार्थना की राज्य में गुरुवार को मुंबई के अलावा अन्य स्थानों पर भी धार्मिक स्थल पुनः खुले ठाणे में भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य निरंजन डावखरे प्रसिद्ध घंटाली देवी के मंदिर गए और दर्शन किये.  पारंपरिक परिधान में अनेक श्रद्धालु भी दर्शन करने मंदिर पहुंचे. ठाणे शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में कोपिनेश्वर मंदिर अंबरनाथ में भगवान शिव का मंदिर भी फिर से खोला गया. पालघर जिले के डहाणू में महालक्ष्मी मंदिर और वसई में वज्रेश्वरी मंदिर में सांगीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. फूल बेचने वालों और अन्य विक्रेताओं ने धार्मिक स्थलों के फिर से खुलने पर प्रसन्नता व्यक्त की. सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की थी जिसके अनुसार, प्रसाद वितरण, पवित्र जल के छिड़काव, प्रतिमा को स्पर्श करने आदि की मनाही है. सोर्स-भाषा
 

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