श्रीनगर Jammu Kashmir: कश्मीर घाटी में अधिकतर जगह न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से ऊपर किया गया दर्ज

Jammu Kashmir: कश्मीर घाटी में अधिकतर जगह न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से ऊपर किया गया दर्ज

Jammu Kashmir: कश्मीर घाटी में अधिकतर जगह न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से ऊपर किया गया दर्ज

श्रीनगर: कश्मीर में अधिकतर स्थानों पर न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से ऊपर दर्ज किया गया. मौसम वैज्ञानिकों ने रविवार से दो दिन तक केन्द्र शासित प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की एवं मध्यम बर्फबारी का पूर्वानुमान लगाया है. अधिकारियों ने बताया कि गुलमर्ग रिजॉर्ट सहित घाटी में ऊंचाई वाले कई क्षेत्रों में गुरुवार को बर्फबारी हुई. बादल छाए रहने के कारण बृहस्पतिवार की रात घाटी में न्यूनतम तापमान में सुधार हुआ और अधिकतर स्थानों पर पारा जमाव बिंदु से ऊपर रहा. गुलमर्ग और पहलगाम में गुरुवार रात न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु से नीचे रहा.

अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर में गुरुवार की रात तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में न्यूनतम तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस और कोकेरनाग में तापमान शून्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा. उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे 1.3 डिग्री सेल्सियस और गुलमर्ग में शून्य से नीचे 5.1 डिग्री सेल्सियस रहा. मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार से अधिक बर्फबारी 26 से 27 दिसंबर के बीच होने का पूर्वानुमान है. मौसम वैज्ञानिक ने कहा कि 26 दिसंबर शाम से 28 दिसंबर दोपहर तक पश्चिमी विक्षोभ के कारण अधिक दबाव बनने का अनुमान है. इस कारण, कश्मीर के मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी (दो से तीन इंच), जम्मू-कश्मीर, जोजिला-मिनमर्ग अक्ष के ऊंचे इलाकों में मध्यम से भारी और लद्दाख के कुछ स्थानों, खासकर कारगिल-जांस्कर क्षेत्र में हल्की बर्फबारी हो सकती है.’’

कश्मीर में 40 दिन का 'चिल्लई कलां' का दौर 21 दिसंबर से शुरू हो गया. इस दौरान क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ती है और तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाती है, जिससे यहां की प्रसिद्ध डल झील के साथ-साथ घाटी के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति लाइनों सहित जलाशय जम जाते हैं. इस दौरान अधिकतर इलाकों में बर्फबारी की संभावना भी सबसे अधिक रहती है, खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में, भारी हिमपात होता है. ‘चिल्लई कलां’ के 31 जनवरी को खत्म होने के बाद, 20 दिन का ‘चिल्लई-खुर्द’ और फिर 10 दिन का ‘चिल्लई बच्चा’ का दौर शुरू होता है. सोर्स- भाषा

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