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VIDEO: SMS स्टेडियम के बड़े प्रोजेक्ट्स हुए बंद, न खेल भवन बन पाया न बैडमिंटन हॉल

जयपुर: स्टेट गेम्स के नाम पर तीन दिन तक खिलाड़ियों का मेला भरकर खेल मंत्री अशोक चांदना ने भले ही वाहवाही लूट ली हो, लेकिन एक साल गुजर जाने के बाद भी सवाई मान सिंह स्टेडियम के करोड़ों के प्रोजेक्टस ठप्प पड़े हैं. पिछली सरकार के समय शुरू हुए इन प्रोजेक्ट पर मौजूदा खेल मंत्री एक ईंट भी नहीं लगा सके. खेल मंत्री अब स्मार्ट सिटी के तहत इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का सपना देख रहे हैं, लेकिन नियमों के चलते इसमें अड़चन आ रही है. देखिए यह खास रिपोर्ट:

SMS स्टेडियम के बड़े प्रोजेक्ट्स हुए बंद:
—न खेल भवन बन पाया न बैडमिंटन हॉल
—टेनिस कॉम्पलैक्स का काम भी पड़ा अधूरा
—तीन साल से पूरा नहीं हो रहा स्वीमिंग पूल
—करीब 20 करोड़ रुपए के काम पड़े हैं अधूरे
—खंडहर होती जा रहा खेल भवन का ढांचा
—एक साल में काम नहीं हो सका शुरू

एसएमएस स्टेडियम की बदहाली:
पंद्रह साल पहले जगतपुरा शूटिंग रेंज के पोलो एरिना की जो बदहाली हुई थी, वैसा ही हश्र अब एसएमएस स्टेडियम के अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स का होता दिख रहा है. इनडो पोलो एरिना 15 साल बाद भी नहीं बन पाया है और अब एसएमएस स्टेडियम के तीन प्रोजेक्ट बड़े प्रोजेक्ट भी अपनी हालत पर आंसू बहा रहे है. पिछली सरकार के जाते ही यहां पर काम बंद हुआ था, जिसको मौजूदा खेल मंत्री एक साल गुजरने के बाद भी शुरू नहीं करा पाए. सबसे पहले देखिए इस ढांचे को. यह है खेल भवन का ढांचा, जो खेल विभाग के अधिकारियों की कारगुजारियों की भेंट चढ़ गया है. चार साल पहले वर्ष 2016-17 के बजट में खेल भवन बनाने के लिए 10 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे. जोर शोर से शिलान्यास भी हुआ और काम भी शुरू हुआ, लेकिन जब भुगतान के लिए फाइल वित्त विभाग के पास पहुंची, तो वित्त विभाग ने चहेती एजेंसी के माध्यम से काम कराने से मना कर दिया और बजट देने पर रोक लगा दी. आखिरकार एजेंसी बदलकर आर एस आर डी सी को काम देना पड़ा. इस बीच ठेकेदार ने नई एजेंसी के माध्यम से काम करने से मना कर दिया और पिछले एक साल से खेल भवन का काम बंद पड़ा है. 

हैंडबॉल ग्राउंड को तहस नहस करके बैडमिंटन कॉम्पलैक्स:
अब नजर डालिए बैडमिंटन कॉम्पलैक्स की निर्माणाधीन बिल्डिंग पर. हैंडबॉल ग्राउंड को तहस नहस करके बैडमिंटन कॉम्पलैक्स बनाने का सपना संजोया गया, लेकिन हालात यह है कि अभी तक ढांचा भी पूरा खड़ा नहीं हो सका. एक साल से तो यहां काम पूरी तरह ठप पड़ा है. करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से सीएसआर फंड से यह कॉम्पलैक्स बन रहा था, लेकिन अब कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए. अब यह ढांचा खेल विभाग की विफलता की कहानी सुना रहा है. पुराने खेल मंत्री ने तो अधूरी बिल्डिंग का ही उद्घाटन करके ही जग हंसाई करा ली थी, लेकिन मौजूदा खेल मंत्री अब तक इस कॉम्पलैक्स के लिए बड़ी पहल नहीं कर पाए है.

क्रिकेट एरिना को खत्म कर दिया:
खेल प्रोजेक्टस की बदहाली की सिलसिला यही नहीं रुकता. अब देखिए इस जगह को. दो साल पहले यहां पर राजधानी के बच्चे क्रिकेटर बनने की चाह में ट्रेनिंग लेने आते थे, लेकिन टेनिस एकेडमी बनाने का हवाला देकर इस क्रिकेट एरिना को खत्म कर दिया. पुराने टेनिस कोर्ट की जगह तो छह नए टेनिस कोर्ट बना दिए, लेकिन क्रिकेट एरिना की जगह प्रस्तावित चैंपियनशिप कोर्ट अभी कागजों से आगे नहीं बढ सके है. जानकारी मिली है कि अब इस प्रोजेक्ट का ड्रॉप किया जा रहा है.  

एक साल बाद भी खंडहरों पर एक ईंट नहीं लग सकी:
एक साल पहले जब अशोक चांदना ने विभाग का जिम्मा संभाला था, तब दावा किया था कि अधूरे प्रोजेक्टस को पूरा किया जाएगा, लेकिन एक साल बाद भी इन खंडहरों पर एक ईंट नहीं लग सकी. ऑल वैदर स्वीमिंग पूल का काम तीन साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन इसकी हालत भी नौ दिन चले अढाई कोस जैसी हो गई है. खेल विभाग के सूत्रों की माने तो अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इन अधूरे प्रोजेक्ट का पूरा कराने की प्लानिंग बनाई गई है. साथ ही वॉलीबॉल कोर्ट की शेडिंग, ऑल वैदर पूल पर सॉलर सिस्टम, सीवरेज लाइन व स्पोट्रस लाइब्रेरी का काम भी कराना प्रस्तावित है. खेल मंत्री एक बड़े अफसर की मदद से यह काम कराना चाहते हैं, लेकिन नियमों के कारण अभी अड़चन आ रही है. ऐसे में देखना होगा कि यह प्रोजेक्ट पूरे होंगे या फिर जगतपुरा रेंज के पोलो एरिना जैसे हालात बन जाएंगे.  
 

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