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जोधपुर में श्रद्धा से मनाया जा रहा मधुरता का पर्व मकर संक्रांति

जोधपुर में श्रद्धा से मनाया जा रहा मधुरता का पर्व मकर संक्रांति

जोधपुर: स्नेह और मधुरता का पर्व मकर संक्रांति जोधपुर सहित पूरे सम्भाग भर में बड़ी ही श्रद्धा से मनाया जा रहा है. अब मळमास समापन होने से मांगलिक कार्यों का भी शुभारंभ हो जाएगा. मकर संक्रांति के लिए पुण्यकाल सुबह से मध्याह्न काल तक श्रेष्ठ बताया गया है. पुण्यकाल में तीर्थ स्नान तथा गुड़ तिल-तेल से निर्मित वस्तुओं, घी और ऊ नी वस्त्रों का दान करना अनंत फलदायक माना गया है. संक्रांतिकाल में पंचामृत स्नान के बाद पितृ तर्पण का विशेष महत्व माना गया है.

मंदिरों में तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा: 
मकर संक्रांति को व्रती महिलाएं सामर्थ्य अनुसार तेरह अलग-अलग तरह की वस्तुएं ‘तेरूंडा’ के रूप में देने की परम्परा का निर्वहन कर रही हैं. मंदिरों व धार्मिक स्थलों में तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है. सूर्योपासना के पर्व पर जोधपुर में पकौड़े-गुळगुले और बाजरे का खीच बनाने की परम्परा का भी निर्वहन किया जा रहा है. विवाहित पुत्रियों को तिल से बने व्यंजन भेजे जा रहे हैं.

शनि मंदिरों मंदिरों में पूजा अर्चना का दौर शुरू: 
मकर संक्रांति पर गजक, रेवड़ी, एवं तिल से बने व्यंजनों के सेवन की परम्परा हैं. शनि धाम के महंत पंडित हेमंत बोहरा के अनुसार ‘मळमास’ समाप्त होने पर गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, विवाह आदि शुभ कार्य संपन्न कराए जा सकेंगे. जोधपुर के शनि मंदिरों से लेकर हनुमान मंदिरों में पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया है. 

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