बूंदी राजस्थान के इस मंदिर से पार्वती जी की मूर्ति चुराते ही हो जाती है कुंवारों की शादी, दशकों से चली आ रही परंपरा

राजस्थान के इस मंदिर से पार्वती जी की मूर्ति चुराते ही हो जाती है कुंवारों की शादी, दशकों से चली आ रही परंपरा

राजस्थान के इस मंदिर से पार्वती जी की मूर्ति चुराते ही हो जाती है कुंवारों की शादी, दशकों से चली आ रही परंपरा

बूंदी: राजस्थान में बूंदी जिले के हिंडोली कस्बे में एक ऐसा मन्दिर है जहाँ से मूर्ति चुराकर ले जाने पर कोई पुलिस केस दर्ज नहीं कराया जाता. यहां रामसागर झील के किनारे रघुनाथ घाट मंदिर से पार्वती जी की मूर्ति चुराने के पीछे की वजह अनूठी है. मान्यता है कि जिस युवक की शादी नहीं हो पा रही, अगर वह इस मंदिर से गुपचुप तरीके से पार्वती की मूर्ति चुरा ले जाए तो उसकी शादी जल्द हो जाती है. 

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फिलहाल सावन के पहले से पार्वती जी महादेव से बिछुड़ी हुई: 
यही वजह है कि कुंवारे मन्दिर से रात के अंधेरे में गुपचुप मां पार्वती की मूर्ति उठा ले जाते हैं. मन्दिर में महादेव शिवलिंग के बगल में ही पार्वती जी की मूर्ति स्थापित है पर महादेव जोड़े के साथ कम ही नजर आते है, क्योंकि कुंवारे पहले से ताक में रहते हैं. फिलहाल सावन के पहले से पार्वती जी महादेव से बिछुड़ी हुई है. वे किसी कुंवारे के घर होम क्वारेंटाइन में है. लॉक डाउन के चलते इस बार अक्षय तृतीया जैसे मुहूर्त पर भी शादियां नही हुई. लॉकडाउन नहीं टूटा और शादियां नही हुई तो जुलाई से चार महीने के लिए देव सो जाएंगे, ऐसे में कम ही उम्मीद है कि पार्वतीजी महादेव के पास जल्द लौट आएगीं कतार में लगे कुंवारों को इस बार लम्बा इंतजार करना पड़ सकता है. 

मन्दिर में दशकों से यह परम्परा चली आ रही: 
कुंवारे घर मे पार्वती जी की पूजा करते हैं. उनसे शादी का वर मांगते हैं. शादी के बाद रात्रि के अंधेरे में चुपचाप दूल्हा दुल्हन जोड़े से आते हैं और मूर्ति स्थापित कर चले जाते हैं. पहले से वेटिंग में चल रहे युवक इसी ताक में रहते हैं, फिर वे चुरा ले जाते हैं. मन्दिर में दशकों से यह परम्परा चली आ रही है. 

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अब तक 15-20 बार पार्वतीजी की मूर्ति चोरी हो चुकी:
पिछले 35 साल से मन्दिर में पुजारी के रूप में सेवा दे रहे रामबाबू पराशर बताते है कि अब तक 15-20 बार पार्वतीजी की मूर्ति चोरी हो चुकी है और चुराने वाली कि शादियां भी हो चुकी है. हमे चोरी का पता लग भी जाता है तो भी किसी को टोकते नहीं. साल में बमुश्किल एक दो महीने ही पार्वती जी की प्रतिमा मन्दिर में विराजित रह पाती है. लौटते ही फिर कोई चुरा ले जाता है.

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