VIDEO: लापरवाही: मेंटेनेंस नहीं होने से ठप पड़ी रोडवेज की 468 बसें

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/12 05:10

जयपुर (काशीराम चौधरी)। भाजपा सरकार में रोडवेज बसों के निजीकरण के प्रयास के आरोप लगते रहे हैं। यह भी कहा जाता है कि पिछली सरकार ने नई बसों की खरीद नहीं की और पुरानी बसें कंडम हो गईं, लेकिन ये हालात मौजूदा सरकार में भी लागू हैं। नई सरकार गठन के 3 माह बीतने पर भी रोडवेज के हालातों में ज्यादा सुधार नहीं है। हद तो यह है कि 468 बसें तो मेंटीनेंस नहीं होने के चलते ठप पड़ी हैं। खास रिपोर्ट-

राजस्थान रोडवेज के हालातों में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। एक तरफ नई बसों की खरीद नहीं हो पा रही है, वहीं मौजूदा बसें पुरानी होने से इनके बंद होने का सिलसिला लगातार जारी है। रोडवेज में दो महीने से मेंटेनेंस नहीं होने से करीब 468 से अधिक बसें ऑफ रोड हो गई है। यानी रोडवेज की ये बसें प्रदेश के 52 डिपो पर खड़ी हुई हैं। इन बसों से ऑफ रोड होने से करीब 200 से अधिक मार्ग पर बसों का संचालन रुक गया है। हर दिन करीब 67 हजार से अधिक यात्री परेशान हो रहे हैं। इन यात्रियों को प्राइवेट और ओवरक्राउड बसों में सफर करना पड़ रहा है। रोडवेज में वर्तमान में 4 हजार 214 बसों में से 3 हजार 893 बसों का संचालन ही हो पा रहा है। सबसे अधिक ऑफ रोड बसें उदयपुर जोन में 87 और जोधपुर जोन में 72 बसें हैं। केवल एक डिपो में सबसे अधिक ऑफ रोड बसें डूंगरपुर डिपो में 36 बसें खड़ी हुई हैं। रोडवेज वर्तमान में करीब 4500 करोड़ रुपए के घाटे में चल रही है। यह स्थिति तो तब है जबकि चुनाव से पहले कर्मचारियों की ओर से की गई हड़ताल के दौरान कांग्रेस नेताओं ने रोडवेज कर्मचारियों को सातवां वेतन देने, सेवानिवृत कर्मचारियों को परिलाभ और घाटे से उबारने के लिए राशि देने का वादा किया था।

घोषणा की, लेकिन नहीं मिली राशि:
—सीएस की अध्यक्षता में 10 दिन पहले RTIDF की बैठक हुई
—रोडवेज की मदद के लिए करीब 240 करोड़ रुपए देने की घोषणा की
—कहा गया, कि इस राशि से सेवानिवृत्त कार्मिकों के बकाया का भुगतान करेंगे
—लेकिन यह राशि अभी तक रोडवेज को नहीं मिल सकी है
—इस वजह से सेवानिवृत कर्मचारियों का परिलाभ अटका हुआ है।

किस जोन में कितनी बसें ऑफ रोड:
अजमेर : 39  बसें
भरतपुर : 52  बसें
बीकानेर : 19  बसें
डीलक्स : 10  बसें
जयपुर : 50  बसें
जयपुर सिटी जोन : 28  बसें
जोधपुर : 72  बसें
कोटा : 43  बसें
सीकर : 68  बसें
उदयपुर : 87 बसें

बसों की खराब हालत और उनके ऑफ रोड खड़े रहने को लेकर रोडवेज के अधिकारी भी सही जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। रोडवेज एमडी के तकनीकी सलाहकार एमएल खत्री ने बताया कि कंपनियों को भुगतान नहीं होने से मेंटीनेंस कराने में परेशानी हो रही है। अब सभी चीफ मैनेजरों को अपने स्तर पर बसों के मेंटीनेंस कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। सबसे ज्यादा ऑफ रोड बसें आईसर कंपनी की हैं। इनके अधिकारियों को भी इस सप्ताह बुलाया है। कुछ दिनों में डिपो पर खड़ी सभी बसों का मेंटीनेंस कराया जाएगा। इसके मेंटीनेंस पार्ट्स की खरीद के ऑर्डर दे दिए हैं। चार-पांच दिन में सभी जगह मेंटीनेंस के लिए सामन भिजवा दिया जाएगा। हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि अधिकारियों के इन दावों की पूर्ति वास्तव में अगले दिनों तक हो पाती है या नहीं और ये बसें सड़कों पर कब तक आ पाती हैं।


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