जयपुर VIDEO: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क बनता जा रहा वन्यजीवों का कब्रिस्तान, ढाई वर्ष में 10 बिग कैट्स की मौत

VIDEO: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क बनता जा रहा वन्यजीवों का कब्रिस्तान, ढाई वर्ष में 10 बिग कैट्स की मौत

जयपुर: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क वन्यजीवों का कब्रिस्तान बनता जा रहा है. अनट्रेंड वन्य जीव केयर टेकर, प्रशासनिक लापरवाही और मॉनिटरिंग की कमी ने ढाई वर्ष में ही 5-5 शेर और बाघ हमसे छीन लिए हैं. यहां अभी तक लाए गए तीनों सफेद बाघ, बाघिन सीता, राजा और आज चीनू दुनिया से जा चुके हैं. बाघ और शेरों में लेप्टोस्पायरोसिस मिलने के बावजूद भी स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया गया और देखते ही देखते ढाई वर्ष में 10 बिग कैट्स और एक बारहसिंगा मौत की नींद सो चुके हैं. 

नाम                             मौत की तिथि                 कारण

सुजैन शेरनी                 19 सितम्बर 2019      केनाइन डिस्टेंपर

रिद्धि  बाघिन                21 सितम्बर 2019     केनाइन डिस्टेंपर

सीता (सफेद बाघिन)     27 सितम्बर 2019      केनाइन डिस्टेंपर

रुद्र बाघ                      10 जून 2020             लेप्टोस्पायरोसिस

सिद्धार्थ शेर                 11 जून 2020            लेप्टोस्पायरोसिस

राजा (सफेद बाघ)        4 अगस्त 2020           लेप्टोस्पायरोसिस

कैलाश शेर                  18 अक्टूबर 2020       कार्डियक अरेस्ट

तेजस शेर                      3 नवंबर 2020        लेप्टोस्पायरोसिस

तारा का शावक             12 दिसम्बर 2020      कमजोरी

सफेद बाघ चीनू             10 जुलाई 2022      * लेप्टोस्पायरोसिस

एक बारहसिंगा की भी हुई थी मौत

बारहसिंगा                    19 सितम्बर 2021       कार्डियक अरेस्ट

19 सितंबर 2019 यानी करीब 33 महीने पहले केनाइन डिस्टेंपर नाम के वायरस ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में सुजैन नाम की शेरनी की जिंदगी को लील लिया था. इसके ठीक एक दिन छोड़कर यानी 21 सितंबर को इस वायरस ने रिद्धि नाम की बाघिन को मौत की नींद सुला दिया और 6 दिन बाद यानी 27 सितंबर 2019 को एकमात्र सफेद बाघिन सीता को भी केनाइन डिस्टेंपर ने हमसे छीन लिया. वर्ष 2019 जब 9 दिन में 3 बिग कैट की मौत हुई तो नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हड़कंप तो मचा लेकिन उच्चाधिकारियों ने अपने मातहतों की लापरवाही पर पर्दा डाल दिया. दरअसल मॉनिटरिंग का अभाव, विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की कमी और जानलेवा लापरवाही ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क को बिग कैट का कब्रिस्तान बना कर रख दिया है. वर्ष 2019 की घटना से वन विभाग ने सबक नहीं लिया. 9 दिन में जब 3 बिग कैट्स की केनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत हुई उसके बाद जो इंतजाम बायोलॉजिकल पार्क में किए जाने थे वह नहीं हुए. फिर बारी आई वर्ष 2020 की 10 जून को रूद्र नाम के बाघ शावक ने दम तोड़ दिया. आईवीआरआई बरेली से जो विसरा जांच रिपोर्ट आई उसमें लेप्टोस्पायरोसिस नाम के वायरस की पुष्टि हुई. अभी 24 घंटे भी रूद्र की मौत को नहीं हुए थे कि सिद्धार्थ नाम के शेर ने अगले ही दिन यानी 11 जून 2020 को दुनिया को अलविदा कह दिया. 

सिद्धार्थ के रक्त के नमूनों में भी लेप्टोस्पायरोसिस वायरस पाया गया. उसके बाद 4 अगस्त को राजा नाम के सफेद बाघ ने इस दुनिया से विदा ले ली राजा के रक्त के नमूनों में भी यही जानलेवा वायरस पाया गया. लगातार हो रही बिग कैट्स की मौत के बाद बायोलॉजिकल पार्क के सभी बाघ, शेर और लेपर्ड के रक्त के नमूने लिए गए. इनमें लेपर्ड्स को छोड़कर बाघ और शेर की किडनी खराब पाई गई. सभी का क्रिएटनीन लेवल 3.5 से 4 तक पाया गया. इसके बावजूद बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन लापरवाह बना रहा. अभी तक बायोलॉजिकल पार्क और नाहरगढ़ लायन सफारी में खेलते कूदते दिखाई देने वाले एशियाटिक लायन तेजस ने इसके बाद दम तोड़ा तो पूरा वन विभाग हक्का-बक्का रह गया. इसी पहले 18 अक्टूबर 2020 को कैलाश नाम के एसियाटिक शेर की मौत हुई थी. जिसे आनन फानन में कार्डियक अरेस्ट से मरना बताया गया. सफेद बाघ चीनू को पिछले वर्ष 17 मार्च को उड़ीसा के नंदनकानन से जयपुर लाया गया था. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क आने वाले पर्यटकों का सबसे बड़ा आकर्षण यह सफेद बाघ ही था जिसने पिछले 7 दिन से खाना पीना छोड़ रखा था और लगातार कमजोरी बढ़ती जा रही थी. 

वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉक्टर अरविंद माथुर की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था लेकिन आज इस में दम तोड़ दिया. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के सहायक वन संरक्षक रघुवीर मीणा का कहना है कि चीनू का भी इलाज चल रहा था लेकिन आज उसने दम तोड़ दिया. डीएफओ कपिल चंद्रावल ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद चीनू का अंतिम संस्कार किया जाएगा और मौत के असली कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चलेगा. उधर सूत्रों का कहना है कि चीनू की किडनी में भी पहले से इंफेक्शन था जिसके कारण उसका भी क्रिटनीन लेवल बढ़ा हुआ था. लेप्टोस्पायरोसिस नेवले और चूहे के पेशाब से फैलता है. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में लगातार बिग कैट्स की मौत के बाद भी नेवले और चूहों पर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं किया जा सका. अभी भी यहां 2 शेर और 3 बाघ और शेर बचे हुए हैं उन पर भी मौत का खतरा मंडरा रहा है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि वन विभाग की जानलेवा लापरवाही ने बायोलॉजिकल पार्क को कब्रिस्तान बना दिया है.

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