VIDEO: बीजेपी की चिंतन बैठक से उपजी मेवाड़ की सियासत, आदिवासी अंचल में फिर स्थापित होने के प्रयास, देखिए खास रिपोर्ट

VIDEO: बीजेपी की चिंतन बैठक से उपजी मेवाड़ की सियासत, आदिवासी अंचल में फिर स्थापित होने के प्रयास, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान की राजनीति के मिजाज में मेवाड़-वागड़ की अलग पहचान है. यहां से जिस पार्टी की चुनावी आंधी चलती है उसी को राजस्थान पर राज करने का अवसर मिलता है. ऐसा आमतौर पर कहा जाता है.RSS ने पहले से ही मेवाड़ पर पैनी नजरे गड़ा रखी है ,अब बीजेपी की चिंतन बैठक ने राज्य के सत्ताधारी दल कांग्रेस के लिए चिंता पैदा कर दी है.BTP उदयपुर संभाग में कांग्रेस की जगह लेना चाहती है.बीजेपी का मकसद है आदिवासी वोटों का गणित.

मेवाड़-वागड़ की राजनीति अलग रही है ,यहां से उपजे सियासी संदेश को पूरे प्रदेश ने स्वीकारा है.यहीं कारण था कि जब सुराज संकल्प यात्रा की शुरुआत वसुंधरा राजे ने मेवाड़ - वागड़ की धरती से ही की थी उस समय पूरे प्रदेश में प्रचंड तौर पर कमल खिला था.जबकि 1952 से हो रहे चुनावों के परिणाम देखे तो पलड़ा कांग्रेस का ही भारी रहा,राज्य में सर्वाधिक शासन करने वाले मुख्यमंत्री रहे मोहन लाल सुखाड़िया की कर्मभूमि मेवाड़ रही,वहीं वागड़ को हरिदेव जोशी ने मुख्यमंत्री बनकर सियासी पहचान दी.आदिवासी अंचल से दो सीएम देने वाले कांग्रेस को आज यहां अनेकों सियासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.आदिवासी अंचल में वनवासियों के बीच खुद को स्थापित करने के लिये राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने कदम बढ़ाये ,बाद में बीजेपी ने संगठन खड़ा किया.

जानिए, बीजेपी का मेवाड़ और वागड़ में कैसा रहा सफर:
-कद्दावर नेता सुंदर सिंह भंडारी ने मेवाड़ में जनसंघ खड़ा किया
-गुलाबचंद कटारिया जैसे संघ के स्वयंसेवकों को पार्टी में लाये
-बीजेपी के लिये जमीन तैयार की 
-पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 70के दशक में यहां प्रवास किये 
-भानुप्रकाश शास्त्री जैसे नेताओं ने बीेजेपी को खड़ा करने में पसीना बहाया
-मेवाड़-वागड़ की धरती पर आर एस एस ने नेटवर्क तैयार किया
-संघ प्रचारक सोहन सिंह ने आदिवासी धरती पर संघ नेटवर्क सशक्त बनाया
-वनवासी कल्याण परिषद बनाकर मिशनरी प्रभाव को रोकने का काम किया
-आदिवासी क्रांतिकारी गोविन्द गुरु के स्मारक के लिये कार्य किया
-यह इलाका गुजरात से सटा है लिहाजा नरेन्द्र मोदी का प्रभाव काम आया
-बीते कुछ सालो मौजूदा संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के यहां फेेरे बढे
-प्रताप गौरव स्मारक बनाकर संघ ने यहां अपने दखल को सशक्त किया
-वसुंधरा राजे ने आदिवासी इलाके में कमल को मजबूती दी
-नये आदिवासी नेतृत्व को राजे भाजपा में लेकर आई
-कुशलगढ़ जैसे सीटों पर आजादी के बाद पहली बार कमल खिलाया
-कांग्रेस को मजबूत चुनौती देते हुये बीजेपी की उर्वर जमीन वसुंधरा राजे ने तैयार की
-राजे सरकार में मेवा़ड़ -वागड़ कोटे को प्राथमिकता दी गई,खासतौर से 5 आदिवासियों को मंत्री पद से नवाजा
- इनमें प्रमुख रहे--नंदलाल मीना को जनजाति विकास मंत्री बनाकर कैबिनेट मंत्री बनाया
-धनसिंह रावत और सुशील कटारा को राज्य मंत्री का पद दिया
-तत्कालीन डूंगरपुर विधायक भीमाभाई को संसदीय सचिव बनाया
प्रकृति खराड़ी को एसटी आयोग का चेयरमैन बनाया

कांग्रेस और BTP ने प्रभाव बढ़ाया:
-2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जड़े हिली ,फिर कांग्रेस उतना नुकसान बीजेपी को नहीं कर पाई
-उल्टा कांग्रेस को BTP ने जीती हुई सीटों को हरवा दिया
-गहलोत सरकार बनी तो अर्जुन बामनिया को जनजाति विकास राज्य मंत्री बनाया गया
-जबकि महेंद्रजीत सिंह मालवीय और दयाराम परमार सरीखे दिग्गज मंत्री नही बन पाए
-उधर BTP ने दो विधायक रामप्रसाद रोत और राजकुमार रोत को विधानसभा पहुंचा दिया
-आदिवासी युवा वोट बैंक को BTP ने तोड़ा यह बीजेपी के लिए चिंता की बात है 

उदयपुर संभाग का राजनीतिक मानचित्र:
-उदयपुर संभाग में 28सीटें आती है 
-यहां की अधिकांश सीटें एसटी रिजर्व है
-उदयपुर-8,बांसवाड़ा-5,राजसमंद-4,चितौड़-5,प्रतापगढ-2
,डूंगरपुर-4
-वसुंधरा राजे के समय उदयपुर संभाग के आदिवासी इलाके में बीजेपी के पास 19में से 17सीटें आई थी
-वहीं झाडौल और बागीदौरा की आदिवासी धरती पर 'हाथ' कायम रहा
- बीजेपी के दौर में भी महेंद्रजीत सिंह मालवीय नही हारे
-वसुंधरा राजे के उदय के बाद बीजेपी ने आदिवासी इलाके में अपना इतिहास बदला था

मेवाड़-वागड़ और कांग्रेस की चिंता:
- BTP का बढ़ता प्रभाव यहां कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब
- वनवासी क्षेत्र में संघ का प्रभाव भी परेशानी
- आज भी बड़ी तादाद में बीजेपी के कुछ प्रमुख आदिवासी नेता चुनाव जीत कर विधायक बने
- इनमे प्रमुख है अमृत लाल मीणा,हीरालाल दरंगी,बाबू लाल खराड़ी सरीखे विधायक है
- बीजेपी के उदयपुर से सांसद अर्जुन लाल मीणा, बांसवाड़ा - डूंगरपुर से सांसद है कनक मल कटारा
- आदिवासी बहुल वल्लभनगर और धरियावद में चुनाव होने है

मजबूती के लिए कांग्रेस क्या कर सकती है:
- महेंद्रजीत मालवीय और दयाराम परमार को मंत्री बनाया जा सकता है
- सियासी नियुक्तियों में आदिवासी अंचल को तरजीह मिले
- मेवाड़ वागड़ के किसी दिग्गज को राज्यसभा में भेजा जा सकता है
- गणेश घोघरा को यूथ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है
- रघुवीर सिंह मीणा कांग्रेस की शक्तिशाली संस्था CWC के सदस्य है

BTP का बढ़ता प्रभाव कांग्रेस और BJP दोनों के लिए चिंता:
- BTP का एक मकसद यह भी कहा जाता है भील प्रदेश
- छतीसगढ़ ,MP से लेकर गुजरात तक राजस्थान होते हुए वनवासी पट्टी गुजर रही है
- वामपंथी विचारधारा भी हिलोरे ले रही
- ईसाई धर्म को बढ़ावा मिला
- संघ ने अपने नेटवर्क के जरिए धर्मांतरण पर अंकुश लगाया
- लेकिन वनवासियों की सियासी धारा कही जा रही BTP चिंता का सबब
- कांग्रेस का वोट बैंक BTP खा रही है ये कांग्रेस के सामने चुनौती
- गुलाब चंद कटारिया के महाराणा प्रताप को लेकर दिए गए बयान से उपजे नुकसान को रोकना

मेवाड़ और वागड़ में बढ़ते कांग्रेस के ग्राफ को बीजेपी ने आर एस एस की मदद से ध्वस्त किया और भारतीय ट्राइबल पार्टी ने भारी नुकसान पहुंचाया कांग्रेस के लिये आदिवासी इलाका प्रिय इलाका रहा.गांधी परिवार की बेणेश्वर के तीर्थ पर चर्चित सभाएं आज भी आदिवासियों के जहन में है, लेकिन धीरे धीरे सियासी तापमान बदला.लिहाजा कांग्रेस के थिंक टैंक की बीजेपी की चिंतन बैठक पर निगाहें टिक गई है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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