जयपुर: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क बनता जा रहा वन्यजीवों का कब्रिस्तान

जयपुर: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क बनता जा रहा वन्यजीवों का कब्रिस्तान

जयपुर: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क वन्यजीवों का कब्रिस्तान बनता जा रहा है. अनट्रेंड वन्य जीव चिकित्सक, प्रशासनिक लापरवाही और मॉनिटरिंग की कमी ने 13 महीने में ही सात शेर और बाघ हमसे छीन लिए हैं. कोरोना जैसी महामारी के दौर में जब पूरा विश्व सजग दिखाई दे रहा है नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन लापरवाही की नींद में है. बाघ और शेरों में लेप्टोस्पायरोसिस बोलने के बावजूद भी स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया गया और देखते ही देखते 13 महीनों में सात बिग कैट्स को मौत की नींद सुला दिया. 

नाम                             मौत की तिथि                 कारण
सुजैन शेरनी                 19 सितम्बर 2019      केनाइन डिस्टेंपर
रिद्धि  बाघिन                21 सितम्बर 2019     केनाइन डिस्टेंपर
सीता (सफेद बाघिन)     27 सितम्बर 2019      केनाइन डिस्टेंपर
रुद्र बाघ                      10 जून 2020             लेप्टोस्पायरोसिस
सिद्धार्थ शेर                 11 जून 2020            लेप्टोस्पायरोसिस
राजा (सफेद बाघ)        4 अगस्त 2020           लेप्टोस्पायरोसिस
कैलाश शेर                  18 अक्टूबर 2020       कार्डियक अरेस्ट

पिछले साल 19 सितंबर यानी ठीक 13 महीने पहले केनाइन डिस्टेंपर नाम के वायरस ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में सुजैन नाम की शेरनी की जिंदगी को लील लिया था. इसके ठीक एक दिन छोड़कर यानी 21 सितंबर को इस वायरस ने रिद्धि नाम की बाघिन को मौत की नींद सुला दिया और 6 दिन बाद यानी 27 सितंबर को एकमात्र सफेद बाघिन सीता को भी केनाइन डिस्टेंपर ने हमसे छीन लिया. पिछले वर्ष जब 9 दिन में 3 बिग कैट की मौत हुई तो नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हड़कंप तो मचा लेकिन उच्चाधिकारियों ने अपने मातहतों की लापरवाही पर पर्दा डाल दिया. 

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क को बिग कैट का कब्रिस्तान बना: 
दरअसल, मॉनिटरिंग का अभाव, विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की कमी और जानलेवा लापरवाही ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क को बिग कैट का कब्रिस्तान बना कर रख दिया है. पिछले साल की घटना से वन विभाग ने सबक नहीं लिया. पिछले साल 9 दिन में जब 3 बिग कैट्स की केनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत हुई उसके बाद जो इंतजाम बायोलॉजिकल पार्क में किए जाने थे वह नहीं हुए. अब बारी आई वर्ष 2020 की 10 जून को रूद्र नाम के बाघ शावक ने दम तोड़ दिया. आईवीआरआई बरेली से जो विसरा जांच रिपोर्ट आई उसमें लेप्टोस्पायरोसिस नाम के वायरस की पुष्टि हुई. अभी 24 घंटे भी रूद्र की मौत को नहीं हुए थे कि सिद्धार्थ नाम के शेर ने अगले ही दिन यानी 11 जून को दुनिया को अलविदा कह दिया. 

सिद्धार्थ के रक्त के नमूनों में भी लेप्टोस्पायरोसिस वायरस पाया गया:
सिद्धार्थ के रक्त के नमूनों में भी लेप्टोस्पायरोसिस वायरस पाया गया. उसके बाद 4 अगस्त को राजा नाम के सफेद बाघ ने इस दुनिया से विदा ले ली राजा के रक्त के नमूनों में भी यही जानलेवा वायरस पाया गया. लगातार हो रही बिग कैट्स की मौत के बाद बायोलॉजिकल पार्क के सभी बाघ, शेर और लेपर्ड के रक्त के नमूने लिए गए. इनमें लेपर्ड्स को छोड़कर बाघ और शेर की किडनी खराब पाई गई. सभी का क्रिएटनीन लेवल 3.5 से 4 तक पाया गया. इसके बावजूद बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन लापरवाह बना रहा और महज एक विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही इन बिग कैट्स को दवाई दी गयी. अभी तक बायोलॉजिकल पार्क और नाहरगढ़ लायन सफारी में खेलते कूदते दिखाई देने वाले एशियाटिक लायन कैलाश ने जब आज सुबह दम तोड़ा तो पूरा वन विभाग हक्का-बक्का रह गया. कैलाश कल अपनी फीमेल पार्टनर तारा के साथ था. इसके बाद उसने शाम को खाना भी खाया लेकिन थोड़ी देर बाद ही उल्टी कर दी. 

कैलाश की मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया:  
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के सहायक वन संरक्षक जगदीश गुप्ता का कहना है कि उल्टी करने के बाद कैलाश को दवा दी गई लेकिन आज सुबह 6 बजे कैलाश में दम तोड़ दिया. हालांकि गुप्ता का कहना है कि तीन चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम के बाद कैलाश की मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है. उधर सूत्रों का कहना है कि कैलाश की उम्र 4 वर्ष है और उसकी किडनी में भी पहले से इंफेक्शन था जिसके कारण उसका भी क्रिटनीन लेवल बढ़ा हुआ था.लेप्टोस्पायरोसिस नेवले और चूहे के पेशाब से फैलता हैं. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में लगातार बिग कैट्स की मौत के बाद भी नेवले और चूहों पर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं किया जा सका. अभी भी यहां 3-3 बाघ और शेर बचे हुए हैं उन पर भी मौत का खतरा मंडरा रहा है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि वन विभाग की जानलेवा लापरवाही ने बायोलॉजिकल पार्क को कब्रिस्तान बना दिया है.

 

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