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धरातल पर नहीं आ पा रहे रिसर्जेंट राजस्थान और 'ग्राम' में हुए कृषि सेक्टर के एमओयू

धरातल पर नहीं आ पा रहे रिसर्जेंट राजस्थान और 'ग्राम' में हुए कृषि सेक्टर के एमओयू

जयपुर। रिसर्जेंट राजस्थान और ग्लोबल एग्रीटेक मीट में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए हुए एमओयू अभी तक धरातल पर नहीं उतर पा रहे  हैं। लैंड कन्वर्जन और अधिकारियों के निष्क्रियता के चलते एमओयू प्रोग्रेस आगे नहीं बढ़ रही है। इसको लेकर कृषि पंत भवन में इनवेस्टर्स की एक अहम बैठक हुई, जिसमें कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने निवेशकों से चर्चा करते हुए उनकी समस्याएं सुनी।

बैठक के दौरान निवेशकों ने सबसे ज्यादा समस्या पानी, लैंड कन्वर्जन और जमीन अलॉटमेंट की बताई। इस पर मंत्री ने अधिकारियों को फकटाकर लगाते हुए आगे से किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होने की चेतवानी दी। बता दे कि रिसर्जेंट राजस्थान में 4 हजार 140 करोड़ रुपए के 20 एमओयू हुए थे, जिसमें 12 एमओयू पूरे हो चुके हैं। वहीं चार ड्रॉप हो गए हैं और शेष चार पाइपलाइन में है।

वहीं जयपुर, कोटा और उदयपुर ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) में टोटल 6 हजार करोड़ रुपए के 78 एमओयू हुए थे, जिसमें से सिर्फ 8 एमओयू हुए हैं और 18 एमओयू प्रक्रियाधीन है। कृषि मंत्री ने बताया कि रेवन्यू विभाग को लैंड से जुड़ी समस्याएं जल्द समाधान करने के निर्देश दे दिए हैं। वहीं जिले में जहां दिक्कत आ रही है, वहां एक सहायक नोडल अधिकारी लगाने पर सहमति बनी है।

बहरहाल ऐसे में, रिसर्जेंट राजस्थान और 'ग्राम' जैसे बड़े बड़े आयोजनों के माध्यम से हुए इतने सारे एमओयू में से महज गिनती के ही एमओयू पूरे होने को लेकर निवेश के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। साफ है कि एमओयू को लालफीताशाही के चलते अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा हैं, जिससे ये एमओयू धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं।

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नागौर: राजस्थान के कई जिलों में टिड्डी दल का हमला जारी है. बीते एक सप्ताह से नागौर में भी टिड्डी दल का हमला जारी है और लगातार 3 दिनों से डीडवाना उपखण्ड क्षेत्र में टिड्डियों का हमला जारी है. टिड्डियों द्वारा फसलों और पेड़ पौधों को भारी नुकसान पंहुचाया जा रहा है. रविवार सुबह केंद्र से आई कृषि विभाग के अधिकारियों की 14 टीमें लगातार टिड्डी मारने और भगाने के प्रयास में जुटी हुई है. वहीं रविवार को डीडवाना विधायक चेतन डूडी भी अधिकारियों के साथ दौलतपुरा गांव में टिड्डियों द्वारा किये गए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे. विधायक डूडी ने केंद्र से आये टीम के अधिकारियों से मुलाकात कर जानकारी और क्षेत्र का मौका मुआयना भी किया गया.

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कृषि मंत्री लालचंद कटारिया से की बात:
वहीं प्रदेश के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया से फ़ोन पर बात कर यहां के कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक एवं नुकसान की आशंका को मध्यनजर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग भी की गई है. डूडी ने मौके पर पंहुचे कृषि अधिकारियों से आंकलन करवाने के आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए. वहीं डूडी ने टिड्डियों को लेकर जिला कलेक्टर से भी वार्ता कर क्षेत्र में टिड्डी पर नियंत्रण को लेकर चर्चा की गई.

फसलों और पेड़ पौधों को टिड्डी से बचाएं:
डूडी ने इस दौरान किसानों से भी अपील करते हुए कहा है कि 8 किलोमीटर लंबे और चार किलोमीटर चौड़े इस टिड्डी दल पर कृषि विभाग द्वारा अकेले नियंत्रण नही किया जा सकता है. किसानों से अपील करते हुए कहा है कि किसान अपने अपने खेतों में टिड्डी भगाने का प्रयास करे और फसलों और पेड़ पौधों को टिड्डी से बचाएं ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके. टिड्डडी दल डीडवाना के आसपास बीती रात से बैठा है और सबह तीन बजे ही टीमों ने स्प्रे कर इसको मारने का प्रयास शुरू किया गया. दिन उगने के बाद टिड्डियों का दल उड़कर आसमान में चला जाता है जिसको मारना मुश्किल हो जाता है और स्प्रे काम नही करता है.

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नागौर: पाकिस्तान से आए कई अलग टिड्डी दल ने नागौर जिले में जमकर तबाही मचाई है. अब टिड्डी दल को समाप्त करने के लिए प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह से सतर्क नज़र आ रहा है. गुरुवार को कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव और  नागौर के प्रभारी सचिव नरेशपाल गंगवार ने नागौर जिला कलेक्ट्रेट सभागार में कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर टिड्डी दल के खात्मे को लेकर एक्शन प्लान तैयार किया है.

किसानों की फसलों को हुआ नुकसान:
जिला प्रशासन ने टिड्डी दल से निपटने के लिए तैयारियां के बारे में जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव ने विस्तृत कार्य योजना की जानकारी दी. इस बैठक में टिड्डी के द्वारा जिले में किसानों की फसलों को पहुंचाये गए नुकसान को लेकर चर्चा की गई. इसके साथ ही टिड्डियों को समाप्त करने के लिए पांच टीमों का गठन किया गया.कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव तथा नागौर के प्रभारी सचिव नरेशपाल गंगवार ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि यह टिड्डी दल पाकिस्तान, अफ्रीका के इलाके से भारत में प्रवेश कर सकता है.

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कई जिलों में हुआ टिड्डी दल: 
डेजर्ट के इलाके बाडमेर से होते हुए नागौर सहित कई जिलों में टिड्डी दल का हमला हुआ है. नियन्त्रण दल द्वारा उनके ऊपर पेस्टिसाइड का स्प्रे करके नष्ट्र कार्य किया जा रहा है केन्द्र सरकार अब डॉन कैमरें की उपलब्धता करवाएंगी टिड्डी दल को समूल नष्ट करके किसानों को राहत देने का प्रयास जारी है. नागौर जिले में टिड्डी के दल ने खिवसर ,मकराना ,मेडता,नागौर व आज जायल में नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि टिड्डी के दल को कंट्रोल करने के लिए विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी कार्ययोजना बना ली गई है.

किसानों को अलर्ट रहने के दिए निर्देश:
इसके साथ ही अब कृषि विभाग की ओर से रात्रि को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए स्प्रे का छिड़काव कर टिड्डी दल  समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा.टिड्डी बड़ी आपदा के रूप में पनप चुकी है, इससे अब अगले बड़े हमले से पहले किसानों को अलर्ट रहने के लिए आगाह किया है. उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अगर कहीं भी टिड्डी दल देखने और होने की सूचना प्राप्त होती है तो वे तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचित करें.

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सीएम का एक और ऐतिहासिक फैसला, किसानों को मिलेगा हर साल 50 करोड़ रुपए का अनुदान

जयपुर: कोविड-19 महामारी के दौर में किसानों को कम दामों पर फसल नही बेचनी पडे़ इसके लिए उपज रहन ऋण को 3 प्रतिशत ब्याज दर पर देने का ऐतिहासिक फैसला किया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फैसले को अमलीजामा पहनाते हुए 1 जून को सभी जिलों में किसानों को एक साथ फसल रहन ऋण वितरण का शुभारंभ किया जाएगा. 

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50 करोड़ रुपये का अनुदान इस योजना के लिए किसानों को मिलेगा:
प्रतिवर्ष कृषक कल्याण कोष से 50 करोड़ रुपये का अनुदान इस योजना के लिए किसानों को मिलेगा. योजना में 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान राज्य सरकार वहन कर रही है. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये तथा बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में मिलेंगे. किसान को अपनी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. बाजार में अच्छे भाव आने पर किसान अपनी फसल को बेच सकेगा. इस योजना से किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताएं पूरी होगी. प्रमुख सचिव सहकारिता नरेश पाल गंगवार ने वीडियों कान्फ्रेंसिंग के दौरान जिले में पदस्थ अधिकारियों एवं व्यवस्थापकों को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता मंत्री राज्य में सहकारिता के ढांचे को सार्थक एवं उपादेय बनाना चाहते है. 

किसानों का सीधा जुड़ाव अब सहकारी समितियों से और मजबूत होगा:
मुख्यमंत्री द्वारा इस योजना में अनुदान देने से किसानों का सीधा जुड़ाव अब सहकारी समितियों से और मजबूत होगा और उनकी मदद भी बेहतर होगी. गंगवार ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रतिवर्ष 2 हजार करोड़ रूपये रहन ऋण के रूप में किसानों की मदद की जाए. यह देश की एक यूनिक योजना है। जिसे मूर्त रूप देना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि इस कार्य में लगे कार्मिकों के लिए भी प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी.  अभी इस कार्य के लिए 4 हजार जीएसएस को अधिकृत किया गया है आने वाले समय में अन्य जीएसएस को भी इस कार्य में जोड़ा जाएगा. उन्होंने निर्देश दिए कि असक्रिय गौण मंडियों को भी शीघ्र सक्रिय किया जाए. जीएसएस एवं केवीएसएस घोषित 400 गौण मंडियां कार्य कर रही है. इन्हें लगातार सक्रिय कर स्थायित्व प्रदान करे. प्रबंध निदेशक राजफैड़ सुषमा अरोड़ा ने कहा कि सरसों एवं चने की समर्थन मूल्य पर 2 लाख 8 हजार से अधिक मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है. अधिकतर खरीद केन्द्र सक्रिय है.

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जहां कही भी तकनीकी समस्या है हमें तुरन्त अवगत करायें:
उन्होंने कहा कि जहां कही भी तकनीकी समस्या है हमें तुरन्त अवगत करायें ताकि किसानों को परेशानी का सामना नही करना पड़े. उन्होंने कहा कि 52 हजार 921 किसानों को 4.91 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है. उन्होंने निर्देश दिए कि ईडब्लयूआर शीघ्र भिजवायें ताकि किसानों को 3 से 4 दिवस में भुगतान हो सके. इससे पहले अतिरिक्त रजिस्ट्रार प्रथम रश्मि गुप्ता ने वीसी के एजेंडा की शुरूआत कर बिन्दुवार चर्चा की. मार्केटिंग बोर्ड के निदेशक ताराचंद मीणा ने कहा कि मंडी सचिव गौण मंडी से लेकर किसी भी प्रकार की समस्या आने पर तत्काल जीएसएस एवं केवीएसएस की मदद करे. प्रबंध निदेशक अपेक्स बैंक परशुराम मीणा ने कहा कि 7 लाख 82 हजार से अधिक किसानों को 2 हजार 377 करोड़ रूपये से अधिक का फसली ऋण वितरित हो चुका है. उन्होंने कम फसली ऋण वितरण वाले जिलों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए कि एक सप्ताह में ऋण वितरण में गति लाए अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहे. 

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने की समीक्षा, कहा-कोरोना महामारी के बीच टिड्डी प्रकोप बड़ी चुनौती

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने की समीक्षा, कहा-कोरोना महामारी के बीच टिड्डी प्रकोप बड़ी चुनौती

जयपुर: कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कोरोना महामारी के बीच टिड्डी प्रकोप को बड़ी चुनौती बताते हुए विभागीय अधिकारियों को जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय एवं किसानों के सहयोग से प्रभावी नियंत्रण करने के निर्देश दिए. निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ टिड्डी नियंत्रण, खरीफ आदान व्यवस्था एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा की. सोमवार को कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन ने इस साल व्यापक पैमाने पर टिड्डी प्रकोप की आशंका जताते हुए गत वर्ष की तुलना में दो से तीन गुना अधिक प्रभाव की चेतावनी दी है.

टिड्डी नियंत्रण के लिए सभी जरूरी इंतजाम:
इस साल पिछले वर्ष प्रभावित हुए 12 जिलों के अलावा अन्य जिलों में भी टिड्डी के पहुंचने की आशंका है. उन्होंने कहा कि हमने पिछले साल बहुत ही बढ़िया तरीके से टिड्डी पर नियंत्रण किया था, लेकिन इस साल और ज्यादा प्रभावी सर्वेक्षण एवं नियंत्रण प्रणाली अपनाने की आवश्यकता होगी. राज्य सरकार केन्द्र के साथ पूरा समन्वय स्थापित कर टिड्डी नियंत्रण के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर रही है. उन्होंने जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए. अधिकारी मौके पर पर्याप्त कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित करें. व्हाट्स एप ग्रुप बनाकर पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर सांसद तक सभी जनप्रतिनिधियों को जोड़ें, ताकि समय पर टिड्डी की तुरंत सूचना मिल सकें और प्रभावी नियंत्रण किया सके. उन्होंने किसानों का पूरा सक्रिय सहयोग लेने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि टिड्डी प्रभावित जिलों में रिक्त पदों पर अन्य जिलों से कार्मिक नियुक्त किए गए हैं और शीघ्र ही नई भर्ती से चयनित सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षकों को नियुक्ति दी जाएगी. जिसके कार्मिकों की कोई कमी नहीं रहेगी.

खाद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए:
कृषि मंत्री ने अच्छी बरसात होने की भविष्यवाणी को विभाग और किसानों के लिए खुश खबरी बताते हुए काश्तकारों के लिए समय पर बीज एवं खाद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। फसल बीमा ऋणी किसानों के लिए भी वैकल्पिक कटारिया ने बताया कि इस वर्ष से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऋणी किसानों के लिए भी वैकल्पिक कर दी है. ऋणी किसान यदि स्वयं को बीमा से अलग रखना चाहता है तो उसे आगामी 8 जुलाई तक संबंधित बैंक शाखा को सूचित करना होगा. उन्होंने अधिकारियों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए. कृषि मंत्री ने रबी फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि नुकसान का आंकलन किया जा सके. उन्होंने तकनीकी वजह से पुराने सालों के अटके कुछ क्लेम भी शीघ्र जारी करवाने के निर्देश दिए.

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गत वर्ष हुए 12 जिले टिड्डी से प्रभावित:
प्रमुख शासन सचिव नरेशपाल गंगवार ने बताया कि गत वर्ष 12 जिले टिड्डी से प्रभावित हुए थे, वहां के लिए काफी पहले ही कंटीनजेंसी प्लान तैयार कर लिया है. इस साल नए जिले जुड़ने की आशंका के कारण शेष जिले भी जिला कलक्टर से कंटीनजेंसी प्लान स्वीकृत कराकर मुख्यालय भिजवाएं. उन्होंने सोयाबीन बीज का उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि टिड्डी नियंत्रण के लिए जहां गाड़ियां पहुंचने में मुश्किल होती है वहां ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया जाएगा. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी.  कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि इस वर्ष पहली बार 11 अप्रेल को राज्य में टिड्डी दलों का प्रवेश हुआ था और अब तक जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर, अजमेर, पाली, बीकानेर, सिरोही एवं भीलवाड़ा जिलों में लगभग 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी का प्रभाव रहा है.

खरीफ-2019 तक के सभी बीमा क्लेम का भुगतान जून अंत तक:
यहां प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर भविष्य के लिए राज्य सरकार की ओर से योजनाबद्ध ढंग से प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि टिड्डियों के नियंत्रण एवं सर्वेक्षण के लिए 70 बोलेरो, 45 बोलेरो केम्पर यूटिलिटी वाहन, 600 ट्रेक्टर माउंटेड स्प्रेयर मय ट्रेक्टर एवं 3 हजार 200 ट्रेक्टर मय पानी के टैंकरों के उपयोग की स्वीकृति जारी की जा चुकी है. वाहनों का किराये पर संचालन के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर पौध संरक्षण रसायन उपलब्ध कराने के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. गत वर्ष की तरह इस साल भी खरीफ के लिए खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था है. मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप पात्र किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने के लिए 15 हजार क्विंटल संकर बाजरा बीज के लिए जिलेवार आपूर्ति एवं वितरण आदेश जारी किए जा चुके हैं. साथ ही 25 हजार क्विंटल मक्का बीज की व्यवस्था की जा रही है. डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि फसल बीमा योजना में खरीफ-2019 तक के सभी बीमा क्लेम का भुगतान जून अंत तक कर दिया जाएगा. 

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'आत्म निर्भर' भारत के लिए कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री ने किए ये बड़े ऐलान

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नई दिल्ली: कोरोना संकटकाल में मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का आगाज किया है. आज के ऐलान कृषि सेक्टर से जुड़े बुनियादी ढांचे पर आधारित है. यह पैकेज देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है. जानें- वित्त मंत्री की बड़ी बातें...

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1. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए सरकार एक लाख करोड़ देगी. ये एग्रीग्रेटर्स, एफपीओ, प्राइमरी एग्रीकल्चर सोसाइटी आदि के लिए फार्म गेट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए दिया जाएगा जैसे कोल्ड स्टोरेज. इससे किसान की आय भी बढ़ेगी. 

2. माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज (एमएफई) के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की योजना शुरू की है.  यह योजना पीएम के 'वोकल फॉर लोकल' मुहिम को बल देगा.

3. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, इसकी घोषणा बजट में की गई, कोरोना की वजह से इसे तत्काल लागू किया जा रहा है. मछुआरों को नई नौकाएं दी जाएंगी. 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. इससे भारत का निर्यात दोगुना बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा. अगले 5 साल में 70 लाख टन अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन होगा.

4. सीतारमण ने कहा कि जानवरों में फुट ऐंड माउथ डिजीज होता है, क्योंकि उनका टीकाकरण नहीं होता, इसलिए दूध के उत्पादन पर असर पड़ता है. अब सभी पशुओं का 100 फीसदी टीकाकरण होगा. जनवरी 2020 तक 1.5 करोड़ गाय, भैंसों का टीकाकरण किया गया. ग्रीन जोन में यह काम जारी है.

5.  फुट एंड माउथ डिजीज और ब्रुसेलोसिस के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 13,343 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

6. सीतारमण ने कहा कि 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष शुरू किया जाएगा. इससे पशुपालन से जुड़े लोगों को मदद मिलेगी. 

7.  500 करोड़ रुपये मधुमक्खी पालन पर खर्च किए जाएंगे. दो लाख से ज्यादा मधुमक्खी पालकों को इससे मदद मिलेगी.

8.  हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए 4000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. अगले 2 साल में 10,00,000 हेक्टेयर जमीन को कवर किया जाएगा.

9. ऑपरेशन ग्रीन का विस्तार टमाटर, प्याज और आलू के अलावा बाकी सभी फल और सब्जियों के लिए भी किया जाएगा.

10. एक केंद्रीय कानून आएगा जिससे किसान अपने उत्पाद को आकर्षक मूल्य पर दूसरे राज्यों में भी बेच सकें. अभी वह सिर्फ लाइसेंसी को ही बेचा जा सकता है. अगर वह किसी को भी बेच सके तो उसे मनचाही कीमत मिलेगी. हम उसे ऐसी सुविधा देंगे.

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कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ देगी सरकार- वित्त मंत्री

कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ देगी सरकार- वित्त मंत्री

नई दिल्ली: कोरोना संकटकाल में मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का आगाज किया है. इस कड़ी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज को लेकर विस्तार से जानकारी दे रही हैं. आज के ऐलान कृषि सेक्टर से जुड़े बुनियादी ढांचे पर आधारित है. 

कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए एक लाख करोड़ देगी सरकार:
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए सरकार एक लाख करोड़ देगी. ये एग्रीग्रेटर्स, एफपीओ, प्राइमरी एग्रीकल्चर सोसाइटी आदि के लिए फार्म गेट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए दिया जाएगा जैसे कोल्ड स्टोरेज. इससे किसान की आय भी बढ़ेगी. 

अलग-अलग सेक्टरों को राहत पहुंचाई जाएगी:
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था. इसके तहत अलग-अलग सेक्टरों को राहत पहुंचाई जाएगी. गुरुवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने एक राष्ट्र एक राशन कार्ड का ऐलान किया, जिसकी मदद से मजदूर देश में कहीं पर भी रहकर राशन ले सकेंगे. इसके अलावा शहरी बेघरों के लिए सस्ता घर, रेंटल घर, तीन वक्त का खाना, किसान क्रेडिट कार्ड, रेहड़ी पटरी वालों के लिए लोन जैसे बड़े ऐलान किए गए.

आज राहत पैकेज के दूसरे चरण का ऐलान करेंगी वित्त मंत्री, कृषि सेक्टर को सौगात मिलने की उम्मीद

आज राहत पैकेज के दूसरे चरण का ऐलान करेंगी वित्त मंत्री, कृषि सेक्टर को सौगात मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 20 लाख करोड़ के पैकेज के दूसरे चरण की जानकारी देश को देंगी. जानकारी के मुताबिक वित्त मंत्री आज कृषि सेक्टर और उससे जुड़ी हुई गतिविधियों को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती हैं. इसके साथ ही सप्लाई चैन को भी दुरुस्त करने के लिए मोदी सरकार बड़ी राहत दे सकती है. वहीं पहले चरण में नौकरी पेशा से लेकर छोटे उद्योगों तक राहत देने की कोशिश की गई. 

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लघु और कुटीर उद्योगों के थम चुके पहिए फिर रफ्तार पकड़ सकें:
ऐसे में आज सभी देशवासियों की नजरें पैकेज के दूसरे चरण की जानकारी पर टिकी हुई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर जब बुधवार को देश के सामने आए तो उनका एजेंडा साफ था कि नौकरी पेशा की जेब में ज्यादा पैसे हों. लघु और कुटीर उद्योगों के थम चुके पहिए फिर रफ्तार पकड़ सकें.

छोटे उद्योगों में काम करने वालों पर राहत बरसाई गई:
दरअसल, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए पीएम मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था. बुधवार को उसकी पहली किस्त का ब्योरा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया. इसमें छोटे उद्योगों में काम करने वालों पर राहत बरसाई गई है. आज राहत पैकेज के दूसरे किस्त की जानकारी निर्मला सीतारमण देंगी.

15 हजार रुपये से कम वेतन वालों का ईपीएफ अगस्त तक केंद्र देगा:
वित्त मंत्री ने बताया कि 15 हजार रुपये से कम वेतन वालों का ईपीएफ अगस्त तक केंद्र देगा. नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का योगदान सरकार कर रही है. इसमें करीब 2500 करोड़ रुपये का खर्च होगा. 

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NBFC के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की स्पेशल लिक्विडिटि स्कीम: 
निर्मला सीतारमण ने कहा कि नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के लिए 30,000 करोड़ रुपये की स्पेशल लिक्विडिटि स्कीम का ऐलान किया गया है. एनबीएफसी को 45,000 करोड़ की पहले से चल रही योजना का विस्तार होगा. आं​शिक ऋण गारंटी योजना का विस्तार होगा. इसमें डबल ए या इससे भी कम रेटिंग वाले एनबीएफसी को भी कर्ज मिलेगा.
 

कोरोना के संकट के बीच पाकिस्तान से राजस्थान में फिर टिड्डी हमला, विभिन्न स्थानों पर नियंत्रण की कवायद

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जैसलमेर: पाकिस्तान की ओर से उड़ी टिड्डियों ने एक बार फिर से चिंता पैदा कर दी है. प्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में टिड्डियां अपना आतंक फैला चुकी है. टिड्डियों का दल कई सीमावर्ती इलाको में हमला कर चुका है. ऐसे में अब टिड्डी नियंत्रण दल ने भी इनसे निपटने के लिए कमर कस ली है. पिछले वर्ष के अंत में टिड्डी दलों का हमला झेल चुके राजस्थान के सरहदी जिले एक बार फिर टिड्डी दलों के हमलों से परेशान है. राजस्थान में पिछले वर्ष के अंत में पाकिस्तान से आए टिड्डी दलों ने जम कर नुकसान किया था और सरहदी जिलों की में लाखों हैक्टेयर क्षेत्र की फसल बर्बाद हो गई थी. अब फिर एक बार राजस्थान के पाकिस्तानी सीमा से लगते जिलों पर टिड्डी दलों का प्रकोप दिख रहा है. 

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किसानों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा: 
कोरोना के कहर में ग्रामीणों क्षेत्रों में दूसरी बार टिड्‌डी दल के आने से प्रशासन के साथ- साथ किसानों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार क्षेत्र के ग्राम पंचायत बांधेवा, राजमथाई, मेकूबा, बलाड़ व धौलासर गांवों टिड्‌डी दल ने दस्तक दी. इससे किसान परेशान हैं. बांधेवा स्थित बूटे खांन की ढाणी में टिड्‌डी के आने के कारण ग्रामीणों ने अपने-अपने स्तर पर इन्हें भगाने के जतन किए. क्षेत्र में फिर से टिड्डी दल ने धावा बोल दिया हैं. पहले कोरोना वायरस ने प्रशासन व ग्रामीणों की नींद उड़ा रखी है. अब टिड्डी दलों ने भी दस्तक देकर आग में घी का काम किया है. बांधेवा, राजमथाई, मेकूबा, बलाड़ व धौलासर गांव में टिड्डी की भरमार देखने को मिली. गांवों के खेतों में टिड्डी ही टिड्डी नजर आ रही थी. इसको लेकर किसान व ग्रामीण परेशान नजर आ रहे हैं. 

भारी संख्या में टिड्डियों ने इलाके में आतंक मचा रखा: 
पड़ोसी देश पाकिस्तान के रास्ते से इलाके में पहुंची भारी संख्या में टिड्डियों ने इलाके में आतंक मचा रखा हैं. किसानों की खड़ी फसलों के साथ साथ टिड्डियां पशुधन के लिए उगे चारों को भी चट कर रही हैं. ऐसे में किसानों व पशुपालकों के लिए टिड्डियां परेशानी का सबब बनी हुई हैं. पाकिस्तान से सटे सरहदी जिले जैसलमेर में जिला कलक्टर नमित मेहता ने इस बारे में सतत् निगरानी, सर्वेक्षण एवं नियंत्रण के लिए अलग अलग स्तरीय टीमें गठित की हैं. टिड्डियों पर प्रभावी नियत्रण के लिए अलग अलग जिलास्तर पर नियंत्रण कक्ष संचालित हैं. साथ ही कृषि विभाग से जारी नबंर भी उपलब्ध करवाए गए हैं. 

टिड्डी नियंत्रण के लिए फिलहाल 10 वाहनों की उपलब्धता: 
अल्पसंख्यक मामलातए वक्फ एवं जन अभियोग निराकरण मंत्री शाले मोहम्मद ने टिड्डी नियंत्रण व कृषि अधिकारियों से कहा है कि जिले में टिड्डी प्रकोप की संभावनाओं के मद्देनजऱ विभागीय गतिविधियों को और अधिक सक्रिय करने के साथ ही जिले भर में व्यापक लोक जागरण व जन सहभागिता के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करें. केबिनेट मंत्री ने कहा कि टिड्डी नियंत्रण के लिए फिलहाल 10 वाहनों की उपलब्धता है, लेकिन विस्तृत परिक्षेत्र को देखते हुए इनकी संख्या को और अधिक बढ़ाए जाने की जरूरत है और इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे. 

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सरकार की ओर से कीटनाशकों की नि:शुल्क उपलब्धता:
उन्होंने जिले के किसानों और ग्रामीणों का भी आह्वान किया कि वे टिड्डियों के आगमन पर त्वरित गति से इसकी सूचना प्रशासन और विभाग द्वारा स्थापित नियंत्रण कक्षों पर दें ताकि समय रहते कार्यवाही संभव हो सके. उन्होंने किसानों को बताया कि सरकार की ओर से कीटनाशकों की नि:शुल्क उपलब्धता है और स्प्रे कार्य में प्रयुक्त होने वाले ट्रैक्टरों के ईंधन के लिए सरकार की ओर से समुचित धनराशि की व्यवस्था है. ऐसे में ग्रामीणों और किसानों को सरकारी प्रयासों में और अधिक सहभागिता निभाने के लिए आगे आना चाहिए. उन्होंने जिले भर के किसानों से कहा है कि वे किसी भी प्रकार की चिन्ता न करेंए सरकार पूरी तरह अलर्ट है और इस दिशा में आवश्यकतानुसार ठोस कार्य किए जाएंगे. सरकार चाहती है कि किसानों को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होना चाहिएए इसलिए अभी से प्रयास आरंभ किए जा चुके हैं. 

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