कर्बला में हुआ था हज़रत मोहम्मद के नवासे का क़त्ल, जानिए क्यों मनाते हैं मुहर्रम?

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/10/01 10:46

रविवार को देशभर में मुस्लिम धर्मावलंबी मुहर्रम का त्योहार मना रहे हैं| इस्लाम के 4 पवित्र महीनों में ये भी एक माना जाता है| इस्लामी साल के पहले महीने के रूप में इसकी अहमियत है और इसे हिजरी भी कहते हैं| इराक में 680 ईस्वी में यजीद नाम का क्रूर बादशाह हुआ करता था| मोहम्मद-ए-मुस्तफा के नाती हजरत इमाम हुसैन ने इसके खिलाफ जंग लड़ा| इस जंग में हुसैन की जीत तो हुई, लेकिन उन्होंने मानवता को बचाने में अपने को कुर्बान कर दिया|

इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर कर्बला नाम की जगह पर यजीद ने हुसैन और उनके 72 साथियों को मार दिया| यहां तक कि उनके 6 महीने के बेटे हजरत अली असगर तक को नहीं बख्शा गया| इस दिन मुहर्रम के महीने की 10 तारीख थी| मुस्लिम धर्मावलंबी मुहर्रम के महीने को गम के महीने के रूप में मनाते हैं| हजरत मोहम्मद ने इसे अल्लाह का महीना कहा था| मुहर्रम के दिन शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनते हैं| वहीं सुन्नी समुदाय के लोग रोजे रखते हैं|

माना जाता है कि मुहर्रम के 9 दिनों में रोजे रखने से 2 साल के गुनाह माफ हो जाते हैं| मुहर्रम के दिन मुस्लिम समुदाय ताजिए निकालते हैं| ये जुलूस की शक्ल में होता है| कई लोग आज के दिन खुद को यातना देते हैं और अपनी पीठ पर कोड़े भी बरसाते हैं| वे हुसैन और उनके साथियों को दी गई यातना को महसूस करने के लिए ऐसा करते हैं|

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