कल से शुरू होगी जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों और चना खरीद

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/03 01:30

नागौर। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद भी किसानों की समस्याओं के समाधान नहीं हो रहा है। नोटिफिकेशन के नही मिल पाने के चलते एक अप्रैल से शुरू होने वाली न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों और चना की खरीद अभी तक शुरू नहीं हो पाई हैं। यही नहीं इससे पहले किसानों की हिमायती होने की बात कहने वाली कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों व चना बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्योंकि राजफैड ने मात्र दो दिन पंजीकरण प्रक्रिया चालू रखने के बाद बंद कर दी, जिससे जिले सहित प्रदेशभर के हजारों किसान टोकन लेने से वंचित रह गए।  

अधिकारियों के मुताबिक आगे से अधिकृत सूचना आने के बाद कल  या परसो से सरसों व चने की एमएसपी पर सरकारी खरीद शुरू होनी है, और प्रत्येक किसान से अधिकतम 25 क्विंटल सरसों व चने की खरीद की जाएगी। इसमें सरसों की एक लाख 98 हजार 275 क्विंटल तथा चने की 22 हजार 700 क्विंटल खरीद होगी, जबकि दूसरी तरफ उत्पादन की दृष्टि से देखें तो इस बार रबी में जिलेभर में सरसों की बुआई 38 हजार 500 हैक्टेयर में हुई है।  सरसों का पिछले पांच साल का औसत उत्पादन देखें तो प्रति हैक्टेयर 11 क्विंटल 10 किलो है। इसके हिसाब से इस बार औसत उत्पादन 4 लाख 27 हजार 350 क्विंटल होगा। इसी प्रकार जिले में चने की बुआई 10 हजार 800 हैक्टेयर में हुई है। 

चने का पिछले पांच साल का औसत उत्पादन 9 क्विंटल 12 किलो रहा है, इसके हिसाब से इस बार चने का कुल उत्पादन 98 हजार 496 क्विंटल होगा। ऐसे में यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जहां जिले में करीब 5 लाख 25 हजार क्विंटल से अधिक सरसों व चने का उत्पादन होगा, वहां सरकार मात्र 2 लाख 20 हजार 975 क्विंटल की खरीद करेगी। नागौर जिले के दस केन्द्रों पर सरसों व चने की समर्थन मूल्य पर खरीद की जा रही है। इसमें कुचामन, खींवसर, गच्छीपुरा, जायल, डेगाना, डीडवाना, नागौर, परबतसर, मेड़ता एवं मेड़ता प्रोजेक्ट (तिलमसंघ) को खरीद केन्द्र बनाया गया है। सभी केन्द्रों पर सरसों व चने की खरीद होगी। 

गौरतलब है कि बीते साल मूंग की एमएसपी खरीद के लिए तीन दिन पंजीकरण होने के बाद राजफैड ने पंजीयन प्रक्रिया बंद कर दी थी, जिसके बाद काफी विरोध प्रदर्शन हुए और राजफैड ने बीच-बीच में पंजीयन प्रक्रिया चालू कर थोड़ी राहत दी, लेकिन कई किसान अपनी उपज सरकारी मूल्य पर नहीं बेच पाए। यही स्थिति सरसों व चने की खरीद में होती नजर आ रही है। जिले के मात्र 8 हजार 116 किसानों का पंजीयन हो पाया है, जबकि सरसों व चने की बुआई करने वाले किसानों की संख्या करीब 12 से 15 हजार के बीच है। नागौर कृषि मंडी सचिव यशपाल चौधरी का कहना है कि उच्चाधिकारियों से मिले निर्देशों के अनुसार सरसों व चने की खरीद की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 

...नरपत ज़ोया संवाददाता 1st इंडिया न्यूज नागौर

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