VIDEO: नारायणा अस्पताल की बड़ी लापरवाही से बुजुर्ग हुआ अपंग ! 

Vikas Sharma Published Date 2019/04/03 10:00

जयपुर। आइए अब आपको बताते है राजधानी के नारायणा अस्पताल के चिकित्सकों की ऐसी लापरवाही, जिसने एक बुजुर्ग को जीवनभर के लिए अपंगता का दंश दे दिया। जी हां, ये कोई हमारा आरोप नहीं, बल्कि लालसोट के श्यामपुरा निवासी राजाराम मीणा की पीड़ा है। चिकित्सकों की कथित लापरवाही के चलते एक तरफ जहां एक पांव गंवा चुके राजाराम के परिवार में पिछले एक पखवाड़े से दुख का पहाड़ टूटा हुआ है, वहीं दूसरी और रसूखदार अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है। पेश है एक रिपोर्ट: 

चिकित्सकीय लापरवाही के चलते एक पैर गंवाने वाले लालसोट के श्यामपुरा निवासी साठ वर्षीय राजाराम मीणा के लिए अब सिर्फ बिस्तर ही ठिकाना बन गया है और आखों में आसूं बन गए है जिन्दगीभर का दर्द। दरअसल, राजाराम को दाये पैर की अंगुली में दर्द की दिक्कत थी, जबकि दूसरा पांव ठीक था। राजाराम एक उम्मीद लेकर नारायणा अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें एजियोप्लास्टी की सलाह दी। मीणा के बेटे मुकेश की मानें तो एंजियोप्लास्टी के बाद बुजुर्ग पिता राजाराम के बाये पैर ने भी काम करना बन्द कर दिया। चिकित्सकों ने शिकायत की तो कहा गया कि दवाओं से कुछ दिनों में ठीक हो जाएगा। आरोप ये है कि चिकित्सकों ने बगैर किसी उपचार के राजाराम को तीन दिन बाद छुट्टी दे दी। परिजन उन्हें इस उम्मीद में घर ले गए कि एक-दो दिन में सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। 1.80 लाख रुपए खर्च करने के बावजूद राजाराम को उपचार के नाम पर मिली है अपंगता का दर्द। 

आखिर क्या है घटनाक्रम:
- नारायणा हॉस्पिटल में उपचार के बजाय मिल रहा दर्द 
- कथित चिकित्सकीय लापरवाही के चलते एक बुजुर्ग को गंवाना पड़ा पैर 
- 11 मार्च को पैर की एंजियोप्लास्टी के लिए भर्ती हुए राजाराम 
- चिकित्सकों ने मरीज के दाये पैर का दर्द दूर करने के लिए की एंजियोप्लास्टी 
- मरीज राजाराम के बेटे का आरोप, ऑपरेशन में कथिततौर पर लापरवाही का आरोप 
- ऑपरेशन के बाद बाये पैर ने काम करना किया बन्द 
- देखते ही देखते काला पड़ने लगा पैर, तो चिकित्सकों ने आनन-फानन में 14 मार्च को भेजा घर 
- मरीज की घर पर बिगडी हालात तो फिर 18 मार्च को अस्पताल में किया गया भर्ती 
- और फिर चिकित्सकों ने लापरवाही जगजाहिर होने के डर से काले पड़े पैर को काटकर किया अलग 
- इसके बाद 27 मार्च को डिस्चार्ज कर फिर से घर भेजा, तभी से राजाराम बैड पर ही है।

इस पूरे घटनाक्रम से राजाराम मीणा का पूरा परिवार सकते में है। हो भी क्यों नहीं, जब घर से गए थे, तो परिजनों को आस थी कि उपचार लेकर वे ठीक होंगे, लेकिन अस्पताल से लौटे अपंग होकर। राजाराम मीणा के बेटे मुकेश ने बताया कि पिता सदमे में आ गए है। ना किसी से बात करते है और न ही ठीक से खाना खा रहे है। बस हर वक्त आखों से आसूं बहते रहते है। 

इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने के लिए फर्स्ट इंडिया की टीम दो बार अस्पताल गई, लेकिन किसी से भी अधिकृत तौर पर जवाब नहीं मिला। मरीज के दर्द की पीड़ा भूल अभी भी अस्पताल प्रशासन कॉपोरेट कल्चर को निभाने में लगा है। घटना को लेकर किसी भी तरह के जवाब के लिए मेल पर सवाल मंगवाए जा रहे है। अस्पताल की इस तानाशाही रवैये से खफा मरीज के परिजनों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही कानूनी कार्रवाई के लिए मानस बनाया है। अब देखना यह होगा कि परिजनों की हिम्मत अस्पताल के रसूखात के आगे कितना टिक पाती है। जिन्दगीभर के लिए बुजुर्ग को अपाहित बनाने के लिए जिम्मेदार चिकित्सकों पर क्या कार्रवाई होती है। 

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