मानगढ़ धाम को करोड़ों का बजट मिलने के बाद भी सुविधाओं का अभाव

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/06/30 11:08

मानगढ़ धाम(बांसवाड़ा)। बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर वन क्षेत्र में मानगढ़ धाम स्थित है। यहां पर 17 नवंबर 1913 को 15 सौ आदिवासी कि अंग्रेजों द्वारा हत्या कर दी गई थी। तब से इस स्थान को मानगढ़ धाम से जाना जाता है। इस धाम पर गोविंद गुरु ने सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए कई अभियान और आंदोलन चलाएं। इस आंदोलन से खफा होकर अंग्रेजों ने इस धाम पर गोविंद गुरु के साथ 15 सौ आदिवासियों को मौत के घाट उतार दिया था।

गहलोत सरकार ने इस धाम पर विकास के नाम से 5 करोड़ रुपए का बजट पारित किया था। इस धाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आ चुके हैं जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा 25/8/2014 को घोषणा की गई कि बांसवाड़ा जिले के मानगढ़ धाम का योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जाएगा। सीएम राजे के द्वारा जब 2014 में चुनाव लड़ा गया तो इसी मानगढ़ को विकास के नाम पर वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया था। जिससे भोली भाली जनता ने विकास को देख कर वोट BJP सरकार को दिया। इस कार्य का मास्टर प्लान राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण द्वारा तैयार करवाया गया। CM इस धाम  पर अब तक 4 बार दौरा कर चुकी है। भारत सरकार ने इस धाम के लिए 22 करोड़ का बजट जारी किया है जो अब तक पेंडिंग है। लेकिन वसुंधरा सरकार ने अपने फंड से अब तक इस धाम पर 12 करोड रुपए विकास के नाम पर दिए गए हैं।

इस धाम पर अब तक कई विकास के कार्य होने थे जैसे प्रवेश द्वार का निर्माण, सर्किल का निर्माण, स्वागत दीवार, स्वागत भवन का निर्माण, कैंटीन का निर्माण, खुला रंगमंच का निर्माण, धर्मशाला, पुलिस चौकी, मेला ग्राउंड गार्ड,न यात्री प्रतीक्षालय, साधु संतों के ठहरने के लिए भवन ऐसे अन्य छोटे-मोटे कई कार्य थे जो अब तक पूरे होने थे जो अब तक पूरे नहीं हुए हैं। पूर्व सरकार ने मात्र इस धाम पर स्मारक निर्माण का कार्य करवाया गया जिसकी राशि एक करोड़ 40 लाख थी। जब जमीनी हकीकत देखी तो माजरा ही कुछ अलग था इस धाम पर इतने करोड़ खर्च करने के बाद भी विकास के नाम पर सिर्फ संग्रहालय का कार्य प्रगति पर नजर आया। करोड़ों रुपए का बजट गार्डन के लिए था लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही बयां कर रही थी। इतने करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी विकास के नाम पर इस धाम पर कुछ भी नहीं है। जब चुनावी माहौल नजदीक होता है तब इसी धाम को लेकर के विकास के नाम पर वोट बैंक बना लिया जाता है।

1. गुजरात सरकार ने कम पैसे खर्च कर अच्छे विकास कार्य किए धाम पर।
2. जबकि राजस्थान सरकार ने इतने करोड़ खर्च करने के बाद भी विकास के नाम पर पैसों की बंदर बांट कर ली।
3. अब तक विकास के रूप में काफी कुछ कार्य होने थे लेकिन वहां सिर्फ गड्ढे और पत्थर ही देखने को मिले।
4. पूरे साल भर में गुजरात मध्य प्रदेश और राजस्थान से कहीं पर्यटक वहां पर भ्रमण के लिए आते हैं लेकिन जो सुविधाएं वहां पर होनी चाहिए थी वह अब तक पूरी नहीं हुई।
5. दिसंबर 2018 को सरकार के 5 साल पूरे हो रहे हैं फिर से इसी मानगढ़ को विकास और गोविंद गुरु का नाम लेकर के वोटरों को लुभाया जाएगा।
6. सरकार के लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी विकास के नाम पर करोड़ों रुपए की बंदरबांट हो रही है।
7. वन विभाग के द्वारा वहां पर पौधारोपण और गार्डन का कार्य होना था लेकिन अब तक कुछ नहीं हो पाया सारे विकास के कार्य कागजों तक ही सीमित रहें सिर्फ कागज कार्यवाही में ही विकास के कार्य दर्शाए गए हैं।
8. बिजली और पानी की समस्या अभी भी उस धाम पर बनी हुई है सरकार ने करोड़ों का बजट जारी तो कर दिया लेकिन उस करोड़ों के बजट को सिर्फ धूल में ही देखा जा सकता है।
 

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