प्रदेश की भूमि आवंटन नीति में बड़े बदलाव, अब अलॉटमेंट से पूर्व मांगी जाएगी आमजन से आपत्ति

प्रदेश की भूमि आवंटन नीति में बड़े बदलाव, अब अलॉटमेंट से पूर्व मांगी जाएगी आमजन से आपत्ति

प्रदेश की भूमि आवंटन नीति में बड़े बदलाव, अब अलॉटमेंट से पूर्व मांगी जाएगी आमजन से आपत्ति

जयपुर: राज्य सरकार (State Government) से प्रदेश की आवंटन नीति (Allocation Policy) में बड़े बदलाव किए हैं. नई आवंटन गाइडलाइन जारी कर दी गई है. विभागीय गाइडलाइन के अनुसार आवंटन से पहले आम जन की आपत्ति मांगी जाएगी. आपत्ति आने पर आवंटन प्रक्रिया को रोका जाएगा और उसकी नए सिरे से जांच की जाएगी. विभिन्न प्रकार की संस्थाओं के मामलों में आपत्तियां मांगी जाएगी. 

आपत्तियों के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा:
गाइडलाइन के अनुसार आंवटन के समय आमजन से मांगी गई आपत्तियों का कम से कम 15 दिनों का समय रहेगा. लेकिन यह प्रावधान सरकारी विभाग को आवंटन पर नहीं लागू होगा. नगरीय विकास विभाग ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए है. प्रदेश में आंवटन की नई नीति से अब राज्य सरकार के विभागों को भूमि आवंटित हो सकेगी. अब शहरों की बेशकीमती भूमि आंवटित की जा सकेंगी. बेशकीमती भूमि का मतलब ऐसी भूमि से है, जिसकी आरक्षित/डीएलसी दर निकाय क्षेत्र में सबसे अधिक है. 

बेशकीमती भूमि आवंटित नहीं करने वाला प्रावधान हुआ खत्म:
पूर्व में सरकारी आंटन ​नीति में बेशकीमती जमीनों को आंवटन नहीं करने के निर्देश थे किंतु अब इस नई गाइडलाइन के बाद सरकार ने आवंटन नीति के इस प्रावधान को खत्म कर दिया है. अब शहर में बेशकीमती जमीनों का भी आंटन हो सकेगा. सरकार ने भूमि आवंटन नीति में व्यापक बदलाव लागू किए है. विभाग के सचिव स्तर की स्क्रीनिंग कमेटी जो सिफारिश करेगी उस पर कैबिनेट एम्पावर्ड कमेटी (Cabinet Empowered Committee) फैसला करेगी. कैबिनेट एम्पावर्ड कमेटी का फैसला अंतिम माना जाएगा.

कमेटी के फैसले को किसी दूसरी कमेटी अथवा किसी अन्य अधिकारी के पास परीक्षण के लिए नहीं भेजा जाएगा. कमेटी के फैसले को निकायों को 30 दिन में पालना भी करनी होगी 

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