टोल कम्पनियों की लापरवाही, प्रदेश के 2 प्रमुख हाईवे पर सड़क दुर्घटनाओं में सवार्धिक मौतें 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/10/10 17:10

जयपुर: प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में हर साल करीब 10 हजार लाेगाें की जान जा रही है. वर्ष 2017 के जारी आंकड़ों में ये सामने आया है कि प्रदेश के 20 नेशनल हाइवे पर 3 हजार 764 मौतें हुई हैं और बड़ी बात यह है कि इनमें भी करीब आधी मौतें केवल 2 नेशनल हाईवे पर हुई हैं. कौंनसे हैं मौत के हाईवे, कैसे हो सकता है समाधान, एक खास रिपोर्ट:

मौतों में सबसे ज्यादा आंकड़ा 2 हाईवे का:
सड़क दुर्घटनाओं को लेकर परिवहन विभाग की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश में होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा आंकड़ा 2 हाईवे का है. ये दाेनाें नेशनल हाइवे एनएच-11 यानी आगरा से बीकानेर और एनएच-8 यानी दिल्ली से जयपुर होकर अहमदाबाद हैं. पिछले साल हाईवेज पर हुई 3 हजार 764 माैताें में से 1584 माैतें इन दोनों हाईवे पर हुई हैं. यह स्थिति ताे तब है जबकि इन दाेनाें हाईवेज पर सबसे अधिक टाेल टैक्स वसूला जा रहा है. टाेल वसूली के साथ इन्हें रोड सेफ्टी पर भी काम करना हाेता है, लेकिन टाेल कंपनियां सड़क सुरक्षा को छोड़कर वाहनों से टाेल वसूलने में ही लगी हुई है. 

एनएच-11(एए) पर मौत और घायल का आंकड़ा शुन्य:
टोल कम्पनियों की इस लापरवाही को लेकर पिछले महीने परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास भी चिंता जता चुके हैं. खाचरियावास ने नेशनल हाईवे संख्या 8 यानी दिल्ली रोड पर हुए हादसों में टोल कम्पनियों की जिम्मेदारी मानते हुए सुधार के निर्देश दिए थे. सबसे कम मौतें एनएच-11(एए) यानी जैसलमेर-बीकानेर-सीकर पर हुई हैं. गत 2 साल से इस हाइवे पर दुर्घटना में एक भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ है. मौत का आंकड़ा भी शुन्य हैं. इस हाइवे पर सबसे अधिक दुर्घटना वर्ष 2013 में छह सड़क हादसों में 4 लाेगाें की मौत हुई थी. माैताें में तीसरे नंबर पर एनएच-76 यानी पिण्डवाड़ा-उदयपुर-चित्तौरगढ़-कोटा है. 

वर्ष 2017 में किस हाइवे पर कितनी दुर्घटना और माैतें ?
—एनएच-8 पर 1550 सड़क दुर्घटनाएं हुईं
—इनमें 1496 लोग घायल हुए, 895 की मौत हुई
—एनएच-11 पर कुल 1196 सड़क हादसे हुए
—1199 लोग घायल, 689 की मौत हुई
—एनएच-76 पर 541 सड़क दुर्घटनाएं हुईं
—611 घायल हुए, 348 की मृत्यु हुई
—एनएच-15 पर 343 सड़क हादसे हुए
—430 लोग घायल हुए, 257 की मृत्यु हुई

टोल कम्पनियों की लापरवाही:
दरअसल सड़क हादसों को कम करने की दिशा में टोल कम्पनियों की अहम जिम्मेदारी है. टाेल कंपनियों काे हाइवे पर हमेशा एंबुलेंस, मोबाइल वैन सहित दुर्घटना में घायल व्यक्तियों काे तुरंत उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी हाेती है. टाेल पर एंबुलेंस ताे उपलब्ध रहती है, लेकिन समय पर नहीं पहुंच पाती या फिर खराब हाेती है. अवैध तरीके से पार्किंग किए गए वाहनों काे हटाने, जगह-जगह साइन बाेर्ड, एंबुलेंस कॉल नंबर लिखना भी जरूरी है, पर ऐसा हो नहीं रहा है. सड़क दुर्घटनाओं वाले ब्लैक स्पॉट्स को राेड इंजीनियरिंग के माध्यम से ठीक करने की भी जिम्मेदारी रहती है. अंधे माेड में सुधार करके साइन बाेर्ड लगाना. सडकों का समय-समय पर मेंटिनेंस करना. अनावश्यक बने कट काे बंद करना. आवारा पशुओं को हाइवे पर राेकने के लिए इंतजाम करना भी टोल कम्पनियों की जिम्मेदारी है. समय-समय पर गांव वालाें काे सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और इन्हें लेन सिस्टम, सड़क क्रास करने तरीकों के साथ ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करना हाेता है. लेकिन अधिकांश जगहों पर टोल कम्पनियां अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पीछे हैं. यही बड़ी वजह है कि प्रदेश में सड़क हादसों में कमी नहीं हो पा रही है. 

... संवाददाता काशीराम चौधरी की रिपोर्ट 

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