VIDEO: जल, ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर NGT सख्त

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2019/05/17 09:36

जयपुर: जल, ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर 1 माह पूर्व एनजीटी की ओर से जताई गई चिंता के बाद अब मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने बैठक लेकर इस बारे में मशीनरी को हरकत में आने के निर्देश दिए हैं. खासतौर पर प्लास्टिक वेस्ट और औद्योगिक कचरे के निस्तारण के बारे में तुरंत कार्ययोजना पेश करके अमल करने के निर्देश दिए गए हैं. 

एनजीटी में 16 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान अलग-अलग पहलुओं को लेकर राज्य सरकार को कार्य करने के निर्देश दिए गए थे. अब इस पर कितना अमल हुआ है और कितना बाकी है इसे लेकर मुख्य सचिव डी बी गुप्ता ने आज सचिवालय में मामले से जुड़े तमाम अधिकारियों की अहम बैठक ली. इसमें उन्होंने खासतौर पर प्लास्टिक वेस्ट के निस्तारण को लेकर क्या काम किया गया और आगे की पूरी क्या कार्य योजना है और उस पर कैसे अमल में लाया जाएगा इसकी रिपोर्ट ली.

- औद्योगिक कचरे के निस्तारण नदियों में प्रदूषित पानी के बहाव जल को परिशोधित करके उपयोग में लाना सीईटीपी बनाने सहित कई विषयों को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली।

यह हुआ है अब तक
- सॉलिड वेस्ट के लिये सरकार नए प्लांट लगाने जा रही है।
-वहीं राज्य में 3 जिले,3 शहर और 3 गांवों को एक प्रोजेक्ट के तहत चयन किया है जिनमे जलस्रोतों को अतिक्रमण से लेकर प्रदूषण से मुक्त करने का प्रयास जारी है। -जयपुर, कोटा और सीकर जिले का चयन किया गया है।
-अरावली में सेटेलाइट ईमेज से अवैध खनन रोकने में मदद मिली है।
-सांभर लेक के मामले में NGT ने चिंता जतायी है हम बेहतर करने का प्रयास करने का सीएस ने आश्वासन दिया था।

1 माह पूर्व एनजीटी ने यह कहा था
 - अवैध खनन रोकथाम मामले में प्रगति से NGT संतुष्ट नहीं.
- औद्योगिक कचरा व मेडिकल वेस्ट निस्तारण में काम बाकी.
- नियमित मॉनिटरिंग के लिए दिए निर्देश रोकथाम के लिए अलग से सेल गठित करना बाकी.
- वायु, नदी,औद्योगिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए राज्य सरकार  के किए कामों को रखा गया था एनजीटी के सामने.
-  उन कदमों की एनजीटी ने की थी प्रशंसा

ठोस कचरा निस्तारण के प्रोजेक्ट के तहत राज्य सरकार 3 जिले, 3 शहर और 3 गांवों का चयन कर उन्हें प्रदूषण मुक्त करने का टास्क है.
एनजीटी ने राजस्थान की रिपोर्ट ठीक बताई लेकिन अरावली में अवैध खनन ठीक नहीं माना था इसे लेकर भी बैठक में मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए तमाम कार्य पालना करने के निर्देश दिए.

एनजीटी में हुई पेशी में अवैध खनन और उससे हुए पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता जाहिर की,,,,
बेंच ने राज्य सरकार को सांभर लेक को लेकर योजना बनाने को भी कहा था,,,बेंच ने प्रदूषण की वजह से होने वाली मौतो को हत्या बताते हुए की प्रदूषण से होने वाले नुकसान को क्रिमिनल ऑफेंस घोषित कर सज़ा देने की जरूरत बताई थी.

सुनवाई के दौरान NGT के सदस्य ने सांभर लेक की बदहाल व्यवस्था पर सवाल खड़े किये,,,
सदस्य ने अपने निजी अनुभव बताते हुए किया सांभर लेक की जमीनी हकीकत अधिकरियो को भी नही है, उन्हें ये भी नही पता कितने खसरो में लेक है और कौन सा खसरा कहा है.

यह की थी तल्ख टिप्पणी
देशभर में सॉलिड वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट और  बायो मेडिकल वेस्ट से प्रदूषित हो रहे पर्यावरण को बचाने के लिए NGT ने जनवरी 2019 में देश के सभी राज्यो और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार को 12 बिन्दुओ पर पालना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये थे,

-इस आदेश की पालना में राज्य के मुख्य सचिव डी बी गुप्ता ने 16 अप्रैल को NGT में पेश होकर सॉलिड वेस्ट के निस्तारण के लिये किये जा रहे प्रयासों की बिंदुवार जानकारी दी थी।

- जस्टिस आदर्शकुमार गोयल की बेंच ने राजस्थान सरकार की रिपोर्ट को ठीक तो बताया लेकिन उसमें बेहतर प्रयास करने की जरूरत बताया.

जस्टिस आदर्शकुमार गोयल ने मुख्य सचिव से कहा कि वे नही चाहते कि हर सरकार के मुखिया को NGT बुलाया जाये लेकिन हम उन्हें यहां बुलाकर इस मुद्दे की गंभीरता को समझाना चाहते है,,,,उन्होंने मुख्य सचिव से कहा था कि आप संविधान को लागू करने में राज्य के सबसे प्रथम व्यक्ति है और यह आपकी जिम्मेदारी है.

सरकार के मुखियाओं को NGT बुलाने का उनका मकसद भी सिर्फ इतना है कि भविष्य में आने वाली गंभीर समस्या को हम गम्भीरता से नहीं तो आने वाली पीढ़ियों के पास कुछ नही बचेगा.

बैठक में आज एनजीटी निर्णयों को लेकर विभागवार कितनी हुई कार्यपालना यह समझने की कोशिश की गई. नदी सफाई योजना की क्रियान्विति,ध्वनि के स्तर की RSPCB द्वारा मॉनिटरिंग की स्थिति,ठोस कचरा,प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में विभागों के आपसी समन्वय और जिम्मेदारी को लेकर भी विचार हुआ. बैठक में प्रमुख सचिव श्रेया गुहा प्रमुख सचिव संदीप वर्मा सचिव नवीन महाजन सिद्धार्थ महाजन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. 

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