गेहूं खरीद को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, मंडी का ताला जड़ किया विरोध प्रदर्शन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/03 10:38

पहाड़ी(भरतपुर)। गौण मंडी यार्ड में एफसीआई अधिकारियों व ठेकेदार की मिलीभगत के चलते किसानों की गेहूं की फसल खरीद में धांधली व भ्रष्टाचार का मामला गर्माता जा रहा है। जिसको लेकर किसानों ने मंडी का ताला जड़कर नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन के बाद एसडीएम पहाड़ी को ज्ञापन सौंप कार्यवाही की मांग की है।

किसानों का आरोप है कि एफसीआई अधिकारियों व ठेकेदार राजेश खंडेलवाल की मिलीभगत के चलते किसानों के गेहूं का उचित मूल्य न मिलकर सस्ते दामो में गेहूं की खरीद की जा रही है किसानों का आरोप है कि एफसीआई अधिकारियों व ठेकेदार द्वारा गेहूं की फसल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर सरकारी खरीद से मना कर दिया जाता है। वहीं व्यापारियों द्वारा सस्ते दामो में गेहूं की फसल को खरीद लिया जाता है। इनकी मनमर्जी व कमीशन के खेल के चलते किसान को घंटो तपती धूप में समर्थन मूल्य में अपनी फसल को बेचना चाहता है परंतु खरीद में चल रही धांधली के चलते किसान को सस्ते दामो में फसल बेचने को मजबूर किया जा रहा है। किसानों ने ज्ञापन में साफ तौर पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए बताया है कि किसान की फसल को मंडी व्यापारियों द्वारा सस्ते दामों में खरीद कर एफसीआई के कट्टों में भर दिया जाता है और सरकारी खरीद दिखा दी जाती है ज्ञापन में किसानों की समस्या का शीघ्र समाधान नही किया गया तो किसान आंदोलन पर उतारू हो जाएंगे।

मेवात में चलता लूट का नेटवर्क:-
जिला हैडक्वाटर से 80 किमी दूर मेवात के किसानों का शोषण होना कोई नही बात नही है यहां हर वर्ष ये खरीद में धांधली का मामला सुर्खियों में रहता है किसान और व्यापारियों के बीच लेन देन के चलते किसान व्यापारियों का विरोध करने में सक्षम नही रहते है,क्योंकि किसान समय पड़ने पर किसान को रुपये की जरूरत पड़ने पर व्यापारियों से पैसा लेना पड़ता है जिसके चलते किसान सब तरीके से दबा हुआ महसूस कर घुट घुट कर जीता है।

कैसे चलता धांधली का खेल:-
किसान के गेहूं को सस्ते दामो में खरीदकर ठेकेदार व एफसीआई अधिकारी से मिलीभगत कर एफसीआई के कट्टों में सरकारी खरीद दिखा दी जाती है इसमें चहेतों व विश्वासपात्र लोगों की गिरदावरी को लिया जाता है जो कि बैंक से पैसे निकाल व्यापारी को नगद वापिसी कर दे,इस प्रकार चलता है लूट का नेटवर्क,उधर व्यापारियों व ठेकेदार सहित एफसीआई अधिकारियों की मिलीभगत इसलिए होती है कि ठेकेदार को व्यापारियों के जरिये माल खरीद करनी पड़ती है जिसमे एफसीआई अधिकारी की सहमति भी होती है इस तरह सब मिलकर किसान को ठगा जाता है।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in