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मायावती का बड़ा फैसला, BSP की प्रदेश कार्यकारिणी भंग

मायावती का बड़ा फैसला, BSP की प्रदेश कार्यकारिणी भंग

जयपुर: बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को पार्टी की राजस्थान इकाई को तुरंत प्रभाव से भंग कर दिया है. पार्टी ने राजस्थान में सभी पदाधिकारियों को पद से हटा दिया है. पार्टी प्रमुख का यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है. वहीं मायावती ने रामजी गौतम और मुनकाद अली को प्रदेश में पार्टी की कमान सौंपी है. 

पदाधिकारियों की बैठक में मारपीट की नौबत: 
गौरतलब है कि हालही में बसपा के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इस घटनाक्रम को मायावती ने कांग्रेस की धोखाधड़ी बताया था. वहीं उसके बाद जयपुर में हुई पदाधिकारियों की बैठक में दो गुटों में बंटे नेताओं के बीच मारपीट की नौबत तक आ गई थी. 

कांग्रेस अम्बेडकर व उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही: 
बीएसपी के विधायकों द्वारा पाला बदलकर कांग्रेस के खेमे में जाने के बाद से मायावती कांग्रेस पर निशाना साधा था. मायावती ने कहा था कि कांग्रेस हमेशा से ही बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर व उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही. इसी कारण डॉ अम्बेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारतरत्न से सम्मानित किया. यह अति-दुःखद व शर्मनाक है. 

कांग्रेस ने किया आघात पहुंचाने का काम: 
इससे आगे मायावती ने एक और ट्वीट करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी कटु विरोधी पार्टी/संगठनों से लड़ने के बजाए हर जगह उन पार्टियों को ही सदा आघात पहुंचाने का काम करती है जो उन्हें सहयोग/समर्थन देते हैं. कांग्रेस इस प्रकार एससी, एसटी, ओबीसी विरोधी पार्टी है तथा इन वर्गों के आरक्षण के हक के प्रति कभी गंभीर व ईमानदार नहीं रही है. 

कांग्रेस को बताया था धोखेबाज़: 
इससे आगे मायावती ने एक और ट्वीट करते हुए कहा कि राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बीएसपी के विधायकों को तोड़कर गैर-भरोसेमन्द व धोखेबाज़ पार्टी होने का प्रमाण दिया है. यह बीएसपी मूवमेन्ट के साथ विश्वासघात है जो दोबारा तब किया गया है जब बीएसपी वहां कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी. 

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गुजरात राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट, कांग्रेस विधायकों को फिर एक बार राजस्थान में किया गया शिफ्ट 

नई दिल्ली: गुजरात में राजनीतिक घमासान अभी भी जारी है. इस बीच खबर मिल रही है कि गुजरात कांग्रेस विधायकों को फिर एक बार राजस्थान में शिफ्ट किया गया है. आबू रोड के पास जांबुड़ी स्थित रिसॉर्ट में कांग्रेस के 18 विधायक पहुंचे. करीब आधा दर्जन और कांग्रेसी विधायक दोपहर तक पहुंच सकते है.

वाइल्ड विंड्स रिसॉर्ट में ठहरे हैं विधायक:
गुजरात बॉर्डर के करीब जांबुड़ी स्थित वाइल्ड विंड्स रिसॉर्ट में विधायकों को रोका गया है. कुछ विधायकों को रविवार रात या कल तक जयपुर लाने की अटकलें लगाई जा रही है. 17 जून तक इन विधायकों को यही रोकने की चर्चा है. गुजरात पूर्व पीसीसी चीफ सिद्धार्थ पटेल भी जांबुड़ी पहुंचे. सिद्धार्थ पटेल की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बातचीत हुई. पूर्व उप मुख्य सचेतक रतन देवासी भी रिसॉर्ट पहुंचे.  

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विधायकों के इस्तीफे देने के बाद पार्टी सकते में:
गौरतलब है कि एक के बाद एक कांग्रेस के विधायकों द्वारा विधायकी और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद कांग्रेस गुजरात कांग्रेस पार्टी सकते में हैं. राज्यसभा के चुनाव नजदीक है और कांग्रेस ने राज्यसभा उम्मीदवारी के लिए अपने दो उम्मीदवार मैदान में उतरने का फैसला लिया है. लेकिन कांग्रेस से जिस तरह लगातार विधायक अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं, जिससे गुजरात कांग्रेस की मुसिबतें बढने लग गई है. 

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राज्यसभा चुनाव की गणित में कांग्रेस आगे, 13 निर्दलीय विधायकों का गहलोत को समर्थन

जयपुर: राज्यसभा चुनावों की गणित में कांग्रेस आगे है कारण साफ है निर्दलीय विधायक अभी तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को साथ है , इनकी कोई बड़ी नाराजगी अभी तक नजर नहीं आई है. 13 निर्दलीय जीतकर आये थे चुनाव इनमें से अधिकांश पहले से ही कांग्रेस और गहलोत समर्थक माने जाते है. निर्दलीय विधायकों ने कहा कि कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार जीतेंगे ,हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार नहीं किया कि बीजेपी ने उनसे संपर्क साधा था. अशोक गहलोत को क्यों जादूगर कहा जाता है यह राजस्थान की सियासी जमीं अब भली भांति जानने और पहचानने में लग गई है. राज्यसभा चुनाव तो आज हो रहे हैं लेकिन गहलोत ने निर्दलीय विधायकों को चुनाव जीतने के बाद ही अपना बना लिया था. उन निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल हो गया था जिन्होंने बागी होकर चुनाव जीता था ,साथ ही उनका भी जो बतौर निर्दलीय चुनाव जीते. दूदू से निर्दलीय विधायक बाबू लाल नागर तो गहलोत को अपना पॉलिटिकल गॉडफादर मानते है.  

कांग्रेस विचारधारा के वो निर्दलीय विधायक जो गहलोत के साथ

-महादेव सिंह खंडेला,विधायक खंडेला
-शेखावाटी के कद्दावर जाट नेता
-पहले रह चुके खंडेला से कांग्रेस विधायक
-सीकर से सांसद रह चुके और केन्द्र सरकार में मंत्री
-अशोक गहलोत के करीबी माने जाते है

-बाबू लाल नागर,विधायक दूदू
-बाबू लाल नागर जीते है दूदू से बागी होकर चुनाव
-पिछली गहलोत सरकार में रह चुके खाद्य मंत्री
-गहलोत को मानते है राजनीतिक गॉडफादर
-दूदू से चौथी बार चुने गये है विधायक

-संयम लोढ़ा,विधायक सिरोही
-सिरोही से बागी होकर चुनाव जीते संयम लोढ़ा
-जालोर-सिरोही के बड़े नेताओं में संयम की गिनती
-पहले रह चुके सिरोही से कांग्रेस के विधायक
-डॉ सीपी जोशी के करीब कहे जाते है
-हालांकि नीरज डांगी से पुरानी अदावत की चर्चा

-रामकेश मीना,विधायक गंगापुर सिटी
-रामकेश मीना बने निर्दलीय विधायक
-गंगापुर सिटी से बागी होकर जीता विस चुनाव
-पिछली गहलोत सरकार में रहे थे रामकेश थे संसदीय सचिव
-कट्टर गहलोत समर्थक कहे जाते है

 -खुशवीर सिंह जोजावर,विधायक मारवाड़-जंक्शन
-जोजावर बने मारवाड़ जंक्शन से निर्दलीय विधायक
-पहले 1बार कांग्रेस पार्टी से रह चुके है विधायक
-गहलोत के धुर समर्थक माने जाते है

-आलोक बेनीवाल,विधायक शाहपुरा
-आलोक बेनीवाल ने जीता था शाहपुरा से चुनाव
-राव राजेन्द्र सिंह जैसे दिग्गज को हराया था चुनाव
-पूर्व राज्यपाल डॉ कमला के पुत्र है आलोक
-कांग्रेस में गहलोत और पायलट दोनों की पसंद

-बलजीत यादव,विधायक बहरोड़
-यादव सियासत के नये दिग्गज
-बलजीत यादव जीते है बहरोड़ से निर्दलीय चुनाव
-कांग्रेस से टिकट मांगा था लेकिन नहीं मिला था
-पहले भी बहरोड़ से चुनाव लड़ा लेकिन कम अंतर से हारे
-मजदूर हितों के संघर्ष की राजनीति से चमके
-अशोक गहलोत और भंवर जितेन्द्र के माने जाते है समर्थक

-लक्ष्मण मीना,विधायक बस्सी
-बस्सी से बागी होकर जीते थे लक्ष्मण मीना चुनाव
-पहले लड़ चुके कांग्रेस टिकट पर दौसा से लोस चुनाव
-चुनाव जीतते ही कह दिया था मैं अशोक गहलोत के साथ
-सचिन पायलट से भी नजदीकियां

-राजकुमार गौड़,विधायक श्रीगंगानगर
-राजकुमार गौड़ ने जीता श्रीगंगानगर से बागी होकर चुनाव
-पहली बार बने है विधायक
-सरल छवि के नेता और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे
-गौड़ को जनता ने ही चुनाव लड़ाया और जीताया भी
-चुनाव जीतते ही गहलोत आवास पहुंच गये थे गौड़
-कांग्रेस और गहलोत के प्रबल समर्थक 

-रमीला खडिया,विधायक ,कुशलगढ़
-रमीला खडिया ने जीता सलूम्बर से बागी होकर चुनाव
-खडिया के कारण रघुवीर मीना हार गये थे चुनाव
-खडिया पहले प्रधान रही और कांग्रेस की कद्दावर नेता
-आदिवासी महिला नेता के तौर पर खडिया की छवि

भाजपा के बागी जो कांग्रेस के साथ

-ओम प्रकाश हुडला महुवा विधायक
-हुडला भाजपा में आने से पहले कांग्रेस विधायक थे
-राजे सरकार में रह चुके संसदीय सचिव
-अभी मुरीद है सी एम अशोक गहलोत के

एक बार फिर सुर्खियों में छाई बीजेपी नेता सोनाली फोगाट, मार्केट कमेटी के अफसर को जड़ा थप्पड़

-सुरेश टांक,विधायक किशनगढ़
-सुरेश टांक होंगे अभी कांग्रेस के साथ
-किशनगढ़ से निर्दलीय विधायक है टांक
-टांक को भाजपा से नहीं मिल पाया था टिकट
-मूल रुप से भाजपा -संघ से रहा है सुरेश टांक का नाता
-भाजपा में मंडल से लेकर जिला इकाइयों में विभिन्न पदों पर रहे
-भाजपा ने भी टांक से साधा संपर्क
 
कभी बीजेपी से विधायक रहे ओम प्रकाश हुडला पूरी तरह गहलोत के साथ है उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि कोरोना में जैसा काम अशोक गहलोत ने किया है उन्हें देश में बेस्ट चीफ मिनिस्टर घोषित करना चाहिए. 

गैर कांग्रेसी निर्दलीय ,कांग्रेस के साथ

-कांति प्रसाद मीना,विधायक थानागाजी
-कांति प्रसाद मीना आये कांग्रेस के साथ
-थानागाजी से निर्दलीय विधायक बने कांति मीना
-गहलोत के प्रति इन्होंने चुनाव जीतते ही आस्था जता दी थी

सीएम गहलोत ने की राजकौशल पोर्टल की लॉन्चिंग, सीएमआर से वेबीनार के माध्यम से लॉन्चिंग

निर्दलीय विधायकों ने लोकसभा चुनावों में कई जगह कांग्रेस का साथ दिया और विधानसभा में तो देते ही रहते है. हालांकि इनमें से कुछ के मन में बीएसपी छोडकर कांग्रेस में आये 6विधायकों को लेकर जरुर ठीस थी लेकिन माना यहीं जा रहा है कि समय रहते मन की इस पीड़ा का निवारण उच्च स्तर से किया गया. कांग्रेस आगे भी इन्हें साथ रखना चाहती है. लिहाजा मंत्रीपरिषद में शामिल करने के साथ ही संसदीय सचिव बनाये जा सकते है.ये अलग बात है कि 19 जून तक बीजेपी ने निर्दलीयों को साधने में पूरी ताकत का इस्तेमाल किया गया ,संघ विचारधारा के लोगों ने भी अपने स्तर पर प्रयास जारी रखे हुए है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

एक बार फिर सुर्खियों में छाई बीजेपी नेता सोनाली फोगाट, मार्केट कमेटी के अफसर को जड़ा थप्पड़

एक बार फिर सुर्खियों में छाई बीजेपी नेता सोनाली फोगाट, मार्केट कमेटी के अफसर को जड़ा थप्पड़

नई दिल्ली: भाजपा नेता और टिक टॉक स्टार सोनाली फोगाट एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार सोनाली फोगाट ने कुछ ऐसा किया. जिसकी वजह से वे सोशल मीडिया पर छाई हुई है. हर तरफ उनके चर्चे होते दिख रहे हैं. अब सोनाली फोगाट ने मार्केट कमेटी के अधिकारी से मारपीट कर दी. उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

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सोनाली ने लगाया सचिव पर अभद्रता करने का आरोप:
सोनाली ने सचिव पर अभद्र व्‍यवहार करने का आरोप लगाया है.जानकारी के मुताबिक सोनाली फोगाट शुक्रवार सुबह अपने समर्थकों के साथ हिसार की बालसमंद अनाज मंडी का दौरा करने पहुंची थीं. इस दौरान हिसार मार्केट कमेटी भी वहां मौजूद थे. आरोप है कि ग्रामीणों द्वारा शिकायतें बताने पर जब सोनाली फोगाट ने मार्केट कमेटी सचिव से इस पर जवाब मांगा तो उन्होंने सोनाली से अभद्रता करते हुए कुछ अपशब्द कह दिए.

समर्थकों ने की सचिव से हाथापाई:
इससे नाराज होकर सोनाली के समर्थकों ने सचिव से हाथापाई की और सोनाली ने उन्हें चप्पलों से जमकर पीटा. गौरतलब है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में आदमपुर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं और टिकटॉक स्टार सोनाली फोगाट को निवर्तमान विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कुलदीप बिश्नोई ने हराया था. 

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गुजरात में कांग्रेस के एक और विधायक ने छोड़ा हाथ का साथ, राज्यसभा चुनाव से पहले अब तक 8 विधायकों ने दिया इस्तीफा

गुजरात में कांग्रेस के एक और विधायक ने छोड़ा हाथ का साथ, राज्यसभा चुनाव से पहले अब तक 8 विधायकों ने दिया इस्तीफा

अहमदाबाद: राज्यसभा चुनाव से पहले गुजरात में कांग्रेस पार्टी के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. पिछले तीन दिनों में पार्टी के 3 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं. ऐसे में अब तक 8 कांग्रेस विधायक हाथ का साथ छोड़ चुके हैं. फिलहाल इस्तीफा देने वाले विधायक मोरबी से ब्रिजेश मेरजा हैं. इससे पहले अक्षय पटेल और जीतू चौधरी भी पार्टी का साथ छोड़ा है. 

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भाजपा कोरोना से ज्यादा राज्यसभा चुनावों पर ध्यान दे रही:
विधायकों के इस्तीफे पर कांग्रेस पार्टी भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रह है. पार्टी के अनुसार भाजपा इस समय कोरोना से ज्यादा राज्यसभा चुनावों पर ध्यान दे रही हैं और विधायकों की खरीद फरोख्त में लगी हुई है. 

चुनाव के ऐलान के बाद कांग्रेस के पांच विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था:
इससे पहले राज्यसभा चुनाव के ऐलान के बाद कांग्रेस के पांच विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. गढ्डा से प्रवीण मारू, लिंबडी से सोमा पटेल, अबडासा से प्रद्युम्न सिंह जडेजा, धारी से जेवी काकड़िया और डांग से मंगल गावित ने अपना इस्तीफा दिया था. वहीं, कल यानी गुरुवार को जिन दो विधायकों ने इस्तीफा दिया, वे अक्षय पटेल और जीतू चौधरी थे.

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गुजरात में कांग्रेस विधायकों की संख्या अब 66:
बता दें कि गुजरात में कांग्रेस विधायकों की संख्या अब 66 रह गई है. कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरा खेल राज्य में आने वाली 4 राज्यसभा सीटे को लेकर खेला जा रहा है. जिसमें अब कांग्रेस का पलटा काफी हल्का नजर आ रहा है. 
 

Rajyasabha Election: व्हिप जारी करेगी कांग्रेस, अनुशासन बिगड़ते ही सदस्यता समाप्त का खतरा!

जयपुर: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों के लिये व्हीप जारी करेगी. व्हीप में साफ होगा कि अगर उल्लघंन किया तो सदस्यता रद्द हो जाएगी. अनुशासन बनाये रखना ही व्हीप का असली मकसद होता है. इतिहास गवाह है कि गुजरात में बीते राज्यसभा चुनावों में अहमद पटेल तभी जीते थे जब उन्हीं के पार्टी के 2 विधायकों को जनप्रतिनिधि कानून के दायरे में लाया गया. 

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चुनाव बेहद दिलचस्प: 
राज्यसभा चुनाव में राजस्थान में 3 सीटों पर चुनाव होने है, चुनावी समर में उम्मीदवार उतरे है 4, दो कांग्रेस के और दो बीजेपी के.. लिहाजा चुनाव बेहद दिलचस्प है. सत्ताधारी दल कांग्रेस जीत के प्रति आश्वस्त है लेकिन कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहती. लिहाजा कांग्रेस विधायक दल की ओर से अपने सभी 107 विधायकों के लिये व्हिप जारी किया जाएगा, इसे मानना विधायकों के लिये अनिवार्य होगा. वैसे तो कांग्रेस विधायक दल के अंदर क्रास वोटिंग की संभावना नजर नहीं आ रही लेकिन राजनीति में कु़छ कहा नहीं जा सकता है. आइये पहले आपको बता देते है व्हिप क्या होता है..

---व्हिप के मायने---
--व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के तहत माना जा सकता है.
--उल्लंघन पर सदस्यता रद्द कर दी जा सकती है. 
--व्हिप 3 तरह के होते हैं.
- एक लाइन का व्हिप
 - 2 लाइन का व्हिप और 3 लाइन का व्हिप.
- इन तीनों व्हिप में 3 लाइन का व्हिप अहम माना जाता है, इसे कठोर कहा जाता है.
- इसका इस्तेमाल सदन में अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस या वोटिंग में किया जाता है.
- यदि किसी सदस्य ने इसका उल्लंघन किया तो उसकी सदस्यता खत्म होने का भी प्रावधान है. 
- व्हिप के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलेट के तहत मतदान प्रक्रिया होती है.  
- किसी भी दल के विधायक को उसकी पार्टी के एंजेट को दिखाकर ही मत देना होता है ऐसा नहीं होने पर वोट अमान्य हो सकता है. 

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अदालत के महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार संसदीय परम्पराओं को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये व्हिप का प्रावधान है जिसके तहत क्रास वोटिंग को रोका जा सके और पार्टी के आदेश का विधायक अनुशासित होकर पालन करे, हार्स ट्रैडिंग को प्रोत्साहन नहीं मिले. राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने दो उम्मीदवारों को चुनावी समर में उतारा है के सी वेणुगोपाल और नीरज डांगी. इन्हें 13 निर्दलीय, 2 सीपीएम, 2 बीटीपी, 1 आरएलडी के वोटों की उम्मीद है. इस गणित के लिहाज से तो कांग्रेस को 3 में से 2 सीटें मिलना तय है. फिर भी सियासत आखिर सियासत ही है.

 ...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

RCA अध्यक्ष वैभव गहलोत का जन्मदिवस आज, अन्य जिलों की तरह जोधपुर में भी आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम

RCA अध्यक्ष वैभव गहलोत का जन्मदिवस आज, अन्य जिलों की तरह जोधपुर में भी आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम

जोधपुर: प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव गहलोत का आज जन्मदिवस है और प्रदेश के अन्य जिलों की तरह सूर्यनगरी जोधपुर में भी वैभव गहलोत के जन्मदिवस पर सेवा भाव से जुडे अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं तो वहीं इसी कड़ी में कांग्रेस नेता राजूराम चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने केक काटकर वैभव गहलोत का जन्मदिवस मनाया. 

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गौशाला जाकर गायों का जहां चारा खिलाया गया: 
इस अवसर पर केक काटने के बाद जहां राजूराम चौधरी सहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आठ तरह के अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जिसमें पहले केक काटकर शुभारंभ करने के बाद गौशाला जाकर गायों का जहां चारा खिलाया गया, टीबी अस्पताल में जाकर टीबी मरीजों को फ्रूट्स इत्यादी बांटकर उनका सम्मान किया गया तो वहीं बाद में सार्वजनिक उद्यानों पर जाकर पक्षियों के लिए परिंडे लगाए गए.

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सोशल डिस्टेसिंग की भी पूरी तरह से पालना की गई:
इस दौरान जहां सभी द्वारा कोरोना के तहत मास्क लगाने से लेकर सोशल डिस्टेसिंग की भी पूरी तरह से पालना की गई. कांग्रेस नेता राजूराम चौधरी और युवा कांग्रेस कार्यकर्ता दिव्या गहलोत ने कहा कि कोरोना के चलते जहां वैभव गहलोत द्वारा उनके जन्मदिवस पर आग्रह किया गया था कि कही पर भी भीड़ नहीं की जाए मगर वह सेवा के लिए सदेव आगे रहे हैं उसी को ध्यान में रखते हुए हमने पूरी सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखते हुए उनके जन्मदिवस पर सेवा भाव से जुड़े कार्य कर उनका जन्मदिवस मनाया है. 


 

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की बिछी चौसर, तीन सीटों पर चार उम्मीदवार मैदान में 

जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की चौसर बिछ गई है.3 सीटों पर 4 उम्मीदवार चुनावी समर में उतरे है, दो भाजपा से और दो कांग्रेस से.तीसरी सीट के लिये रोमांचक जंग के आसार है. वोटों का गणित कांग्रेस के पक्ष में है,करीब 122 से 125 वोट कांग्रेस खेमे में माने जा रहे ,बीजेपी को उम्मीद है सेंध लगाने की.  

पूरे 200 विधायकों के वोट हैं मान्य: 
राज्यसभा चुनाव की गणित की बात करे तो एक सीट को जीतने के लिए कितने वोट चाहिए?  दरअसल, प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के मान्य वोट हैं. प्रदेश की इन तीनों सीटों की बात करें तो हर एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए. कांग्रेस ने दोनों उम्मीदवारों को बराबरी का वोट दिलाने की रणनीति बना ली थी.

सत्ताधारी दल के पास वोटों की गणित की बात करे तो
कांग्रेस - 107
निर्दलीय - 13
बीटीपी-2
आरएलडी-1
सीपीएम - 2
कांग्रेस +=125 

बीजेपी +
72 वोट
RLP - 2
कुल वोट-74

कांग्रेस को दो सीट जीतने के लिए चाहिए 102 वोट:
तय फॉर्मूले के अनुसार कांग्रेस को दो सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं. वहीं बात करते है कि भाजपा के पास सदन में 72 विधायक हैं, ऐसे में प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए लिहाजा भाजपा के खाते में भी एक सीट आने वाली है. दो सीटों पर बीजेपी की जीत की संभावना तभी है जब निर्दलियों और कांग्रेस कैम्प में सेंध लगे.

दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून पहुंच गया केरल, अगले 24 घंटे में लक्षद्वीप में भारी बारिश की संभावना

बीजेपी की रणनीति
-असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों का समर्थन जुटाना
-लेकिन वोट दिखाकर देना होगा
-कांग्रेस विधायक दल के व्हीप का पालन करना अनिवार्य होगा
-क्रास वोट, अनुपस्थित और पेन/स्याही की गलती करने पर ही बीजेपी को लाभ
-निर्दलीय विधायकों का वोट गोपनीय होता है दिखाकर और नहीं दिखाकर दोनों तरीके से वोट दे सकते है
-बीजेपी की कोशिश निर्दलियों के वोट में सेंध लगे, हालांकि कार्य आसान नहीं है

बहरहाल चुनाव तो चुनाव ही है.लॉक डाउन के कारण रिसोर्ट राजनीति भले ही नजर ना आये लेकिन खेमेबंदी साफ नजर आने वाली है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

निजी अस्पतालों के लिए एडवाइजरी जारी, कोरोना मरीजों का फ्री इलाज, अन्यथा होगी सख्त कार्रवाई 

19 जून को होंगे राज्यसभा चुनाव, 7 राज्यों की 18 सीटों पर होने हैं राज्यसभा चुनाव

जयपुर: राज्य सभा की 18 सीटों के लिए इस महीने की 19 तारीख को चुनाव आयोजित किए जाएंगे. चुनाव आयोग ने यह जानकारी दी है. 19 जून को राज्यसभा चुनाव होंगे. कोरोना संक्रमण के चलते चुनाव स्थगित हुए थे. 7 राज्यों की 18 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने हैं. प्रदेश की 3 सीटों पर चुनाव होने हैं.19 जून को राज्यसभा चुनाव होंगे, सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे. वहीं 19 जून को शाम 5 बजे बाद मतों की गणना होगी. कोरोना संक्रमण के चलते चुनाव स्थगित करने का फैसला लिया था. 

19 जून को इन सीटों पर होगा मतदान:
राज्यसभा की जिन 18 सीटों के लिए 19 जून को मतदान होगा. उनमें आंध्र की 4 सीट, गुजरात की 4 सीट, झारखंड की 2 सीट, मध्य प्रदेश की 3 सीट, मणिपुर की 1 सीट, मेघालय की 1 सीट और राजस्थान की 3 सीट शामिल हैं.

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राजस्थान में तीन सीटों पर होंगे चुनाव:
राजस्थान में तीन सीटों पर राज्यसभा चुनाव होंगे. चार उम्मीदवार मैदान में है, दो कांग्रेस और दो भाजपा के उम्मीदवार है. कांग्रेस के प्रत्याशी केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी है. जबकि भाजपा से राजेन्द्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत उम्मीदवार है. संख्या बल में कांग्रेस को बढ़त हासिल है. एक-एक सीट पर दोनों दलों की जीत तय है. तीसरी सीट के लिए चुनावी जंग होगी.

कोरोना संकट के बीच मोदी सरकार के बड़े ऐलान, MSME को 20 हजार करोड़ लोन के प्रस्ताव को मंजूरी

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