'खूनी बैसाखी' के अनुवाद को लेकर नवदीप सूरी ने रखी अपनी राय

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/13 03:30

नई दिल्ली। जलियांवाला बाग हत्याकांड के सौ बरस पूरे होने पर आज नानक सिंह की पुस्तक 'खूनी बैसाखी' का विमोचन किया गया। इसी सिलसिले में नानक सिंह के ग्रैंडसन और राजनयिक नवदीप सूरी ने यह पूछे जाने पर कि क्या ब्रिटेन सरकार को नरसंहार के लिए माफी मांगनी चाहिए पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह कुछ ऐसा है जो वे शायद अपने स्वयं के लिए करना चाहते हैं, न कि भारतीय मत को मानने के लिए। 

उन्होंने कहा कि कविता के माध्यम से पता चलता है कि उस समय के हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों के बीच एकता की उल्लेखनीय भावना थी। बता दें कि जलियांवाला बाग हत्याकांड में बचे लोगों में से एक नानक सिंह ने वहां के अनुभवों पर 'खूनी बैसाखी' नाम से एक लंबी कविता लिखी थी, जिसे अंग्रेजों ने बैन कर दिया था। 99 साल बाद उनके पोते नवदीप सूरी ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया है। 

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