मुकुल रॉय के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, विधायक के रूप में इस्तीफा दें: बंगाल भाजपा

मुकुल रॉय के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, विधायक के रूप में इस्तीफा दें: बंगाल भाजपा

कोलकाता: भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय की तृणमूल कांग्रेस में वापसी पर शुक्रवार को भगवा खेमे में मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. जहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि इसका संगठन पर कोई असर नहीं होगा, वहीं पूर्व सांसद अनुपम हाजरा ने दावा किया कि गुटबाजी की राजनीति से पार्टी को नुकसान हो रहा है. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने रॉय को अपनी तरफ से बधाई देते हुए कहा कि उन्हें तत्काल भाजपा के सभी पदों को छोड़ देना चाहिए.

मजूमदार ने कहा कि मुकुल बाबू दिग्गज नेता हैं. वह बंगाल की राजनीति का जाना पहचाना चेहरा हैं. हम उन्हें नयी पारी के लिए शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन क्या उन्हें भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और अन्य सभी पदों को तत्काल नहीं छोड़ देना चाहिए? क्या उन्हें विधायक के तौर पर इस्तीफा नहीं देना चाहिए क्योंकि वह कमल के निशान पर सीट जीते हैं. भाजपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का ओहदा रखने वाले मुकुल रॉय अपने बेटे शुभ्रांशु के साथ शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस में लौट गए. पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं ने यहां उनका स्वागत किया. वह 2017 में भाजपा में शामिल हो गए थे.

और भी कई नेताओं के भाजपा में लंबे समय तक नहीं टिक पाने के रॉय के दावों पर कटाक्ष करते हुए मजूमदार ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि क्या वह अपने मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दल के सदस्यों को रास्ते से हटाने की तृणमूल कांग्रेस की नयी राजनीति की ओर इशारा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के आतंक के कारण भाजपा के कम से कम 18 हजार कार्यकर्ताओं को अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा. माल्दा जिले में आदिवासी महिलाएं बेघर हो गई हैं. महिलाओं पर हमलों की अन्य घटनाएं भी घटी हैं, जैसा कि भारत में कहीं नहीं होता. पश्चिम बंगाल में ऐसी घटनाएं सामने नहीं आ पा रही हैं. शायद विद्वत वर्ग के पास विरोध रैलियां निकालने के लिहाज से मोमबत्तियां खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे हैं.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रॉय के फैसले से उनकी पार्टी को कुछ नुकसान होगा क्योंकि साढ़े तीन साल पहले उनके भाजपा में आने से पार्टी को क्या फायदा हुआ, उसका ही नहीं पता. घोष ने कहा कि इस समय हमें राज्य में हिंसा जैसे और गंभीर मुद्दों की चिंता है. हमें अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की चिंता है, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता निशाना बना रहे हैं. हाजरा ने मुकुल रॉय के तृणमूल कांग्रेस में लौटने से कुछ घंटे पहले कहा कि भाजपा में गुटबाजी की राजनीति की वजह से ऐसा हो रहा है. उन्होंने ट्वीट किया कि समय आ गया है कि भाजपा की प्रदेश इकाई इस तरीके पर रोक लगाए और नेताओं की योग्यता के हिसाब से उनका उपयोग किया जाए. हाजरा भी 2018 में तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आ गये थे. उन्होंने साफ किया कि वह हर परिस्थिति में भाजपा में रहेंगे.

उन्होंने कहा कि भाजपा में एक या दो नेताओं को ज्यादा तवज्जो दी गयी, वहीं बाकी की अनदेखी की गयी और इसलिए ये हालात बने हैं. पूर्व सांसद ने कहा कि उन शाही सवारियों का भी अता-पता नहीं है, जिन्होंने चार्टर्ड विमान से उड़ान भरी थी. माना जा रहा है कि वह तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए राजीब बनर्जी, वैशाली डालमिया और प्रबीर घोषाल की बात कर रहे थे, जो कुछ महीने पहले विशेष विमान से दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मिलने गए थे.

प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं का मानना है कि रॉय और सब्यसाची दत्ता समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतनी अहमियत नहीं दी गई, जितनी दी जानी चाहिए थी, वहीं शुभेंदु अधिकारी और अभिनेता-नेता मिथुन चक्रवर्ती जैसे कुछ नेताओं को सारी जिम्मेदारी दे दी गई. पार्टी की अहम चर्चाओं में शामिल नहीं किये जाने का संकेत देते हुए हाजरा ने कहा कि उम्मीद है कि प्रोटोकॉल के मुताबिक प्रदेश भाजपा की बैठकों में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा.

इस बीच, भाजपा के राज्य महासचिव सायंतन बोस ने कहा कि आठ जून को एक अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति बनाई गई है, जो कुछ नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पार्टी विरोधी टिप्पणियों का संज्ञान लेगी. भाजपा प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने भी कहा कि पार्टी के भीतर चर्चा किये बिना अपने विचारों को सार्वजनिक करने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने कहा कि हम इस तरह की टिप्पणियों को मंजूर नहीं करते क्योंकि ऐसी टिप्पणियों को डालने वालों ने पार्टी में चर्चा नहीं की है. शीर्ष नेतृत्व इस तरह की पोस्ट पर संज्ञान ले रहा है और जरूरी कार्रवाई करेगा.

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