मार्कण्डेश्वर धाम खोता जा रहा अपना अस्तित्व, लोगों की आस्था होती जा रही जीर्णशीर्ण

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/13 03:53

पिंडवाड़ा(सिरोही): सिरोही जिले की पिंडवाड़ा तहसील के अजारी गांव में स्थित मार्कण्डेश्वर धाम में आज हजारों लोग अपने पूर्वजों की अस्तियां विसर्जन करने यहां आए है. लेकिन आस्था के केन्द्र इस धाम में जलदाय विभाग द्वारा बोरिंग खोदकर पानी की सप्लाई देने से इस आस्था के धाम में हमेशा बहने वाली आस्था की गंगा अब लुप्त सी हो गई है. जिससे अस्ति विसर्जन के लिए पानी तक नहीं है. पूर्व में जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया ने खुद इस धाम के विकास का प्लान बनाया था. लेकिन आज तक इस धाम में कोई विकास कार्य नहीं हुआ.

आस पास के लोग यहां अपने पूर्वजों की अस्तियां विसर्जन के लिए आते हैं
धर्म शास्त्रों में शिक्षा की देवी माने जाने वाली मां सरस्वती तथा देवो के देव महादेव के यहां मंदिर विद्यमान है . जो उपेक्षा के शिकार नज़र आ रहे है. जिला प्रशासन सिरोही की नजर-अंदाजी का ही नतीजा हैं कि आज लोगों की आस्था जीर्णशीर्ण होती जा रही हैं. लाखों श्रद्धालु यहाँ प्रतिवर्ष दर्शन को आते है. कई आस पास के लोग अपने पूर्वजों की अस्तियां विसर्जन के लिए यहां आते हैं. लेकिन आस्था के इस कुंड मे पानी नहीं होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ होता नजर आ रहा हैं. लोग यहां खुले में अस्ति विसर्जन करने को मजबूर है. इस धाम को महाचमत्कारी और आमजन की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ माना जाता हैं. देश भर से लोगों का आना जाना  रहता हैं. यहां का सरस्वती मंदिर विश्व के ख्यातनाम पांच सरस्वती मंदिरो में से एक माना जाता हैं. लोगों  का कहना है कि इस पानी में चमत्कार है. हरिद्वार में जो पुण्य मिलता है वह इस पानी में अस्ति विसर्जन करने से  मिलता है. लेकिन आस्था के इस धाम  की दुर्दशा लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय भैरोसिंह शेखावत ने भी इस धाम को पर्यटन स्थल बनाने  की घोषणा की थी. बावजूद जिला प्रशासन सिरोही की नजरअंदाजी के चलते यह पवित्र धाम उपेक्षा का शिकार होता जा रहा हैं. 

लोगों को पीने के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं 
आज के दिन यहां अस्तियां विसर्जित करने के लिए सैंकड़ों की संख्या में लोग आएं है लेकिन, अस्तियां विसर्जित करने के लिए भी पानी नही है. साथ ही लोगों के पीने के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं है. जबकि यह एक ऐतिहासिक व पवित्र धाम है. वहीं मार्कण्डेश्वर धाम में गंदगी का आलम है जो कई सवाल खड़ा करता है.  प्रशासन इन सबकों नजरअंजाद कर आंखें मूंद कर बैठा हैं. 

....तुषार पुरोहित, 1st इंडिया न्यूज पिंडवाड़ा

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