मेहरानगढ़ किले का गौरवमयी इतिहास बनाता है उसे सबसे अलग

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/15 11:40

जोधपुर। संरक्षण के लिहाज से देश और दुनिया में अपनी अनूठी मिसाल रखने वाले जोधपुर के किले का अपना गौरवमयी इतिहास है। किले की बनावट से लेकर ऐतिहासिक तथ्यों का ही नतीजा है कि प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख पर्यटक यहां आते है। पर्यटकों का तो लगाव इस किले से है ही लेकिन इतिहास विशेषज्ञ और शोधार्थी भी इस किले पर शोध करने आते है। बेहतर संरक्षण के लिए इस किले प्रबंधन को कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। 

राजस्थान में किले तो कई है लेकिन सबसे संरक्षित अगर कोई किला है तो वह है जोधपुर का मेहरानगढ़ किला, जिसे मयूर ध्वज भी कहा जाता है और हर तरह की चिंताओं को हरने वाला किला माना जाता है। जोधपुर के पूर्व नरेश गजसिंह द्वारा इस किले के संरक्षण को लेकर जो गंभीरता बरती जा रही है उसी का नतीजा है कि एशिया के सबसे संरक्षित किले के रूप में मेहरानगढ़ को नवाजा जा चुका है। देश के उत्तर पश्चिम के सांस्कृतिक शहर जोधपुर में पन्द्रहवीं शताब्दी में मेहरानगढ़ दुर्ग बना। एक अभेद्य दुर्ग। इस किले को आज तक कोई राजा जीत नहीं सका। पहले इसे मयूर ध्वज कहते थे। 

यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर मैदान से 125 मीटर ऊंचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊंची दीवार से घिरा हुआ है। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। यह किला देखने के लिए टिकट लगता है। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, जालीदार खिड़कियां और प्रेरित करने वाले नाम हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना और दौलत खाना आदि। इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का खूबसूरत संग्रह है। इसके अतिरिक्त पालकियां, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी है। मेहरानगढ म्यूजियम ट्रस्ट के निदेशक करणी सिंह जसोल के नेतृत्व में पूरी टीम हमेशा ततपर रहती है। किले के उप प्रबंधक महेन्द्र सिंह तंवर ने बताया कि पूर्व नरेश गजसिंह खुद किले के बेहतर संरक्षण के लिए खुद बराबर मॉनिटरिंग करते है। जो निदेशक है करणी सिंह जसोल उनकी देख रेख और निर्देशन में किले के संरक्षण का काम काज चल रहा है।

गौरतलब है कि राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस पहाड़ी पर किले की नीव डाली। महाराज जसवंत सिंह ने इसे पूरा किया। मूल रूप से किले के सात द्वार, पोल और आठवाँ द्वार गुप्त है। प्रथम द्वार पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगी हैं। अन्य द्वारों में शामिल जयपोल द्वार का निर्माण 1806 में महाराज मान सिंह ने अपनी जयपुर और बीकानेर पर विजय प्राप्ति के बाद करवाया था। फतेह पोल अथवा विजय द्वार का निर्माण महाराजा अजीत सिंह ने मुगलों पर अपनी विजय की स्मृति में करवाया था। इन दिनों जब पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ पर्यटकों की संख्या बढ गई है तो वही मेहरानगढ ट्रस्ट के लिए भी बडी चुनौती खडी हो गई है क्योकि कई बरसों बाद ऐसा हुआ है जब एक साथ इतने पर्यटक जोधपुर आए है और मेहरानगढ़ किले में सबसे अधिक पर्यटकों की भीड़ देखी जा रही है। 

...राजीव गौड फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर

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