VIDEO: बाघ का वीडियो वायरल होने के बाद सकते में मुकंदरा प्रशासन, इन खामियों को करना होगा दूर

Nirmal Tiwari Published Date 2019/08/19 09:14

कोटा: मुकंदरा के बाघ का वीडियो वायरल होने के बाद मुकंदरा बंद प्रशासन सकते में आ गया है. मुकुंदरा में बाघों के क्षेत्र के हिसाब से प्रे बेस कम होने का मुद्दा इन दिनों गरमाया हुआ है. दरअसल वन विभाग मुकंदरा में पर्यटन शुरू करने की योजना बना रहा है लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पहले तमाम खामियों को दूर किया जाए तो बाघों के लिए बेहतर होगा. 

1. मुकुन्दरा में फिलहाल 750 स्क्वायर किलोमीटर के जंगल में 4 बाघों के एरिया के हिसाब से प्रॉपर प्रे बेस नहीं है तो टूरिज्म शुरू करके आप बाघों को क्या कैटल पर फीड करते हुए दिखाओगे.
2. प्रॉपर ट्रैक एरिया भी अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है. 
3. नेचर गाइड को ट्रेनिंग के लिए अभी नियोजित किया जाना बाकी है. बिना नेचर गाइड के पर्यटकों को पार्क में भेजना एन. टी.सी.ए. गाइडलाइन्स के खिलाफ है.
4. नई जिप्सी का प्रोडक्शन जहां मारुति नें बंद कर दिया है तो कौनसे और कैसे व्हीकल पार्क में चलाए जायेंगें ये भी कुछ तय नहीं है. 
5. पार्क में कई एंट्री पॉइंट बने हुए हैं पर समान रूप से टूरिज्म शुरू करने के लिए दर्रा कोटा और नौलाव गागरोन झालावाड़ वाले गेट खोले जा सकते हैं तो ये ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट भी होने चाहिए. परन्तु कई अन्य स्थानों से भी समय समय पर पार्क में एंट्री कर रहे हैं जिन पर कोई रोक टोक विभाग की तरफ से नहीं है.  
5. नाईट में पार्क में जाना एक गैर क़ानूनी कृत्य है परंतु फेसबुक पर फ़ोटो डाल कर लाइक बटोरने के लिए भी कई लोग इस बात से गुरेज नहीं कर रहे हैं. बाघ जिए या मरे पर हमारे फ़ोटो अच्छे आने चाहिए बस.  
6. अभी मुकुन्दरा प्रशासन के पास कोई प्रॉपर टूरिज्म पॉलिसी भी नहीं है. ऐसे में देखना ये है कि बाघों की सुरक्षा को दरकिनार करके अगर मुकुन्दरा में पर्यटन शुरू किया जाता है तो ये न केवल बाघों के साथ खिलवाड़ होगी बल्कि ऐसे में किसी बाघ के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो टूरिज्म का प्लान धरा का धरा रह जायेगा. 

जहां ये बाघ विचरण कर रहे हैं वहां एरिया के हिसाब से बाघ के नेचुरल प्रे बेस की कमी है और बाघ जीवन यापन के लिए कैटल पर आश्रित है, जिसमें से कैटल किल की कई खबरें तो बाहर आ जाती है परंतु कई खबरें बाहर नहीं आ पाती. इससे लोगों में भी ये भ्रम बना रहता है कि मुकुन्दरा के बाघ बड़े इत्मीनान से जंगल में रह रहे हैं. मज़े की बात तो यह है कि जिस पगडंडी पर ये बाघ चल कर जा रहा है वो कोई टूरिस्ट जिप्सीयों के लिए बनाया गया ट्रैक नहीं ये अंदर बसे गांवों के लोगों के आने जाने का रास्ता है. दूसरी बड़ी बात ये है कि कई प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा मुकुन्दरा के प्रशासन पर लगातार ये दबाव बनाया जा रहा है कि मुकुन्दरा को टूरिज्म के लिए खोलो. इस बात में ऐसे लोगों का निजी फायदा हो सकता है परंतु बाघों के नज़रिए से कतई उचित नहीं है. 

गावों का विस्थापन भी पूरी तरह से नहीं हुआ: 
फिलहाल मुकुन्दरा में एनक्लोजर एरिया के बाहर जो बाघ घूम रहे हैं और वह एरिया काफी बड़ा है एवं गावों का विस्थापन भी पूरी तरह से नहीं हुआ है. वहीं एरिया के हिसाब से नेचुरल प्रे बेस की भी कमी है जिसे मुकुन्दरा प्रशासन ने खुद स्वीकार किया है. वन्यजीव एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाघ जीतना कैटल यानी मवेशियों पर अपना पेट भरने के लिए डिपेंड रहेगा उतना ही उसके नेचुरल शिकार करने की प्रक्रिया में शिथिलता आएगी और ये मानव टाइगर कॉन्फ्लिक्ट का भी एक बड़ा कारण हो सकता है.

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