SMS की जर्जर हालात के अभियान पर चिकित्सा मंत्री गंभीर

Vikas Sharma Published Date 2019/07/12 05:43

जयपुर: प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल की जर्जर हालात के मामले को राज्य सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है. फर्स्ट इंडिया की मुहिम के बाद चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के निर्देश पर सरकारी तंत्र एक्टिव मोड में नजर आया. एक तरफ जहां पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने अस्पताल के मलबे को हटाने के लिए प्लानिंग शुरू की, वहीं दूसरी ओ जर्जर वार्डों में तत्काल मेंटीनेंस के लिए उच्च स्तर पर बैठकों का दौर चला. 

अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की: 
एसएमएस अस्पताल की दूसरी फ्लोर के रियलिट चैक और उसमें दिखाई गई मौत की दशहत को लेकर चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने तत्काल अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की. मंत्री डॉ.रघु शर्मा ने न सिर्फ एसएमएस अस्पताल के भवन, बल्कि ऐसे हालात वाले सभी अस्पतालों में भवन के रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. डॉ. शर्मा ने एसएमएस अस्पताल भवन में प्लास्टर गिरने की घटना को गंभीरता से लेते हुए इस भवन का तकनीकी परीक्षण करवाकर उनके रखरखाव के लिए प्रस्ताव तैयार बनाने के निर्देश भी दिए. साथ ही अस्पताल प्रशासन को भी निर्देश दिए कि किसी भवन के क्षतिग्रस्त होने पर सम्बंधित क्षेत्र से मरीजों को तत्काल अन्यत्र स्थानांतारित करने की व्यवस्था की जाए. चिकित्सा मंत्री के आदेश पर अस्पताल प्रशासन एक्टिव मोड में आया. आनन-फानन में अस्पताल परिसर से छत के मलबे को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया. साथ ही दूसरी फ्लोर पर तत्काल मेंटीनेंस के लिए बजट स्वीकृत करवाने की दिशा में भी कवायद शुरू हुई.  

पुरानी फाइलों से धूल हटाना शुरू: 
सामाजिक सरोकार के तहत फर्स्ट इंडिया की इस मुहिम पर चिकित्सा मंत्री के निर्देश मिलते ही सरकारी एजेंसियों ने भी पुरानी फाइलों से धूल हटाना शुरू कर दिया. पूरे मामले को लेकर चिकित्सा शिक्षा सचिव से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव(फाइनेंस) ने अस्पताल के अधिकारियों से साथ बैठक की. इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने सैंकड फ्लोर की पूरी मेंटनेंस के लिए करीब 10 करोड़ का प्लान पेश किया. सूत्रों की माने तो उच्चाधिकारियों ने इस पूरे काम को फेजवार करने की स्वीकृति दी है. ऐसे में अब अस्पताल प्रशासन एकबार फिर उन वार्डों का प्लान बनाने में जुट गया है, जहां सर्वाधिक हालत खराब है.  

- इस पूरे मामले को लेकर फर्स्ट इंडिया ने न सिर्फ सरकारी तंत्र पर सवाल उठाए है, बल्कि विशेषज्ञों से चर्चा करके इसका समाधान भी तलाशा है. 

- ट्रोमा सेन्टर के ठीक बगल में 200 करोड़ की लागत से सात मंजिला सुपर स्पेशलिटी सेंटर और आर्गन ट्रांसप्लांट सेंटर बन रहा है....इसके बाद यूरोलॉजी, गेस्टोएंट्रोलॉजी नेफ्रोलॉजी विभाग यहां शिफ्ट होंगे. इन विभागों का बड़ा हिस्सा एसएमएस की मुख्य बिल्डिंग से खाली हो जाएगा. 

- इसी तर्ज पर जर्जर हालात में पड़े कॉटेज वाले हिस्से को भी बहुमंजिला इमारत में तब्दील किया जा सकता है. यदि ऐसा होता है कि तीन से पांच डिपार्टमेंट एक सुव्यवस्थित तरीके से यहां शिफ्ट हो सकते है. पार्किंग की बड़ी समस्या भी खत्म हो सकती है.   

- इसके बाद मुख्य बिल्डिंग पर फोकस किया जाए, जैसे-जैसे फण्ड की व्यवस्था हो, वैसे-वैसे पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर ब्लॉकवार नई बहुमंजिला इमारतें तैयार की जाए.  

- इसके साथ ही जिस तरह से अस्पताल में सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, उसे देखते हुए आसपास के बड़े सरकारी बंगलों को भी प्लानिंग में शामिल किया जाए. 

जिस तरह से फर्स्ट इंडिया की खबर पर चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता दिखाई है, उसने गहलोत सरकार की संवेदनशीलता को साबित कर दिया है. अब देखना यह होगा कि राजस्थान की चिकित्सा क्षेत्र की अपेक्स संस्थान यानी एसएमएस में जर्जर बिल्डिंग समस्या के स्थाई समाधान के लिए सरकार कैसे आगे बढ़ती है.  

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