गुवाहाटी पी चिदंबरम बोले- मोदी सरकार विनाशकारी, प्रधानमंत्री को सिर्फ चुनाव हारने का है डर

पी चिदंबरम बोले- मोदी सरकार विनाशकारी, प्रधानमंत्री को सिर्फ चुनाव हारने का है डर

पी चिदंबरम बोले- मोदी सरकार विनाशकारी, प्रधानमंत्री को सिर्फ चुनाव हारने का है डर

गुवाहाटी: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को ‘‘विनाशकारी’’ बताते हुए गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को केवल एक चीज ‘‘चुनाव हारने’’ का डर है और उन्हें अपनी पार्टी के सहयोगियों सहित किसी और चीज की परवाह नहीं है. कांग्रेस की असम इकाई के कार्यकर्ताओं के लिए यहां तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश तेजी से ‘‘नीचे जा’’ रहा है और अगर मौजूदा सरकार बनी रहती है तो देश ‘गंभीर संकट’ में होगा.

उन्होंने कहा कि यह एक विनाशकारी सरकार है. अपनी बड़ी विफलताओं को छिपाने के लिए, इस सरकार ने धर्म का सहारा लिया है. धर्म का पक्ष लेने का एक और कारण चुनाव जीतने के लिए देश को धार्मिक आधार पर बांटना है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मोदी को किसी भी चीज -अपनी पार्टी, सांसदों, मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, न्यायाधीशों, ईश्वर या किसी और का कोई डर नहीं है. चिदंबरम ने कहा कि उन्हें केवल एक चीज का डर है - चुनाव हारने का. किसी भी परिस्थिति में वह चुनाव हारना नहीं चाहते हैं. मुझे खुशी है कि उन्हें कम से कम कुछ डर तो है. देश को बचाने का एकमात्र तरीका हर चुनाव में मोदी को हराना है. कांग्रेस नेता ने कहा कि चीन के भारतीय क्षेत्र पर कब्जा करने और सीमा पर गांवों के निर्माण के साथ देश के लिए और अधिक खतरे आने वाले हैं, कश्मीर में युवा आतंकवाद की ओर लौट रहे हैं और अर्थव्यवस्था गिर रही है.

वर्ष 1977 में जबरदस्त चुनावी हार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुनरुत्थान का उल्लेख करते हुए, पूर्व केंद्रीय गृह और वित्त मंत्री ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एक बार फिर से जीतने के बारे में आश्वस्त होने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि हम 1996, 1998, 1999 में भी हार गए थे. 1999 में, हम एक करिश्माई नेता, अच्छे वक्ता और स्वयंसेवक अटल बिहारी वाजपेयी से हार गए थे. लेकिन हम सोनिया गांधी और कांग्रेस की राज्य इकाइयों की कड़ी मेहनत के कारण 2004 में फिर से उनसे जीत गए. चिदंबरम ने कहा कि इसलिए, मैं आपको बताना चाहता हूं कि पिछले साढ़े सात वर्षों में यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी अजेय या अपराजेय हैं. हमें विश्वास करना चाहिए कि हमारा (राजनीति का) विचार सही है और उनका (मोदी का) गलत है. अगर आप खुद को विश्वास दिला पायेंगे, तभी आप दूसरों को विश्वास दिला पायेंगे. सोर्स- भाषा

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