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पीसीसी में मंत्री दरबार, छाया रहा पानीपत फिल्म का मुद्दा 

पीसीसी में मंत्री दरबार, छाया रहा पानीपत फिल्म का मुद्दा 

जयपुर: पानीपत फिल्म का मुद्दा गर्म है. महाराजा सूरजमल के गलत चित्रण के खिलाफ कांग्रेस सत्ता और संगठन दोनों सामने आ गये हैं. गहलोत मंत्रीपरिषद में शुमार कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह, फिर गोविन्द सिंह डोटासरा और अब राजेन्द्र यादव ने भी कड़ा विरोध जता दिया है. प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के मंत्री दरबार में भी आज यह मुद्दा छाया रहा. 

प्रतिबंध की मांग:
दरअसल मोटर गैराज राज्य मंत्री राजेंद्र यादव ने जनसुनवाई की. पानीपत फिल्म को लेकर चल रहे विरोध को मंत्री महोदय ने जायज ठहराया. राजेन्द्र यादव ने कहा कि महाराजा सूरजमल हमारे श्रद्धेय है, उनका आपत्तिजनक चित्रण किया जाना ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस बारे में साफ कह दिया है. फिल्म को लेकर ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी का भी विरोध सामने आया. पीसीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोपाल सिंह शेखावत ने फिल्म में इतिहास से की गई छेड़छाड़ का विरोध किया और प्रतिबंध की मांग की. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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Rajasthan Corona Updates: पिछले 24 घंटे में 5 मौत, 524 नए पॉजिटिव केस, पाली में मिले सर्वाधिक 80 कोरोना पॉजिटिव मरीज

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जयपुर: राजस्थान में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है. पिछले 24 घंटे में 5 मरीजों की मौत हो गई. जबकि 524 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. अजमेर में दो,जयपुर में एक,नागौर में एक और राज्य से बाहर के एक मरीज की मौत हो गई. जबकि सर्वाधिक 80 कोरोना पॉजिटिव मरीज पाली में मिले है. अजमेर- 28, अलवर- 55, बाड़मेर- 25, भरतपुर- 65 पॉजिटिव, भीलवाड़ा- 2, बीकानेर- 26, दौसा- 5, धौलपुर- 11 पॉजिटिव, डूंगरपुर- 7, हनुमानगढ़- 4, जयपुर- 47,जालोर- 58 पॉजिटिव, झुंझुनूं- 9,जोधपुर- 25,करौली- 3, कोटा- 9, नागौर- 21 पॉजिटिव, राजसमंद- 6,सवाई माधोपुर- 4, सीकर- 8, सिरोही- 9, टोंक- 1 पॉजिटिव, उदयपुर- 10,BSF- 1,दूसरे राज्य के 5 मरीज पॉजिटिव मिले. प्रदेश में मौत का आंकड़ा 461 पहुंच गया है. वहीं कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 20 हजार 688 हो गई है.

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पॉजिटिव से नेगेटिव हुए 16 हजार 278 मरीज:
राजस्थान में कुल 16 हजार 278 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. वहीं कुल 15 हजार 929 लोग इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए है.3 हजार 949 मरीज अस्पताल में उपचाररत है. कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 5 हजार 546 पहुंच गई है.

जयपुर में बढ़ता कोरोना का ख़ौफ़:
जयपुर में लगातार कोरोना वायरस का ख़ौफ़ बढ़ता जा रहा है. पिछले 24 घंटे में 1 मरीज की मौत हो गई. जबकि 47 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. वैशाली नगर-5,राजापार्क, जवाहर नगर में 4-4,झोटवाड़ा में 3पॉजिटिव, घाटगेट,सिविल लाइंस,मालवीय नगर, जगतपुरा, मानसरोवर, विदेश से आए हुए 2-2 मरीज पॉजिटिव, टोंक फाटक, कोटपुतली, विराट नगर, जालूपुरा, SMS, बापू नगर आमेर, महेश नगर, सुभाष चौक, ब्रह्मपुरी, सोडाला, अजमेर रोड, दुर्गापुरा, गोपालपुरा, बस्सी, सीतापुरा, सांगानेर, लूनियावास, गुर्जर घाटी में 1-1 पॉजिटिव मरीज मिला है. जयपुर में अब तक 164 मरीजों की मौत हो चुकी है. जबकि कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 3 हजार 573 पहुंच गई है. 

VIDEO: 4 विश्वविद्यालयों में नहीं है कुलपति, 3 कुलपतियों के पद इस माह हो रहे रिक्त, कुलपतियों की गैर मौजूदगी से अटके अहम फैसले

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जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी समेत प्रदेश के 7 विश्वविद्यालयों में इसी महीने कुलपतियों के पद रिक्त हो जाएंगे. राज्य के चार विश्वविद्यालयों में मौजूदा समय में स्थाई कुलपति नहीं है. जिनके लिए कुलपति चयन की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है. यूनिवर्सिटीज में वाइस चांसलर नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण निर्णय अटके हुए हैं. पेश है एक रिपोर्ट

इन यूनिवर्सिटियों में नहीं है कुलपति

-सीकर यूनिवर्सिटी-बी एल शर्मा के कार्यकाल के बाद खाली पद
फरवरी से पद चल रहा रिक्त 

-बीकानेर यूनिवर्सिटी
भागीरथ बीरजानियां के कार्यकाल के बाद खाली पद

-उदयपुर यूनिवर्सिटी
जेपी शर्मा के कार्यकाल के बाद खाली पद

3 विश्वविद्यालयों में इस वक्त स्थाई कुलपति के पद रिक्त:
राज्य के 3 विश्वविद्यालयों में इस वक्त स्थाई कुलपति के पद रिक्त है. उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय और सीकर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय और जोधपुर के सरदार पटेल पुलिस यूनिवर्सिटी में नए कुलपति की नियुक्ति होना बाकी है. सीकर यूनिवर्सिटी में बी एल शर्मा के कार्यकाल के बाद से फरवरी से पद रिक्त चल रहा है. जबकि बीकानेर में भागीरथ बीरजानियां के कार्यकाल को पूरा हुए भी 3 महीने हो  हो चुके हैं. उदयपुर यूनिवर्सिटी में जेपी शर्मा के बाद नए कुलपति की चयन प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन बाद में स्थगित कर दी गया. अब दोबारा सर्च कमेटी कुलपति पद के लिए योग्य शिक्षाविदों के नाम फाइनल कर रही है. सबसे ताज्जुब की बात तो जोधपुर स्थित सरदार पटेल पुलिस यूनिवर्सिटी के लिए है जिसमें 4 साल से कुलपति का पद रिक्त चल रहा है. यहां साल 2015 से कुलपति की नियुक्ति नहीं हो सकी है। लॉकडाउन के कारण यह की सर्च कमेटी की प्रक्रिया भी अटक गई थी. कुलपति के रिक्त पदों को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने भी चिंता जताई है. विभाग के मंत्री भंवर सिंह भाटी का कहना है कि इस दिशा में सरकार अपनी ओर से पूरी कवायद में जुटी है.

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इन यूनिवर्सिटियों में हो रहे खाली पद

-राजस्थान यूनिवर्सिटी में प्रो आरके कोठारी
-राजस्थान स्किल यूनिवर्सिटी में भी ललित के पंवार
-बांसवाड़ा के जनजाति विश्वविद्यालय में प्रो कैलाश सोढ़ानी 
-इनका कार्यकाल 11 जुलाई को पूरा हो जाएगा

नए विश्वविद्यालयों में भी रिक्त होने जा रहे कुलपतियों के पद:
प्रदेश में इन 4 विश्वविद्यालयों के साथ ही अब तीन और नए विश्वविद्यालयों में भी कुलपतियों के पद रिक्त होने जा रहे हैं. राजस्थान यूनिवर्सिटी में प्रो आरके कोठारी और बांसवाड़ा के जनजाति विश्वविद्यालय में प्रो कैलाश सोढ़ानी का कार्यकाल 11 जुलाई को पूरा हो जाएगा. साथ ही राजस्थान स्किल यूनिवर्सिटी में भी ललित के पंवार का भी कार्यकाल पूरा होने जा रहा है. रिक्त पदों के लिए सर्च कमेटियां गठित हो गई है. लेकिन समय पर स्थाई कुलपति का नाम घोषित नहीं होने तक यहां भी कार्यवाहक लगाकर अतिरिक्त चार्ज दिए जाने की व्यवस्था की जानी होगी.

कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर देना होगा गंभीरता से ध्यान:
जहां कुलपतियों के पद रिक्त होने से विश्वविद्यालयाें में टीचिंग - नाॅन टीचिंग की भर्ती से लेकर शाेध व शैक्षणिक कार्य प्रभावित हाे रहे हैंं. साथ ही जिनमें पद रिक्त होने वाले हैं उनमें भी आशंका है कि इसका विपरीत असर नए सत्र में भी यूनिवर्सिटीज के नियमित कामकाज और विद्यार्थियाें पर भी पड़ना तय है. इसके सर्च कमेटियों को भी अपने काम में तेजी लानी होगी. साथ ही सरकार की ओर से भी कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर गंभीरता से ध्यान देना होगा.

VIDEO: कोविड फ्री होने की राह पर संवेदनशील परकोटा, जयपुर के रामगंज में अब सिर्फ तीन एक्टिव केस

VIDEO: कोविड फ्री होने की राह पर संवेदनशील परकोटा, जयपुर के रामगंज में अब सिर्फ तीन एक्टिव केस

जयपुर: देशभर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान के सबसे बड़े कोरोना एपिक सेन्टर रामगंज से राहत की खबर है. राजधानी जयपुर का रामगंज इलाका कोरोना फ्री होने की राह पर है.जी हां ये कोई हमारा दावा नहीं, बल्कि चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट की बानगी है.रामगंज में 666 कोरोना मरीजों की तुलना में अब सिर्फ तीन एक्टिव केस बचे है.अब इसे चिकित्सा विभाग की मेहतन कहे या फिर सरकार के प्रयास, जिसके चलते रामगंज का मॉडल सभी के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है.

परकोटा क्षेत्र में राहत की खबर:
कोरोना महामारी में परकोटा क्षेत्र में राहत की खबर है.अनलॉक के बाद जहां शहर के अन्य क्षेत्रों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ रही है, वहीं रामगंज इलाके में  कोविड-19 मरीजों की बढ़ती संख्या पर ब्रेक लगा है.तीन महीने पहले जहां रामगंज क्षेत्र में कोरोना विस्फोट हुआ और एक के बाद एक कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही थी.पूरे इलाके में तनाव भरा माहौल बन चुका था.लेकिन अब वहां कोरोना की दूसरी तस्वीर उभर नहीं है.तीन महीने पहले रामगंज क्षेत्र में 521 कोरोना पॉजिटिव मरीज थे,वहीं अब घटकर मात्र 3 ही एक्टिव केस है.यह सब संभव हुआ है चिकित्सा विभाग के एक्शन प्लान से.26 मार्च को रामगंज में पहला कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद चिकित्सा विभाग ने संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए युद्व स्तर पर प्रयास शुरू किए.संक्रमितों की पहचान करने की शुरुआत घर-घर सर्वे से की.इसके बाद मास सैम्पलिंग, केस की एक्टिव ट्रेकिंग और पूरे इलाके को सील किया गया.ताकि लोग घरों से बाहर नहीं निकले.इस सख्ती के अब सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे है.

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थ्री लेयर स्क्रीनिंग से परकोट में कोरोना का थमा कहर:
-सबसे पहले आशा सहयोगिनियों द्वारा उम्रदराज लोग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की जांच कर संदिग्धों की सूची बनाई गई
-इसके बाद एएनएम की टीमों ने पल्स ऑक्सीमीटर से लोगों की जांच की और संदिग्धों को फिर से चिन्हित किया....इनमें लंग्स, हार्ट, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियों के मरीज थे
-इसके बाद चिकित्सकों ने इन लोगों को आइडेंटिफाइ किया

कोविड काल में चिकित्सा टीमों की मेहनत की बानगी:
-आंकड़ों के अनुसार मार्च से रामगंज क्षेत्र में 10976 टीमों की ओर से 3084948 लोगों की स्क्रीनिंग की
-इसमें 114781 लोग हाइरिस्क में पाए गए, जिनमें 21659 लोगों की पल्स ऑक्सीमीटर से एएनएम ने स्क्रीनिंग की.7474 लोगों की चिकित्सकों ने स्क्रीनिंग की.
-इस स्क्रीनिंग के दौरान 4439 आइएलआइ के मरीज ढूंढे गए, जिनकी जांच कराई गई तो काफी तादात में मरीज पॉजिटिव निकले.
-लेकिन टीमों ने हार नहीं मानी और जिस व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई उस कोरोना पॉजिटिव मरीज के घर कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की गई एवं क्लॉज कॉन्टेक्ट को क्वॉरंटीन किया गया.
-क्वॉरंटीन लोगों की भी सैम्पलिंग कर कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोका गया. 
-अभी तक रामंगज क्षेत्र के 666 कोरोना पॉजिटिव मरीजों के सम्पर्क में आने वाले 3000 से अधिक लोगों को क्वॉरंटीन कर उनकी सैम्पलिंग की गई.
-इस प्रकार आईएलआई, हाइरिस्क और पॉजिटिव के कॉन्टेक्ट की इस क्षेत्र में 15000 से अधिक सैम्पलिंग की जा चुकी है.

चिकित्सा विभाग की राजधानी जयपुर की इलाके वार सूची पर गौर फरमाए तो न सिर्फ रामगंज, बल्कि पूरे परकोटे इलाके में ही कोरोना के मरीजों की संख्या में कमी देखी जा रही है.हालांकि, विरोधी इसे कम सैम्पलिंग से जोड़कर देख रहे है, लेकिन अधिकारियों की माने तो अभी भी रोजाना 100 से 200 सैम्पल अकेले रामगंज से उठाए जा रहे है.

चारदिवारी में अब सिर्फ 45 बचे एक्टिव केस:
-रामगज थाना क्षेत्र में 666 पॉजिटिव मरीजों में से 640 नेगेटिव,  23 की मौत, अब सिर्फ तीन एक्टिव केस
-नाहरगढ़ थाना क्षेत्र में 51 पॉजिटिव मरीजों में से 44 नेगेटिव,  3 की मौत, अब सिर्फ 4 एक्टिव केस
-सुभाष चौक थाना क्षेत्र में 102 पॉजिटिव मरीजों में से 90 नेगेटिव,  11 की मौत, अब सिर्फ 1 एक्टिव केस
-माणक चौक थाना क्षेत्र में 127 पॉजिटिव मरीजों में से 105 नेगेटिव,  6 की मौत, अब सिर्फ 16 एक्टिव केस
-ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में 37 पॉजिटिव मरीजों में से 29 नेगेटिव,  1 की मौत, अब सिर्फ 7 एक्टिव केस
-कोतवाली थाना क्षेत्र में 151 पॉजिटिव मरीजों में से 121 नेगेटिव,  16 की मौत, अब सिर्फ 14 एक्टिव केस

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अभी सर्विलांस और जागरूकता की जरूरत:
राजधानी जयपुर का परकोटा भले ही देशभर में मॉडल के रूप में उभर रहा हो.कई दूसरे राज्य यहां की एक्टिविटी को अपना रहे हो, लेकिन जिस गति से जुलाई माह में फिर से कोरोना के केस बढ़े है, उसको देखते हुए अभी सर्विलांस और जागरूकता की जरूरत है.जरा सी लापरवाही से बड़ा कोरोना विस्फोट बनने में देर नहीं लगती है.ऐसे में उम्मीद ये है कि चिकित्सा और पुलिस की टीमें अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाती रहेगी, साथ ही लोग भी जागरूकता का परिचय देंगे.ऐसा हुआ तो कोरोना पर न सिर्फ परकोटा, बल्कि पूरे प्रदेश में जीत हासिल की जा सकेगी.

VIDEO: पेट्रोल और डीजल के नाम पर लूट! 300 प्रतिशत टैक्स वसूल रही सरकार, आमजन अभी तक खेल से अनजान

जयपुर: क्या आपको पता है जिस पेट्रोल के लिए आप प्रति लीटर 87 रुपए 55 पैसे चुका रहे हो उसकी वास्तविक कीमत महज 26 रुपए एक पैसे और डीजल की 28 रुपए 11 पैसे है. जी हां केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पेट्रोल, डीज़ल पर 300 फीसदी तक ज्यादा टैक्स वसूल रही हैं. पेट्रोल, डीज़ल की आसमान छूती कीमतों से त्रस्त प्रदेश की जनता को आज हम बताने जा रहे हैं पेट्रोल, डीज़ल पर टैक्स को अनसुलझा खेल, जिससे आमजन अभी तक अनजान थे. फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की खास रिपोर्ट:

पेट्रोल
पेट्रोल बेस प्राइज़                26.01 रुपए
सेंट्रल एक्साइज़                  32.98 रुपए
स्टेट वैट                            22.41 रुपए
रोड सैस                              1.50 रुपए
 लाइसेंस फीस प्रति लीटर           19 पैसे
डीलर कमीशन पर वैट          1.27 रुपए
डीलर कमीशन                    3.19 रुपए
कुल                              87.55 रुपए

डीज़ल
डीज़ल बेस प्राइज़                  28.11 रुपए
सेंट्रल एक्साइज़                     31.83 रुपए
स्टेट वैट                              16.78 रुपए
रोड सैस                                1.75 रुपए
लाइसेंस फीस प्रति लीटर             16 पैसे
डीलर कमीशन पर वैट                62 पैसे
डीलर कमीशन                       2.05 रुपए
कुल                                    81.30 रुपए

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल, डीज़ल के भाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहे. पेट्रोल, डीज़ल की कीमतों में वृद्धि से रोटी, कपड़ा और मकान सबकुछ महंगा हो चुका है. अब सवाल उठता है कि क्या पेट्रोल, डीज़ल की वास्तविक कीमत वही हैं. जो हम जेब से चुका रहे हैं या फिर इनमें भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कमाई का जरिया तय कर चुकी हैं. जी हां पेट्रोल, डीज़ल की वास्तविक कीमत हमारे द्वारा चुकाई जा रही कीमतों से तीन सौ प्रतिशत तक कम हैं. फिर क्या कारण है कि हमारी जेब से वास्तविक कीमतों से तीन गुना तक ज्यादा वसूला जा रहा है.

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पेट्रोल की मूल कीमत:
इस सवाल का जवाब केंद्र और राज्य सरकारों के उन टैक्स में छुपा है जिसकी आम जनता को जानकारी नहीं. दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की भारतीय पॉकेट की कीमत 38 डॉलर प्रति बैरल तक है. इस कीमत से देश में पेट्रोल की मूल कीमत 26 रुपए एक पैसे है. इस पर केंद्र सरकार हमसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क के तौर पर प्रति लीटर 32 रुपए 98 पैसे वसूल रही है और राज्य सरकार 22 रुपए 41 पैसे. इसके अलावा रोड सैस, लाइसेंस फीस, डीलर कमीशन पर वैट और डीलर का कमीशन भी इसमें जोड़ दिया जाए तो पेट्रोल पर हम मूल कीमत के बाद 61 रुपए 54 पैसे प्रति लीटर ज्यादा दे रहे हैं.

राज्य सरकार ने बढ़ाया दो बार वैट: 
इसी तरह डीज़ल की बेस प्राइस 28 रुपए 11 पैसे प्रति लीटर है जिस पर हमसे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 53 रुपए 19 पैस तक टैक्स वसूल रहे हैं. कोरोना संकट के दौर में राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर दो बार वैट बढ़ाया है. प्रदेश में अब पेट्रोल पर 38 फीसदी और डीज़ल पर 30 फीसदी वैट है. अब बात रकें पड़ौसी राज्यों में पेट्रोल डीज़ल की तो हालत और खराब दिखाई देती है. हरियाणा, पंजाब, गुजरात और यूपी के मुकाबले राजस्थान में पेअ्रोल, डीज़ल पर टैक्स 10 रुपए तक ज्यादा है. इससे हमारे ट्रांसपोर्टर ही नहीं दूसरे राज्यों के ट्रांसपोर्टर भी डीज़ल राजस्थान की अपेक्षा पड़ौसी राज्यों से ले रहे हैं. इससे प्रदेश में पेट्रोलियम की बिक्री 50 फीसदी से ज्यादा गिरी है. उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य सरकार भी पड़ौसी राज्यों की तुलना में जल्द ही पेट्रोल, डीज़ल के दामों में प्रदेश की जनता को राहत देगी ताकि कोरोना संकट के दौर में आमजन को राहत मिल सके. 

राज्यपाल कलराज मिश्र बोले, वाइब्रेंट डेमोक्रेसी यानी जीवंत लोकतंत्र भारत की मुख्य ताकत, चीन नहीं कर सकता भारत का मुकाबला

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जयपुर: राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर लाइव किया. उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी विषय पर व्याख्यान दिया. राज्यपाल ने कहा है कि वाइब्रेंट डेमोक्रेसी यानी जीवंत लोकतंत्र भारत की मुख्य ताकत है. चीन भारत का मुकाबला नहीं कर सकता है. जो उद्यमी और निर्माता लोकतंत्र, मानवाधिकार और बाल शोषण के उन्मूलन को महत्व देते हैं, वे साम्यवादी चीन के स्थान पर भारत के साथ डील करना चाहेंगे. कोविड-19 के बाद की दुनिया में एक बार फिर भारत को नई शुरुआत करनी होगी, जिसके लिए कई छोटे और मध्यम उद्यमियों को सरकारी प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी.

पहले किया युवक ने युवती से ​दुष्कर्म, फिर जलाकर मार डाला, आरोपी मौके से फरार

आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी विषय पर व्याख्यान:
राज्यपाल ने सोमवार को राजभवन से व्याख्यान में कहा कि भारत में स्वदेशी एक विचार के रूप में देखा जाता है, जो भारत की संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था का आर्थिक मॉडल रहा है. राष्ट्र इस विचार की वकालत भी करता रहा है. आत्मनिर्भर भारत बनाने में स्वदेशी का विचार अत्यधिक उपयोगी है. खादी ग्राम उद्योग के उत्पादों की बढती मांग इसका उदाहरण है. भारत की आत्म-निर्भरता का मतलब दुनिया से कनेक्शन तोड़ लेना नहीं है.

खान महाघूसकाण्ड: पूर्व IAS अशोक सिंघवी को बड़ा झटका, राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

आयुर्वेदिक काढ़े और जड़ी-बूटियों आदि की मांग बढ़ी: 
हमें लोकल चीजों को लेकर वोकल होना चाहिए. यानी भारतीयों को स्थानीय चीजों के बारे में ज्यादा बात करनी चाहिए. वर्तमान प्रचलित उपचार पद्धति कहती है कि कोरोना की दवा किसी के पास नहीं, परंतु भारत की हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन जैसी दवा मांगने के लिए दुनिया के तमाम देशों ने गुहार लगाई. आयुर्वेदिक काढ़े व जड़ी-बूटियों आदि की मांग भी बढ़ रही है. प्रारम्भ में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने व्याख्यानमाला की जानकारी दी.

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

खान महाघूसकाण्ड: पूर्व IAS अशोक सिंघवी को बड़ा झटका, राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने खानमहाघूसकाण्ड के मुख्य आरोपी और पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी को बडा झटका देते हुए जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है.जस्टिस सतीश कुमार शर्मा ने सोमवार को जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज करने के आदेश दिये है.एकलपीठ ने 2 जून को मैराथन बहस के पश्चात जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था.अदालत ने इसके साथ सहआरोपी राशीद शेख की जमानत याचिका भी खारिज कर दी है.एकलपीठ ने जमानत याचिका पर विस्तृत आदेश देते हुए कहा कि इस केस में सिंघवी की बड़ी भूमिका को देखते हुए जिसके खिलाफ मजबूत साक्ष्य उपलब्ध है, जमानत देना उचित नही होगा.

जमानत देने से समाज में जाएगा गलत संदेश:
अदालत ने कहा कि सिंघवी के प्रयास ट्रायल से बचने के रहे है.अदालत ने आगे कहा कि सरकारी विभागों अनियत्रिंत भष्ट्राचार में गंभीर प्रवृति के इस आर्थिक अपराध में आरोपी की मजबूत स्थिती के बावजूद जमानत देने से समाज में गलत संदेश जायेगा. हाईकोर्ट की अन्य पीठ द्वारा मामले के सहआरोपियों को जमानत दिये जाने के मामले में अदालत ने कहा कि वे अन्यपीठ के फैसले का सम्मान करते है लेकिन एक ही केस में अलग अलग आरोपियों की लीगल पोजिशन पर विचार किया जाना जरूरी है.प्रत्येक आरोपी की भूमिका एक ही केस में अलग अलग हो सकती है ऐसे में उनके द्वारा किये गये अपराध के साथ अन्य तथ्यों पर गौर किया जाना आवश्यक है.अदालत ने कहा कि एक विशेष आरोपी इस आधार पर जमानत के लिए क्लेम नही कर सकता कि उसी मामले में उसके सहआरोपी को जमानत दी जा चुकी है.

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सिंघवी की भूमिका सहआरोपियों से अलग:
अशोक सिंघवी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए एकलपीठ ने कहा कि इस केस में सिंघवी का मामला अन्य सहआरोपियों के समान नहीं है.सिंघवी के खिलाफ एकत्रित किये गये सबूत व अन्य तथ्य बड़ी भूमिका इंगित करती है.अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्टया इस केस में साफ है कि अशोक सिंघवी खान विभाग के मुखिया के रूप में प्रमुख सचिव पद पर कार्यरत थे और प्रमुख सचिव के दौरान ही 2.55 करोड़ की रिश्वत की राशि बरामद करने का मामला सामने आया है.टेलीफोन रिकॉर्डिग और कॉल रिर्काडिंग की डिटेल इस केस में सिंघवी को अच्छी तरीके से जोड़ती है.अदालत ने कहा कि सिंघवी की भूमिका को सहआरोपियों की भूमिका के समान नही माना जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को टाला:
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस केस सहआरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में सरेण्डर कर दिया.लेकिन सिंघवी ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी टालने का प्रयास किया और उससे लाभ प्राप्त करते हुए बिना किसी कारण के 17 फरवरी की जगह 1 जून को सरेण्डर किया.उसी तरह राशीद सेख ने 6 जून को सरेण्डर किया.जबकि दोनो ही आरोपी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भलीभाति जानते थे.

राशीद शेख की भूमिका:
अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए राशीद शेख की भूमिका को लेकर कहा कि राशीद शेख ने इस केस में मुख्य भूमिका निभायी है जिसने 1.58 करोड़ की राशि की व्यवस्था करना स्वीकार किया है.

एएसजी ने की ईडी की ओर से पैरवी:
जमानत याचिका पर सिंघवी और शेख की ओर से एडवोकेट अनिल उपमन, मोहित खण्डेलवाल और दीपक चौहान ने पैरवी की.वहीं ईडी की ओर से एएसजी आर डी रस्तोगी और आनंद शर्मा ने पैरवी की.सिंघवी से केस के अन्य आरोपियों को समान जमानत देने की बात कही.वही ईडी की ओर से एएसजी आर डी रस्तोगी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि ये संपूर्ण घोटाला सिंघवी की देखरेख और मॉनिटरिंग में किया गया है.इस केस में सिंघवी की शह पर ही भष्ट्राचार किया गया है.सिंघवी खान विभाग के मुखिया थे और वे पहले माईंस को बंद करते थे और फिर फिर शुरू करने के लिए पैसे की डिमांड करते थे.एएसजी ने कहा कि हमारे पास सिंघवी के फोन रिकोर्डिग के अहम सबूत मौजूद है.इसलिए सिर्फ समानता के आधार पर मुख्य आरोपी को जमानत नही दी जानी चाहिए.दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की एकलपीठ ने जमानत याचिका पर 2 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था.

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VIDEO: SMS स्टेडियम का बैडमिंटन कोच कोरोना पॉजिटिव, खिलाड़ियों व अधिकारियों पर भी संक्रमण का खतरा

जयपुर: राजधानी जयपुर के SMS स्टेडियम में खिलाड़ियों से खिलवाड़ का मामला सामने आया है. SMS स्टेडियम में तैनात खेल परिषद का एक कोच कोरोना पॉजिटिव मिला है. मिली जानकारी के अनुसार कोच स्टेडियम के अफसरों व कर्मचारियों से भी मिल चुका है. ऐसे में कई खिलाड़ियों व अफसरों के भी संक्रमित होने का खतरा है. अब खिलाड़ी व अधिकारी कोरोना संक्रमित होने के खतरे को लेकर परेशान हो रहे हैं. कई खिलाड़ियों-अधिकारियों ने खुद को क्वारंटीन किया है.

गैंगस्टर राजू ठेहट को 20 दिन की पैरोल, पुलिस और प्रशासन ने कहा जेल से बाहर आने पर गैंगवार की संभावना 

अभी तक स्टेडियम को नहीं किया बंद: 
वहीं बैडमिंटन कोच के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद भी खबर लिखे जाने तक स्टेडियम को बंद नहीं किया गया. सिर्फ बैडमिंटन हॉल को बंद किया गया है, जबकि कोच पूरे स्टेडियम में घूमते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों खिलाड़ियों के जीवन से खेल रहा खेल विभाग ? इसके साथ ही SMS स्टेडियम में सोशल डिस्टेंसिंग की भी पालना नहीं हो रही है. ऐसे में क्या खेल मंत्री लेंगे खिलाड़ियों के हित में फैसला ?

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सभी खिलाड़ियों को होम क्वारेंटीन करने के निर्देश:
दूसरी ओर बैडमिंटन कोच के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद राज्य बैडमिंटन संघ के सचिव केके शर्मा ने जयपुर संघ के सचिव मनोज दासोत को निर्देश देते हुए कहा कि कोच के संपर्क में आए खिलाड़ियों से बात कर सभी खिलाड़ियों को होम क्वारेंटीन किया जाए. ऐसे में अब सभी खिलाड़ियों की जानकारी जुटा कर उनको निर्देश जारी किया जा रहा है. 


 

गैंगस्टर राजू ठेहट को 20 दिन की पैरोल, पुलिस और प्रशासन ने कहा जेल से बाहर आने पर गैंगवार की संभावना

गैंगस्टर राजू ठेहट को 20 दिन की पैरोल, पुलिस और प्रशासन ने कहा जेल से बाहर आने पर गैंगवार की संभावना

जयपुर: बहुचर्चित गैंगस्टर राजू ठेहट को राजस्थान हाईकोर्ट ने रेगुलर पैरोल पर रिहा करने के आदेश दिये हैं. राज्य सरकार ने गैंगस्टर ठेहट को पैरोल देने की अनुशंसा करने से ये कहते हुए इंकार कर दिया था कि ठेहट के जले से बाहर आने से गैंगवार की प्रबल संभावना है. वहीं सीकर पुलिस अधीक्षक की ओर से भेजी गयी रिपोर्ट में भी ये प्रबल संभावना जतायी गयी है कि राजू ठेहट को पैरोल पर रिहा करने से उसके दुश्मन आपसी रंजिश के चलते बड़े अपराध को अंजाम दे सकते हैं. राजू ठेहट की ओर से 7 साल से अधिक समय जेल में बिताये जाने और जेल नियमों के अनुसार 20 दिन की रेगुलर पैरोल का अधिकार होना बताते हुए पैरोल की गुहार लगायी थी. हाईकोर्ट जस्टिस सबीना और जस्टिस सी के सोनगरा की खण्डपीठ ने गैंगस्टर के अधिवक्ता के तर्को से सहमत होते हुए 20 दिन की रेगुलर पैरोल पर रिहा करने के आदेश् दिये हैं.

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7 साल जेल में बिताए, जेल में व्यवहार है शालिन:
राजू ठेहट के भाई हरलाल की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में दायर कि गयी याचिका में बताया गया कि उसके भाई ने 7 साल से ज्यादा समय जेल में बिताया है. वहीं जेल नियमों के अनुसार राजू ठेहट ने नियमों का पालन किया है और जेल में उसका व्यवहार संतोषप्रद रहा है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सात साल जेल में बिताने और जेल में व्यवहार को आधार बनाते हुए पैरोल पर रिहा करने के आदेश दिये हैं. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में प्रथम पैरोल पर रिहा करने के आदेश देते हुए जयपुर जेल अधीक्षक की संतुष्टि को जरूरी बताया है.  

आनंदपाल गैंग से रही है दुश्मनी:
राजू ठेठ राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर में से एक है. इसकी आनंदपाल गैंग से दुश्मनी जग जाहिर है. दोनों की गैंग के गुर्गे के जेल के अंदर व बाहर कई बार एक दूसरे पर हमले कर चुके हैं. आनंदपाल सिंह का तो 24 जून 2017 को राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ तहसील के मालासर गांव में एनकाउंटर हो गया था, लेकिन आंनदपाल गैंग के कई गुर्गे अभी भी बाहर हैं. 

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गंभीर मामले में भी गर्वमेंट काउंसिल ने नही की पैरवी:
राजू ठेहट जैसे गैंगस्टर के मामले में भी राज्य सरकार का सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने भले ही पैरोल की अनुशंसा नही की हो या फिर सीकर पुलिस सख्त शब्दों का प्रयोग कर पैरोल का विरोध किया हो. लेकिन इतने गभीर मामले में भी राज्य सरकार की ओर से गर्वमेंट काउंसिल पेश नही हुए. बल्कि उनके जूनियर राजकीय अधिवक्ता ने इस मामले में सरकार का पक्ष रखा. राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य सरकार की पैरवी की के लिए अतिरिक्त्ए महाधिवक्ताओं क बड़ी तादाद है. ये जरूर है कि राजकीय अधिवक्ता सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए पैरोल का विरोध किया. लेकिन गर्वमेंट काउंसिल का ऐसे गंभीर मामले में भी सरकार का पक्ष रखने के लिए नहीं होना सवाल खड़े करता है. सरकार तक इस आदेश की खबर मिलने पर पैरोल के खिलाफ अपील करने की तैयारी शुरू कर दी गयी है.

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