नाग पंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग आज, इन बातों का रखें ध्यान

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/05 08:49

जयपुर: श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है. इस बार शिव भक्तों के लिए नाग पंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग दशकों में बाद आया है. माना जाता है कि सोमवार और नाग पंचमी एक साथ आने से सोमवार का व्रत रखना और नाग पंचमी की पूजा दोनों का महत्व बढ़ जाता है. ऐसे में आज पूजा करने से भोलेनाथ के भक्तों पर विशेष कृपा बरसती है. यह दिन जन्म कुंडली में सर्प दोष तथा राहु केतु की शांति के निवारण बहुत ही उत्तम माना गया है. नाग पंचमी पर पूजा अर्चना करके जीवन की सभी मुश्किलों को बहुत आसानी से दूर किया जा सकता है.

नाग पंचमी पर बरतें यह सावधानियां: 
शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पूर्णा तिथि होती है इस दिन संयोगवश सोमवार और नाग पंचमी होने से इस दिन की महत्वता बढ़ जाती है. इस दिन हो सके तो कहीं पर भी जमीन की खुदाई ना करें तथा छोटे जीव जंतुओं की रक्षा करने का प्रयत्न करें. बीमार पशु पक्षियों को हो सके तो अस्पताल तक पहुंचाने की कोशिश करें तथा पूजा पाठ में शुद्ध सामग्री ही भगवान शिव को अर्पण करें. 

इस वजह से होती है नागों की पूजा:
कई पौराणिक कथाओं में नागों को भगवान शिव का गण माना गया है. साथ भगवान विष्णु के शेषनाग की शय्या पर विराजमान होने से विष्णु का भी सेवक माना गया है. ऐसे में नागों को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाना वर्जित माना गया है. 

पूजा विधि:
गृह-द्वार के दोनों तरफ गाय के गोबर से सर्पाकृति बनाकर अथवा सर्प का चित्र लगाकर सुबह उन्हें जल चढ़ाया जाता है. इसके साथ ही उन पर घी-गुड़ चढ़ाया जाता है. शाम को सूर्यास्त होते ही नाग देवता के नाम पर मंदिरों और घर के कोनों में मिट्टी के कच्चे दिए में गाय का दूध रखा जाता है. भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार माना गया है. 
 

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