अमृत योजना में जयपुर नगर निगम और आरयूआईडीपी की लापरवाही पड़ेगी भारी

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/01/19 11:18

जयपुर (अभिषेक श्रीवास्तव)। केन्द्र सरकार की अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अरबन ट्रांसफार्मेनशन (अमृत योजना) में जयपुर नगर निगम और राजस्थान शहरी ढांचा विकास परियोजना (आरयूआईडी) की लापरवाही भारी पड़ सकती है। इन दोनों एजेंसियों की लापरवाही जारी रही तो केन्द्र की ओर से हिस्सेदारी नहीं देने के कारण 200 करोड़ से अधिक लागत के प्रोजेक्ट्स अटक जाएंगे। देखिए फर्स्ट इंडिया न्यूज की ये खास रिपोर्ट-

इस अमृत योजना के तहत प्रदेश के एक लाख व उससे अधिक आबादी के 29 शहर शामिल हैं। तीन हजार से अधिक करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट़्स इस योजना के तहत प्रस्तावित है। केन्द्र सरकार के अतिरिक्त सचिव शिवदास मीना के स्तर पर योजना के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव शिवदास मीना ने चेतावनी दी कि जयपुर नगर निगम ने दो प्रोजेक्ट्स और आरयूआईडीपी ने एक लम्बित एक प्रोजेक्ट को आगामी 13 महीने में पूरा नहीं किया तो 205 करोड़ रुपए लागत के इन प्रोजेक्ट्स पर केन्द्र सरकार अपनी 33 फीसदी की हिस्सेदारी नहीं देगी। आपको बताते हैं कि आखिर क्या है पूरा मामला और के स्तर पर किस प्रकार लापरवाही हो रही है-

इस कारण अटकें हैं 200 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स

-राजधानी स्थित दहलावास ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता को बढ़ाया जाना है
-इसकी क्षमता को 67.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 125 मिलियन लीटर प्रतिदिन किया जाना है
-इस प्रोजेक्ट की लागत 33 करोड़ 95 लाख रुपए है
-जयपुर नगर निगम पर इस काम की जिम्मेदारी है
-नगर निगम ने अब तक इस प्रोजेक्ट का काम तक शुरू नहीं कराया है
-राजधानी की चार दिवारी में जर्जर सीवर लाइनों को बदला जाना है
-इस प्रोजेक्ट पर 74 करोड़ 95 लाख रुपए खर्च किए जाने हैं
-प्रोजेक्ट के लिए जिम्मेदार एजेंसी जयपुर नगर निगम ने अब तक इसका भी काम शुरू नहीं कराया है
-कोटा में 95 करोड़ 19 लाख का सीवर प्रोजेक्ट प्रस्तावित है
-प्रोजेक्ट अदालती विवाद में फंसा हुआ है
-जिम्मेदार एजेंसी आरयूआईडीपी अब तक इस प्रोजेक्ट को विवाद से बाहर नहीं निकाल पाई है

जयपुर नगर निगम और आरयूआईडीपी के पास केवल 13 महीने हैं, इन प्रोजेक्ट्स को शुरू करने और शुरू करके खत्म करने के लिए। इस डेडलाइन में काम नहीं हुआ तो केन्द्र अपनी हिस्सेदारी तो रोकेगा, साथ ही प्रोजेक्ट अटकने से इनका फायदा भी प्रदेश की जनता को नहीं मिल पाएगा। 
 

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