थड़ी-ठेला व्यवसायियों के हितों को लेकर जागी केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/03/26 02:24

जयपुर (अभिषेक श्रीवास्तव)। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को देशभर के लाखों थड़ी-ठेला व्यवसायियों के हितों को लेकर सजग हुई है। केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि थड़ी-ठेला व्यवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए केन्द्रीय कानून की पालना कराई जाए। खास रिपोर्ट:

केन्द्र की पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के समय स्ट्रीट वेन्डर्स एक्ट 2014 को देशभर में लागू किया गया था। इस एक्ट के तहत थड़ी-ठेला व्यवसायियों को व्यवसाय के लिए कानूनन स्थान उपलब्ध कराने के लिए स्ट्रीट वेंडिग जोन घोषित करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही पुलिस या निकायों की ओर से उन्हें बेवजह बेदखल करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। कई राज्यों से केन्द्र सरकार को लगातार थड़ी-ठेला व्यवसायियों के संगठनों की ओर से शिकायतें मिल रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले केन्द्र के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों को पत्र भेजा गया है। आपको बताते हैं कि स्ट्रीट वेन्डर्स एक्ट की पालना के लिए केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को क्या निर्देश दिए हैं। 

केन्द्र के राज्यों को निर्देश:

—कानून की धारा 3(3) के तहत जब तक सभी व्यवसायियों का सर्वे कर उन्हें स्ट्रीट वेंडिग का प्रमाण पत्र जारी नहीं कर दिया जाता
—तब तक किसी भी व्यवसायी को उसके स्थान से हटाया या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता
—कानून की धारा 18 और 19 के अनुसार व्यवसायियों को केवल नोटिस देकर ही किसी स्थान से हटाया या उनका पुनर्वास किया जा सकता है
—कानून के चैप्टर 5 के तहत व्यवसायियों के शिकायतों की सुनवाई के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था बनाना जरूरी है
—कानून के चैप्टर 8 के अनुसार ऐसा व्यवसायी जो प्रमाण पत्र के अनुसार व्यवसाय कर रहा है
—उस व्यवसायी को किसी भी प्रकार से किसी भी कानून के तहत हटाया नहीं जा सकता
—कानून की अवहेलना के कारण बड़ी तादाद में व्यवसायियों ने विभिन्न अदालतों में दावे कर रखे हैं
—इनमें अधिकतर मामले व्यवसायियों को उनके स्थान से जबरन हटाने के हैं।

स्ट्रीट वेन्डर्स एक्ट को लागू करने के पीछे केन्द्र सरकार की मंशा थी कि थड़ी-ठेला व्यवसायियों को बेवजह आए दिन बेदखली की पुलिस या निकायों की कार्रवाई से बचाया जाए। ताकि वे गरिमापूर्ण तरीके से अपनी आजीविका कमा सकें, लेकिन केन्द्र सरकार के राज्यों को दिए गए निर्देश ये बताते हैं कि कई राज्यों में इस कानून की विभिन्न धाराओं की पालना नहीं की जा रही है। 
 

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