Mother's Day Special: लवकुश संस्थान बना मासूमों का सहारा, जन्म देने वाली मां से बढ़कर मिल रहा प्यार

जोधपुर: आज मदर्स-डे है, हर कोई अपनी मां को प्यार, मान सम्मान और अपनेपन के रिश्ते से सींचकर गौरव की अनुभूति कर रहा है और बदले परिवेश में माताएं भी इसलिए खुश है कि भागती दौडती यांत्रिक जिंदगी में संतानों को अपनी जन्मदात्री यानि मां याद तो है, लेकिन जोधपुर के लवकुश संस्थान में कुछ इंसानों की गलतियों से पहुंचने वाले मासूमों की मां होते हुए भी मां नहीं है, उन्हे पाल पोसकर बडा करती है तो वे माएं करती है जिनकी अपनी भी संताने है लेकिन ये वो माएं है जो अपनी संतानों से अधिक इन बिन मां बाप की संतानों को प्यार और दुलार देती है जिससे यह बच्चे जब हंसते और मुस्कुराते है तो इन मांओं की खुशी का कोई ठिकाना नही रहता.

ताजुब्ब तो इस बात का है कि लवकुश संस्थान के संचालक राजेन्द्र सिंह परिहार वैसे तो पुरूष है लेकिन इतने बच्चों के लालन पालन का जिम्मा उनके सिर पर है. इसलिए वे पिता के साथ यहां मां का भी रोल अदा करते है तो ऐसे में जो उन्हे खुशी मिलती है वह शब्दों में विवेचित नहीं की जा सकती. राजेन्द्र परिहार बताते है कि जन्म के दो घंटे के बाद हम तक पहुंचने वाले इन बच्चों की जिंदगी सवारने का जो दायित्व ईश्वर अपरोक्ष रूप से हमे देता है तो ऐसे में हम भी उसी तरह से इन बच्चों को पालते है जिस तरह खुद के बच्चों को पालते आए है.

परिहार के साथ इस लवकुश संस्थान में चार ऐसी भी माएं है जिनके घरों में संताने है मगर उन संतानों से अधिक प्यार, दुलार और ममता जब इन बच्चों को देती है तब तस्वीर के नजारे ही कुछ और होते है. संस्थान द्वारा 1464 बच्चे अब तक यहां से गोद भी दिए है. साथ ही साथ 20 बच्चियों को हमने पढ़ा लिखाकर उनके अपने पैरों पर खड़ा करने के साथ ही एक अच्छे घर में उनका विवाह भी कर दिया है. फर्स्ट इंडिया न्यूज संवाददाता राजीव गौड ने लवकुश संस्थान पर मदर्स डे पर जब जायजा लिया तो हंसते खेलते बच्चों के साथ राजेन्द्र सिंह परिहार और ममत्व से लबरेज महिला शक्ति जिस कदर प्यार और स्नेह में खोई हुई नजर आई वे दृश्य अपने आप में बहुत ही अनुठा नजर आया. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए राजीव गौड़ की रिपोर्ट

और पढ़ें