जननी सुरक्षा योजना की उड़ी धज्जियां, अंधेरे में विभाग तो 'दीया' ढूंढते ग्रामीण

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/24 12:08

डूंगरपुर। जननी शिशु सुरक्षा योजना सहित कई अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए राज्य सरकार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। लेकिन विभागीय उदासीनता व लापरवाही के चलते प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में आज भी बड़ी संख्या में घर पर प्रसव हो रहे हैं। 
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से जननी शिशु सुरक्षा योजना, शुभ धनलक्ष्मी योजना जैसी कई योजनाए प्रदेश के चलाई जा रही है लेकिन इसके बावजूद भी डूंगरपुर जिले में सबकुछ निशुल्क होते हुए भी घरेलू प्रसव हो रहे हैं। 

पिछले तीन सालों के विभाग के आंकड़े खुद विभागीय उदासीनता व लापरवाही की पोल खोल रहे हैं। वर्ष 2016 से लेकर जनवरी  2019 तक जिले में 5063 ऐसे प्रसव हैं जो कि घरों में हुए हैं। जिसमें चालु वित्तीय वर्ष 2018-19 की बात करें तो डूंगरपुर जिले में अप्रैल से लेकर फ़रवरी माह तक 28 हजार 3 प्रसव तो संस्थागत हुए लेकिन 1200 प्रसव घरों में हुए हैं।

जानिए पिछले तीन  सालों में कितने प्रसव घरो में हुए          

वर्ष   

  घरेलू प्रसव की संख्या

2016-17  

  2163

2017-18  

   1700

2018-19

   1200

कुल

   5063 घरो में प्रसव हुए 

 

इन आंकडों को देखकर आप समझ ही गए होंगे कि सरकार की नि:शुल्क योजनाओं के बाद भी आखिर किस तरह सरकारी मशीनरी की वजह से ये योजनाएं सफल नही हो पाती। खैर जब इस मामले में डूंगरपुर जिले के विभाग के उच्च अधिकारी डूंगरपुर सीएमएचओं से पूछा गया तो उन्होंने भी घरों में हो रहे प्रसव की बात को स्वीकारा और कहा इस संबंध में लोगों को जागरूक करने के प्रयास विभाग द्वारा किए जा रहे हैं।

बहराल, डूंगरपुर जिले का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग घरेलू प्रसवों के आंकड़ो को जागरूकता के माध्यम से आने वाले समय में कम करवाने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों के ये दावें कब पूरे होंगे ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो इतना ही कहना होगा कि डूंगरपुर जिले का स्वास्थ्य विभाग सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करने में नाकाम साबित हो रहा है।

          पुनीत चतुर्वेदी फर्स्ट इंडिया न्यूज़ डूंगरपुर 

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