मोरेल बांध ओवरफ्लो होने से क्षेत्र के लोगों में उत्साह, प्रतिदिन उमड़ रही हजारों की भीड़

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/21 02:14

लालसोट(दौसा): कहावत है बिन पानी सब सून, और जब लंबे इंतजार के बाद चारों और पानी को देखे तो निश्चित रुप से ही हमारा मन भी खुशियों झूम उठता है. मन में कई तरह की उम्मीदें भी हिलोरे मारने लागती है. कुछ यही नजारा है इन दिनों दौसा जिले के लालसोट उपखण्ड के मोरेल बांध पर. 

21 साल बाद पहली बार लबालब हुआ बांध: 
दौसा जिले के लालसोट उपखण्ड क्षेत्र में मौजूद मोरेल बांध 21 साल बाद पहली बार लबालब हुआ है, पूरे ऐशिया महाद्वीप में सबसे बड़ा कच्चा डेम माने जाने वाले इस मोरेल बांध की कुल भराव क्षमता 30 फीट 5 ईंच है और इस बार क्षेत्र में हुर्ई जोरदार बारिश से यह बाध सन 1998 के बाद पहली बार लबालब हो गया है. यह बांध पूरा भरने के बाद इस बांध पर पिछले तीन दिनों से चादर चल रही है. बांध पूरा भरने पर दौसा व सवाई माधोपुर जिले के ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. प्रतिदिन बांध पर हजारों लोग इस भव्य नजारे को देखने के लिए पहुंच रहे है.

बांध का रख रखाव दौसा जिला प्रशासन के जिम्मे:  
बांध की वेस्ट वेयर से गुजर रहे पानी में दिन भर हजारों लोगों को मौज मस्ती भी करते देखा जा रहा है. मोरेल बांध दौसा एवं सवाई माधोपुर जिले के सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों के लाईफ लाईन माना जाता है. बांध का निर्माण कार्य सन 1948 में शुरू होकर चार साल बाद 1952 में पूरा हुआ था. बांध का कैचमेंट क्षेत्र दौसा जिले में होने से इसका रख रखाव भी दौसा जिला प्रशासन के जिम्मे है. इस बांध से दो नहरों द्वारा हर साल रबी की फसलों के लिए नहरों से पानी छोड़ा जाता है. दौसा जिले से गुजरने वाली पूर्व नहर कुल 6705 हैक्टियर भूमि को सिंचाई करती है और सवाई माधोपुर जिले से गुजरने वाली मुख्य नहर से 12 हजार 388 हैक्टियर भूमि पर सिंचाई होती है. 

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