किसानों के साथ-साथ मोदी सरकार को भी कर्ज माफी की जरूरत

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/19 01:15

नई दिल्ली(सुनिल शर्मा)। देश में चुनाव जीतने के लिए सबसे हिट फार्मूले कर्जमाफी की किसानों के बाद अब भारत सरकार को भी दरकार नजर आ रही है । जी हां, हम बात कर रहे है कर्ज में डूबी भारत सरकार के दयनीय हाल के बारे में, एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी के साढ़े चार साल के कार्यकाल में भारत सरकार पर 49 फीसदी कर्ज बढ़ा है। एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कई घोषणाएं करने का मन बना रही है तो वही दूसरी ओर राजकोषीय घाटा उसकी परेशानी का सबब बना हुआ है। 

देश में इस समय चुनाव जीतने के लिए किसान कर्ज माफी का मुद्दा जोरों पर उठाया जा रहा है। हाल ही में किसान कर्ज माफी को लेकर तीन राज्यों में कांग्रेस का विजयी पताका इसका ज्वलंत उदाहरण है। पार्टियां हमेशा देश या राज्य की सत्ता को हासिल करने के लिए कई ऐसे बड़े फैसले कर लेती है जो कि देश की वित्तिय व्यवस्था को गड़बड़ा देती है। कांग्रेस के बाद लोकसभा चुनाव से पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी एक बार फिर किसानों के कर्जमाफी की तैयारी में है। वहीं आज कोलकाता में विपक्षी पार्टियों ने भी किसान कर्ज माफी की बात दोहराई। लेकिन अब भारत सरकार के वित्तिय हालात को देखते हुए लगता है कि उसे भी कर्जमाफी की दरकार नजर आ रही है। 

भारत सरकार पर हुआ 82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज
शुक्रवार को केंद्र सरकार के कर्ज पर स्टेटस का आठवां संस्करण जारी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बीते साढ़े चार सालों में भारत सरकार पर कर्ज 49 फीसदी बढ़कर 82 लाख करोड़ रुपये हो गया। वित्त मंत्रालयों के आंकड़ो पर नजर डाले तो जून, 2014 में सरकार पर कुल कर्ज 54,90,763 करोड़ रुपये था, जो सितंबर 2018 में बढ़कर 82,03,253 करोड़ रुपये हो गया। ऐसे में इस बात को कहने में कोई अतिशयोक्ति नही है कि किसानों के बाद भारत सरकार को भी कर्जमाफी की सख्त जरूरत है। 
 

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