VIDEO: नकारा साबित हुई खान विभाग की टीम और टास्क फोर्स, बंद होंगे सतर्कता शाखा के 34 कार्यालय 

Nirmal Tiwari Published Date 2019/08/25 05:18

जयपुर: राज्य में बजरी सहित अन्य खनिजों के अवैध खनन को रोकने में नाकाम खान विभाग को बड़ा झटका लगने की तैयारी है. खान विभाग की सतर्कता शाखा को समाप्त किए जाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है. प्रस्ताव मंजूर होते खान विभाग की सतर्कता शाखा के 34 कार्यालय बंद कर दिए जाएंगे. एक रिपोर्ट:

माफिया का जाल:
बजरी बंद होने के बाद प्रदेश में बजरी की उपलब्धता चौंकाने वाली है. माफिया का ऐसा जाल बिछ चुका है, जिसके आगे खान विभाग सहित तमाम वह एजेंसी पस्त नजर आती हैं, जिन्हें अवैध बजरी खनन और अन्य खनिजों के अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी. राज्य में बजरी सहित अन्य मिनरल्स का अवैध खनन अनवरत जारी है. बजरी के अवैध खनन को लेकर तो सड़क से लेकर विधानसभा तक काफी हो हल्ला रहा. विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के दर्जनों विधायकों ने बजरी को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा. इसके बाद प्रदेश के खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने विधानसभा में ही अवैध खनन रोकने के लिए अभियान चलाने के आदेश जारी किए, लेकिन अवैध खनन रोकने के लिए बनी टास्क फोर्स और खान विभाग की टीम नाकारा साबित हुई. अभियान चलाना तो दूर खनन रोकने के लिए बनी सतर्कता शाखा को ही अब खत्म करने की तैयारी कर ली गई है, लेकिन इस सतर्कता शाखा के समाप्त होने के बाद अवैध खनन पर कौन कार्रवाई करेगा इसका राज्य सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में कोई हवाला नहीं दिया गया है. 

सतर्कता शाखा का पुनर्गठन:
विधानसभा में चालू वित्त वर्ष के बजट में सीएम अशोक गहलोत ने भी घोषणा की थी कि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सतर्कता शाखा का पुनर्गठन किया जाएगा. ऐसे में सीएम की घोषणा के बाद भी इस शाखा को मजबूत किया जाना तो दूर खत्म करने का प्रस्ताव ही खनन निदेशक ने एसीएस सुदर्शन सेठी को भेजा है. खान विभाग की सतर्कता शाखा के पास पर्याप्त संसाधन नहीं होने का भी हवाला दिया गया है. 

सतर्कता शाखा में पद रिक्त:
वर्तमान में खान विभाग की सतर्कता शाखा में एक अतिरिक्त निदेशक, 8 अधीक्षण खनिज अभियंता, एक दर्जन खनिज अभियंता, 21 सहायक खनिज अभियंता सहित कुल 41 अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं. इनके विपरीत देखा जाए तो 14 पद रिक्त चल रहे हैं और बड़ी संख्या में सतर्कता शाखा में तकनीकी और मंत्रालय कर्मचारियों के पद भी रिक्त पड़े हैं. सतर्कता शाखा के पास अपने कार्यालय भवन और अन्य जरूरी संसाधनों के साथ ही 17 कार्यालय तो ऐसे हैं जिनके पास वाहन भी उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में सतर्कता शाखा से कार्रवाई की उम्मीद रखना बेमानी है. 

कर्मचारियों की कमी:
सतर्कता शाखा को समाप्त करने के पीछे जो आधार तैयार किया गया है, उसमें बताया गया है कि खान विभाग की खनन शाखा में भी अधिकारी कर्मचारियों की कमी है, ऐसे सतर्कता शाखा में कर्मचारियों का पदस्थापन करना मुमकिन नहीं. यह भी कहा गया है कि जिला मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट सहित अन्य कार्य बढ़ने के कारण समय पर जरूरी कार्य निष्पादन में भी समस्या आ रही है. साथ ही हाई कोर्ट में प्रकरणों की संख्या में वृद्धि होने से व्यवस्थित मानिटरिंग तथा अन्य अहम मामलों में विभागीय पक्ष मजबूती से रखने की जरूरत है. 

वित्तीय भार का हवाला:
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि खनिज अभियंता याचिका को अधीक्षण खनिज अभियंता याचिका के पद पर अपग्रेड करने की जरूरत है. इसके अलावा सरकार पर वित्तीय भार का हवाला देते हुए अधीक्षण अभियंता, खनिज अभियंता, सहायक खनिज अभियंता के स्वीकृत पदों की संख्या में बदलाव नहीं करने को कहा जा रहा है. सतर्कता शाखा के अधीक्षण अभियंता के तीन, खनिज अभियंता के 12 और सहायक अभियंता के 19 पदों सहित कार्यालयों को बंद करें का प्रस्ताव दिया गया है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि खान विभाग को साधन संपन्न बनाने की बजाए कमजोर किए जाने की तैयारी है. ऐसे में अवैध खनन की प्रभावी रोकथाम की उम्मीद करना बेमानी होगा. 

... संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट 


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