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नवाज शरीफ को 7 साल की सज़ा का ऐलान, भ्रष्टाचार मामले में हैं दोषी

नवाज शरीफ को 7 साल की सज़ा का ऐलान, भ्रष्टाचार मामले में हैं दोषी

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आज कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में सजा का ऐलान किया है। पाकिस्तान की अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े दो मामलों में नवाज शरीफ के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उन्हें एक मामले में दोषी और अन्य दूसरे मामले में बरी कर दिया है।

दरअसल, कोर्ट ने पाक के पूर्व प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार से चुड़े अल अजीजिया मामले में दोषी करार देते हुए सात साल की सज़ा का ऐलान किया है। अब नवाज शरीफ को कोर्ट से सीधे अदियाला जेल ले जाया जाएगा।

बतादें अकाउंटेबिलिटी कोर्ट के न्यायाधीश मुहम्मद अरशद मलिक ने पिछले सप्ताह बर्खास्त हुए पीएम के खिलाफ अल-अजीजिया स्टील मिल्स और फ्लैगशिप निवेश मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए नवाज शरीफ को डेढ़ अरब रुपये का जुर्माना भरने के लिए कहा है।

इस फैसले के बाद नवाज शरीफ ने कोर्ट से अपील की है कि उन्हें अदियाला जेल के बजाय लखपत जेल में ट्रांसफर किया जाये। पिछले सप्ताह शरीफ ने कोर्ट में एक सप्ताह का वक्त और मांगा था लेकिन उस अर्जी को कोर्ट ने खारिज़ कर दिया था। 

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जानिए कैसा रहेगा ग्रहण का असर ? साल 2020 का दूसरा चंद्रग्रहण कल, 21 जून को होगा सूर्य ग्रहण

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नई दिल्ली: देश में इस वर्ष लगातार 3 ग्रहण पड़ने वाले है. 5 जून को वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा. हालां​कि इसका प्रभाव भारत में नहीं होगा. वहीं 21 जून को सूर्य ग्रहण होगा, जो भारत में प्रभावशील रहेगा. इसके बाद तीसरा 5 जुलाई और साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को लगेगा. 

ऐसा रहेगा चंद्रग्रहण:
5 जून 2020 को यानी शुक्रवार को वर्ष 2020 का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है. हिंदू पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर चंद्रग्रहण लगेगा. यह चंद्रग्रहण उपछाया ग्रहण होगा. ग्रहण 5 जून की रात 11 बजकर 15 मिनट से लगना आरंभ होगा जो अगले दिन रात के 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. ग्रहण के समय चंद्रमा वृश्चिक राशि में भ्रमण करेगा. जब भी चंद्रग्रहण लगता है तो उससे पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है. चंद्रग्रहण की प्रकिया में इसे penumbra कहा जाता है. उपछाया में पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं पड़ता इसमें चंद्रमा सिर्फ धुंधला सा दिखाई पड़ता है इस वजह से इसे चंद्र मालिन्य भी कहते हैं. 

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21 जून को होगा सूर्य ग्रहण: 
21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है. अगर बात करें ज्‍योतिषीय दृष्‍टी की, तो  इसका असर बहुत अच्‍छा नहीं मिलने जा रहा है. पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने के संकेत हैं. मृत्युदर और बढ़ोतरी हो सकती है.  तूफान और भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं. ये सूर्य ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र और मिथुन राशि में होगा. जिनका जन्म नक्षत्र मृगशिरा और जन्म राशि या जन्म लग्न मिथुन है. उनके लिए यह विशेष अरिष्ट फल प्रदान करने वाला होगा. सूर्य ग्रहण प्रात: 9:26 बजे से अपराह्न 3:28 तक रहेगा. भारत में यह ग्रहण प्रात:10 बजे से 14:30 बजे तक अर्थात साढ़े चार घंटे रहेगा. इस ग्रहण के दौरान सूर्य 94 प्रतिशत ग्रसित हो जाएगा. दिन में अन्धेरा जा जाएगा. कुछ जगह तारे भी दिखाई दे सकते हैं.
 
धीरे धीरे होगा कोरोना का प्रकोप कम:
दुनियाभर में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा दिया है. अभी इसकी वैक्सिन नहीं बन पाई है. वैज्ञानिक लगातार इस पर रिसर्च करके दवा बनाने में लगे हुए है. वहीं बात करें ज्योतिषियों की, तो उनके मुताबिक कोरोना महामारी ग्रहों की दशा बदलने की वजह से ज्यादा विकराल हुई है. आकाश मंडल में सूर्य, शनि, चंद्र, केतु के विपरीत प्रभाव के चलते कोरोना महामारी दुनिया में फैली है. ज्योतिषियों के मुताबिक जून माह में पड़ रहे सूर्य ग्रहण के प्रभाव से कोरोना का प्रकोप कम होने लगेगा और 5 जुलाई को पड़ रही गुरु पूर्णिमा तक विषाणु, कीटाणु प्रभावशील रहेंगे. जब ग्रह वापस अपने मूल स्वरूप में आएंगे, तभी कोरोना का प्रकोप समाप्त होने लग जाएगा. 

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Coronavirus Vaccine: रूस ने किया कोरोना वैक्सीन तैयार करने का दावा, सैनिकों पर हो रहा है ट्रायल

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नई दिल्ली: दुनियाभर में लगातार कोरोना का कहर बरकरार है. इसी के चलते शोधकर्ता कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कारगर दवा और टीका ईजाद करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं. इसी बीच रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण दावा है. रूसी सेना के अनुसार उसने कोविड19 के टीके का अपने सैनिकों के साथ ट्रायल शुरु कर दिया है. ऐसे में यह ट्रायल अगले महीने के अंत तक खत्म हो जाएंगे.

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इस परीक्षण के लिए 50 सैन्यकर्मियों का चयन किया गया: 
रूसी रक्षा विभाग के मुताबिक इस परीक्षण के लिए 50 सैन्यकर्मियों का चयन किया गया, जिनमें पांच महिलाएं भी हैं. चिकित्सा परीक्षण पूरा होने के बाद सभी को टीके की डोज देने के लिए तैयार किया जाएगा. रूसी वैज्ञानिकों ने 1 जून को नए टीके के प्रायोगिक नमूने का प्रीक्लीनिकल अध्ययन पूरा कर लिया. जानकारी के अनुसार इन सभी सैन्यकर्मियों ने स्वेच्छा से आधुनिक दवा के परीक्षण में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की थी. ऐसे में नए टीके के लिए क्लीनिकल ट्रायल जुलाई के अंत तक पूरे हो जाएंगे. 

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रूस तीसरा सबसे ज्यादा संक्रमित देश:
बता दें कि रूस दुनियाभर में तीसरा ऐसा देश है जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी ज्यादा है. सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में दर्ज किए गए हैं उसके बाद ब्राजील और तीसरे स्थान पर रूस है.  

कोरोना संकट के बीच राहतभरी खबर, इटली के टॉप डॉक्टर्स का दावा, कोरोना वायरस पड़ रहा है कमजोर!

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस की अभी तक कोई वैक्सिन नहीं बन पाई है, लेकिन इस पर रिसर्च जारी है. तो ऐसे में जल्द ही इसकी दवा उपलब्ध हो जाएगी. लेकिन बढ़ते कोरोना मामलों के बीच एक राहतभरी खबर मिली है. खबर यह है कि अब धीरे-धीरे कोरोना वायरस कमजोर पडता जा रहा है.यह दावा इटली के टॉप डॉक्टर्स ने किया. मीडिया रिपोर्ट की माने तो COVID-19 अब धीरे-धीरे अपनी क्षमता खो रहा है. लोम्बार्डी के सैन राफेल अस्पताल के प्रमुख अल्बर्टो जांग्रिलो ने RAI टीवी को बताया कि वास्तव में, वायरस क्लीनिकली रूप से अब इटली में मौजूद नहीं है. गत 10 दिनों में लिए गए स्वैब सैंपल से पता चलता है कि एक या 2 माह पहले की तुलना में अब इनमें वायरल लोड की मात्रा बहुत कम है.

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मई माह में संक्रमण के मामलों में आई गिरावट:
जानकारी के मुताबिक इटली में COVID-19 के ज्यादा मामले है, और COVID-19 से होने वाली सबसे अधिक मौतों में इटली तीसरे नंबर पर है. हालांकि मई माह में यहां संक्रमण के नए मामलों और मौतों में तेजी से गिरावट आई है और यहां कई जगहों पर सख्त लॉकडाउन को खोला जा रहा है.

सावधानी बरतने का आग्रह:
वहीं इटली सरकार ने कोरोना वायरस को लेकर लोगों से सावधानी बरतने का आग्रह किया. इटली सरकार ने कहा कि अभी COVID-19 पर जीत का दावा करना बहुत जल्दबाजी होगी. स्वास्थ्य मंत्रालय की मंत्री सैंड्रा जम्पा ने कहा कि COVID-19 खत्म होने वाली बातों के लिए लंबित पड़े वैज्ञानिक प्रमाणों का सहारा लिया जा रहा है. मैं उन लोगों से कहती हूं कि इटली के लोगों को भ्रमित ना करें. 

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नासा ने एक बार फिर रचा इतिहास, SpaceX के अंतरिक्षयान से दो अंतरिक्ष यात्रियों को धरती से भेजा स्पेस 

 नासा ने एक बार फिर रचा इतिहास, SpaceX के अंतरिक्षयान से दो अंतरिक्ष यात्रियों को धरती से भेजा स्पेस 

नई दिल्ली: नासा ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने पहली बार प्राइवेट कंपनी स्पेसएक्स के अंतरिक्षयान से दो लोगों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा है. अमेरिका ने 9 साल में पहली बार अपनी धरती से अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री भेजे हैं. नासा के ऐडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेनस्टीन ने लॉन्च के बारे में जानकारी दी. चांद को छूने के लिए पृथ्वी से पहली उड़ान इसी जॉन एफ केनेडी सेंटर से रखी गई थी.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने. ट्रंप के साथ में बेटी इवांका और दामाद जेयर्ड भी थे.

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19 घंटे के सफर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुंचेंगे:
स्पेसएक्स के जिस अंतरिक्ष यान में नासा के 2 अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा गया है उसका नाम द क्रू ड्रैगन है. द क्रू ड्रैगन में यात्री के रूप में नासा के एस्ट्रोनॉट बॉब बेनकेन और डग हर्ली सवार हैं जो 19 घंटे के सफर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुंचेंगे. इस मिशन के लिए एस्ट्रोनॉट बॉब बेनकेन और डग हर्ली का चयन वर्ष 2000 में ही हो चुका था. दोनों ही स्पेस शटल के ज़रिए 2-2 बार अंतरिक्ष में जा चुके हैं. जोखिम कम से कम हो इसलिए अमेरिका के सबसे भरोसेमंद रॉकेट फॉल्कन-9 से लॉन्चिंग की गई.

दोनों अंतरिक्ष यात्री सभी तैयारियों के साथ हुए सवार: 
अमेरिकी समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 22 मिनट पर रॉकेट को लॉन्च किया गया. दोनों अंतरिक्ष यात्री सभी तैयारियों के साथ SpaceX रॉकेट में सवार हुए. काउंटडाउन खत्म होने के साथ ही यान अंतरिक्ष की ओर उड़ चला. इससे पहले बुधवार को खराब मौसम की वजह से लॉन्चिंग को तय समय से 16 मिनट पहले टालना पड़ा था.

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Coronavirus Vaccine बनाने में अब एक और कंपनी ने जगाई दुनिया की उम्मीदें, अक्टूबर के अंत तक हो सकती है तैयार

Coronavirus Vaccine बनाने में अब एक और कंपनी ने जगाई दुनिया की उम्मीदें, अक्टूबर के अंत तक हो सकती है तैयार

नई दिल्ली: कोरोना वैक्सीन तैयार करने को लेकर कई देशों में शोध चल रहा है. इसी बीच अब एक और कंपनी ने वैक्सीन बनाने में उम्मीदें जगा दी है. वियाग्रा जैसी दवाओं का आविष्कार करने वाली अमेरिकन फार्मास्यूटिकल कंपनी Pfizer ने दावा किया है कि इस साल अक्टूबर के अंत तक इसकी वैक्सीन बनकर तैयार हो जाएगी. 

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अक्टूबर के अंत तक वैक्सीन तैयार हो जाएगी: 
कंपनी के सीईओ के मुताबिक, अगर सबकुछ ठीक रहा तो अक्टूबर के अंत तक वैक्सीन तैयार हो जाएगी. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि एक गुणकारी और सुरक्षित वैक्सीन के लिए हम भरपुर प्रयास कर रहे हैं. Pfizer जर्मनी की फर्म बायोन्टेक के साथ यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में कई संभावित वैक्सीन को लेकर काम कर रहा है.

कंपनी चार अलग-अलग वैक्सीन पर काम कर रही: 
Pfizer कंपनी फिलहाल चार अलग-अलग वैक्सीन पर काम कर रही है. ऐसे में जून जुलाई तक यह साफ हो जाएगा कि कौन सी वैक्सीन सबसे ज्यादा कारगर और सुरक्षित है. इसके लिए डाटा इकट्टा कर उसका विश्लेषण किया जा रहा है. 

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पूरे विश्व में 120 वैक्सीन पर काम चल रहा:
बता दें कि दुनियाभर में कई दवा कंपनियां और वैज्ञानिक दिन रात एक कर वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं. WHO के अनुसार इस समय पूरे विश्व में 120 वैक्सीन पर काम चल रहा है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों की माने तो नई वैक्सीन तैयार होने में अभी एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है. लेकिन Covid-19 जैसी महामारी वाली विशेष परिस्थितियों में एक्सपेरिमेंटल वैक्सीन कामयाब हो सकती हैं. 
 

चीन के साथ सीमा विवाद पर अच्छे मूड में नहीं हैं पीएम मोदी- डोनाल्ड ट्रंप

चीन के साथ सीमा विवाद पर अच्छे मूड में नहीं हैं पीएम मोदी-  डोनाल्ड ट्रंप

नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर मध्यस्थता की बात कही है. इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन विवाद को लेकर पीएम मोदी का मूड अच्छा नहीं है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है. 

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भारत खुश नहीं है और शायद चीन भी खुश नहीं: 
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हम देख रहे हैं कि भारत और चीन के बीच बड़ा सीमा विवाद चल रहा है, दो देश जिनकी आबादी 1.4 अरब और जिनके पास बहुत ही शक्तिशाली सेना है. इस विवाद से भारत खुश नहीं है और शायद चीन भी खुश नहीं है, मैंने पीएम नरेंद्र मोदी से बात की है. वह चीन के साथ जो स्थिति बनी हुई है उसे लेकर अच्छे मूड में नहीं हैं.

भारत और चीन की सेना भी काफी ताकतवर: 
ट्रंप ने कहा कि मैं पीएम मोदी को काफी पसंद करता हूं. वह एक महान व्यक्ति हैं. इसके साथ ही ट्रंप ने कहा कि भारत और चीन के बीच बड़ा विवाद चल रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विवाद है. भारत और चीन की सेना भी काफी ताकतवर है. शायद भारत खुश नहीं है, शायद चीन भी खुश नहीं है.

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ट्रंप ने मध्यस्थता करने की पेशकश की थी:
बता दें कि दो दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा था कि हमने भारत और चीन दोनों को सूचित किया है अगर वो चाहें तो सीमा विवाद में अमेरिका मध्यस्थता करने को तैयार है. 

भारत-चीन के बीच सीमा विवाद पर बोले ट्रंप, कहा- अमेरिका मध्यस्थता करने के लिए तैयार

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर मध्यस्थता की पेशकश की है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए तैयार है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि हमने भारत और चीन को सूचना दी है कि अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार है. 

नक्शा विवाद पर एक कदम पीछे हटा नेपाल, संविधान संशोधन की कार्यवाही से प्रस्ताव को हटाया 

ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच भी मध्यस्थता की बात कर चुके:
इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात कर चुके हैं. हालांकि भारत ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. अब ट्रंप ने चीन के साथ मध्यस्थता की बात कही है.

लद्दाख में चीनी सैनिक और भारतीय सैनिक आमने-सामने: 
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत से ही लद्दाख में चीनी सैनिक और भारतीय सैनिक आमने-सामने हैं, चीन की ओर से लगातार सैनिकों की संख्या बढ़ाने और बेस बनाने की खबरें आ रही हैं. भारत की तैनाती के बाद गैलवान घाटी में चीन के सैनिक कैंप में चले गए हैं. इससे पहले मंगलवार को पीएम मोदी ने लद्दाख मामले पर पूरी रिपोर्ट ली, इसके अलावा तीनों सेना के प्रमुखों से विकल्प सुझाने के लिए कहा गया.

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सेना प्रमुख की बैठक:
आज सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे ने आर्मी कमांडर्स के साथ बैठक की. इस बैठक में चीन को लेकर भी चर्चा हुई है. ये बैठक इसलिए अहम है क्योंकि इसमें सेना की ऑपरेशनल तैयारियों पर बात हो रही है. इससे पहले मंगलवार को पीएम मोदी ने तीनों सेना के प्रमुखों से विकल्प सुझाने के लिए कहा गया. 
 

नक्शा विवाद पर एक कदम पीछे हटा नेपाल, संविधान संशोधन की कार्यवाही से प्रस्ताव को हटाया

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नई दिल्ली: बीते कुछ दिनों से पड़ोसी देश नेपाल से भारत के रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं. कालापनी और लिपुलेख जैसे सीमा विवाद ने दोनो दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा की है. इसी बीच भारत से  संबंधों में आए दरार के बीच नेपाल ने एक कदम पीछे हटाया है.

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ऐन वक्त पर संसद की कार्यसूची हटाया: 
दरअसल, नेपाल की संसद में आज नए नक्शे को देश के संविधान में जोड़ने के लिए संविधान संशोधन का प्रस्ताव रखा जाना था. लेकिन नेपाल सरकार ने ऐन वक्त पर संसद की कार्यसूची से आज संविधान संशोधन की कार्यवाही को हटा दिया. यह नेपाल के सत्तापक्ष‌ और प्रतिपक्षी दल दोनों की आपसी सहमति से हुआ है. 

नेपाल के प्रधानमंत्री ने बुलाई थी सर्वदलीय बैठक:
इससे पहले मंगलवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पी शर्मा ओली ने नए नक्शे वाले मुद्दे पर राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इस दौरान सभी दल के नेताओंने भारत के साथ बातचीत कर मुद्दे को सुलझाने का सुझाव दिया था. भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल से बातचीत के लिए माहौल बनाने की मांग की थी. ऐसे मं नेपाल ने नए नक्शे को संसद में पेश नहीं करके कूटनीतिक रूप से परिपक्वता का उदाहरण दिया है. 

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यह है मामला:
बता दें कि 8 मई को भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया था. इसको लेकर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई थी. इसके बाद नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी करने का फैसला किया था और इसमें भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को भी अपना बताकर दिखाया है.
 

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