नागौर के प्रसिद्ध रामदेव पशु मेले के वजूद पर संकट का साया

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/05 05:53

नागौर। नागौर का पशु मेला देशभर में अपना एक अलग ही महत्व रखता हैं। इस मेले में नागौरी नस्ल के पशु कभी अपनी एक विशेष पहचान रखते थे जिसे खरीदने के लिए प्रदेश के बाहर से भी पशुपालक मेले में आया करते थे, लेकिन इस साल ना तो बाहर के पशुपालक मेले में आए और ना ही नागौरी नस्ल के बछड़े मेले में दिखे। 

श्री रामदेव पशु मेले का उद्घाटन आज जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव के मुख्य आतिथ्य में हुआ। उद्घाटन में बतौर अतिथि नागौर जिला पुलिस अधीक्षक गगनदीप सिंगला, उपखंड अधिकारी मुरारी लाल शर्मा, नागौर पंचायत समिति के प्रधान ओम प्रकाश सेन की मौजूदगी में विधिवत झंडारोहण करके मेले का आगाज किया गया।  ऐतिहासिक मेले के उद्घाटन में नागौर पंचायत समिति के प्रधान ओम प्रकाश सेन ने मेले के खत्म हो रहे वजूद को लेकर चिंता जाहिर की, वहीं जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने भी चिंता जाहिर करते हुए ऐतिहासिक मेले के वजूद को दोबारा जिंदा रखने के लिए उचित कदम उठाने की बात कही। 

नागौरी नस्ल के गोवंश, नागौरी नस्ल के बैल पूरे देश में अपनी अनूठी पहचान के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब इस मेले की रौनक बीते 10 सालों में कम होती जा रही है साथ ही मेले के वजूद पर संकट गहराता जा रहा है। बीते कुछ वर्षो में पशुओं की आवक कम होती जा रही है। अब सबको मिलकर इसे वापस जिंदा रखने के लिए प्रयास करने होंगे। पिछले कुछ वर्षों से तीन साल से कम उम्र के बछड़े के प्रदेश से बाहर ले जाने पर रोक लगी होने से भी नागौरी नस्ल के बछड़े और उनके खरीददारो की तादाद कम होती जा रही है जिससे मेले की रौनक कम होने लगी है। 

मेले को लेकर नागौर प्रधान ओम प्रकाश सैन का कहना है की सरकार की नीतियां की वजह से पशु मेलों की रौनक कम होती जा रही हैं। नागौर, परबतसर, मेड़ता सिटी, डीडवाना, लाडनूं और कुचामन सिटी के पशु मेले अब मात्र औपचारिकता बन कर रह गए है। पशू वध को रोकने का कारण बताकर न्यायालय द्वारा   नागौरी नस्ल को बाहर ले जाने पर लगाई गई इस रोक ने मेले को प्रभावित किया है। रोक के कारण बाहरी राज्यों के पशुपालकों की संख्या मे कमी आती जा रही है। 

नागौर जिले के मशहूर नागौरी नस्ल के बैल की दूसरे राज्यों मे बहुत मांग है लेकिन पशूपालकों को तीन वर्ष से कम उम्र के बछडों को राज्य से बाहर ले जाने की मनाही है इसलिए नागौरी बैल जितना बिकने चाहिए उतने बिक नहीं पाते हैं। उद्घाटन के दौरान नागौर पुलिस अधीक्षक गगनद्वीप सिंगला आने वाली राज्य से आने वाले पशुपालकों को सुरक्षा देने के बात कही क्योंकि बीते वर्षो में गौवंश को लेकर प्रदेश में जो घटनाएं हुई है उनके डर की वजह से भी पशुओं को ले जाने में खरीददार कतराने लगे हैं। 

पंजाब के खरीददारों का कहना है कि हम पशुओं को अच्छी कीमत देकर ले जाते है और अपने बेटों की तरह बछड़ों को पालते पोस्ते है मगर पशुओं को ले जाने के दौरान बीच रास्ते में कभी गौ भक्तों द्वारा तो कभी पुलिस के द्वारा पिटाई कर बछड़ों को खुला छुड़वा दिया जाता है और यही वजह है कि आज गाय और बछड़े आवारा घूमते नजर आ रहे हैं। अगर बछड़ो से रोक हटा दी जाए तो खरीददार खेती के लिए ले जाने को तैयार हैं क्योंकि जहां धान की खेती होती है वहां ट्रेक्टर काम नहीं करता और पशुओं को वहां खेती के लिए काम में लिया जाता हैं। 

...नरपत ज़ोया संवाददाता 1St इंडिया नागौर

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