जैसलमेर मरू महोत्सव 2022: इन ऊंटों के श्रृंगार के आगे दुल्हन भी होती है फेल, यहां सज-धज के निकलती हैं ऊंट हसीनाएं

मरू महोत्सव 2022: इन ऊंटों के श्रृंगार के आगे दुल्हन भी होती है फेल, यहां सज-धज के निकलती हैं ऊंट हसीनाएं

मरू महोत्सव 2022: इन ऊंटों के श्रृंगार के आगे दुल्हन भी होती है फेल, यहां सज-धज के निकलती हैं ऊंट हसीनाएं

जैसलमेर: राजस्थानी गानों में नायिका ऊंट के श्रृंगार के लिए लुम्बा-झुम्बा अपने हाथों से बनाती है और ऊंट को लेकर खेत पर जा रहे प्रियतम को बड़े प्यार से उपहार स्वरूप देती है. राजस्थानी गीत में पिरोई यह संस्कृति मरू महोत्सव मेले में उस वक्त जाग उठती है जब एक से बढ़कर रंग-रगीलो ऊंट थिरकते हुए नजर आते हैं. मेले में आए ऊंटों के श्रृंगार का कॉम्पटिशन होता है. यहां ऊंट ऐसे सजाए जाते हैं कि दुल्हन भी उनके आगे फीकी पड़ जाए. यूं तो दुल्हन 16 श्रृंगार करती है लेकिन इन ऊंटों को 20 से ज्यादा श्रृंगार के जरिए सजाया जाता है. 

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सजे-धजे ऊंटों को देखते ही मरुधरा की सोंधी महक और रंग-रंगीलो राजस्थान की झलकी आखों के सामने तैरने लगती है. इस प्रतियोगिता में स्थानीय के साथ सीमा सुरक्षा बल के साथी कैमल भी हिस्सा लेते हैं.  सबसे पहले गले का श्रृंगार होता है. इसमें गोरबंद का इस्तेमाल किया जाता है. गले में ही चांदी और जरी की कसीदाकारी पट्टियां भी लगाई जाती हैं. पैरों में नेवरी बांधी जाती है घुंघरू पहनाया जाता है. ऊंट के पीठ पर पहले काठी पहनाई जाती है. इसमें दो लोगों के बैठने की जगह होती है. इसके नीचे गद्दियां और ऊपर छेवटी रखी जाती है. 

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मुंह, कान और नाक को ढकते हुए चांदी का कसीदा किया हुआ: 
काठी के सबसे ऊपर गादी रखी जाती है जो बैठने वालों के लिए बेहद आरामदेह होती है. गले से दोनों ओर पावों तक लुम्बा-झुम्बा पहनाया जाता है. ये रंग बिरंगा होता है. मुंह, कान और नाक को ढकते हुए चांदी का कसीदा किया हुआ मोहरा पहनाया जाता है. तंग काठी को कसने के काम बाता है जो दोनों ओर लटका होता है. नाक में नकेल और गले में रास (रस्सी) होती है. ऊंट को सजाने के लिए अक्सर लोग एंटिक आइटम ही इस्तेमाल करते हैं. एंटिक आयटम राजस्थानी कला और संस्कृति को ज्यादा निखारता है. ऊंट के सजावट में एंटिक आयटम का इस्तेमाल करने की होड़ होती है. ऐसे ही हमारे सवांददाता सूर्यवीरसिंह तंवर ऊंट के श्रृंगार का लिया जायजा. 

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