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राज्य में जारी हुई नई आबकारी नीति, देशी मदिरा, अंग्रेजी शराब एवं बीयर पर आबकारी शुल्क में बदलाव

राज्य में जारी हुई नई आबकारी नीति, देशी मदिरा, अंग्रेजी शराब एवं बीयर पर आबकारी शुल्क में बदलाव

जयपुर: राज्य सरकार ने आज प्रदेश की नई आबकारी नीति जारी कर दी. घोषित की गई नीति को चयनित लाइसेंसी वित्त वर्ष 2021, 22 के लिए नवीनीकरण करा सकते हैं. नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों का आवंटन लॉटरी से किया जाएगा.

नीति में विशेष प्रावधान किए गए: 
अंग्रेजी शराब की लाइसेंस के लिए शुल्क 30 हजार रुपए निर्धारित किया गया है. देसी मदिरा के 1000000 रुपए तक के समूह के लिए 25000 और 1000000 तक के अधिक के समूह के लिए ₹30000 आवेदन शुल्क तय किया गया है. शराब के बढ़ते प्रचलन को हतोत्साहित करने मदिरा के दुष्प्रभावों को प्रचारित करने एवं उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा करने के साथ ही उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता युक्त मदिरा उपलब्ध कराने एवं राजस्व के में गिरावट को निहित प्रावधानों एवं निरोधात्मक गतिविधियों द्वारा रोकने को लेकर इस नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं.

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खुले और बंद होने का समय पूर्व की तरह: 
इस वित्तीय वर्ष में अंग्रेजी शराब की दुकानों की संख्या 1000 तथा देशी मदिरा दुकानों की संख्या 6665 रखी गई है. शराब दुकान खुलने का समय सुबह 10:00 बजे और रात को 8:00 बजे बंद होने का समय पूर्व की तरह निर्धारित रहेगा. जिस की कठोरता से पालना करवाई जाएगी. शराब उपयोगकर्ताओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए देसी मदिरा समूह द्वारा न्यूनतम 30 फ़ीसदी राजस्थान निर्मित मदिरा का प्रावधान अनिवार्य किया गया है. राजस्थान निर्मित शराब के अंतर्गत व्हिस्की, वोडका तथा रम शामिल होंगे. एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल से निर्मित होगी. अग्रिम विशेषाधिकार राशि को 18 फीसदी से साढ़े 14 फीसदी धरोहर राशि को 8 से 4 फीसदी तथा कम्पोजिट फीस के निर्धारण में वार्षिक बिलिंग राशि को 8% से घटाकर 7% किया गया है. 

प्रक्रिया के सरलीकरण पर जोर दिया गया: 
अग्रिम विशेषाधिकार राशि, कम्पोजिट फीस के निर्धारण में वार्षिक बिलिंग राशि एवं धरोहर राशि को कम किया जाने के कारण अनुज्ञा धारियों को राहत मिलेगी. इस बार देसी मदिरा पर बेसिक लाइसेंस ₹10 प्रति बल्क लीटर निर्धारित की गई है. राज्य सरकार द्वारा इंस्पेक्टर राज को समाप्त करने के लिए गठित टास्क फोर्स की आबकारी आयुक्त बीसी मलिक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी. टास्क फोर्स द्वारा राज्य सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट की कई अन्य सिफारिश को आबकारी नीति में सम्मिलित किया गया है. प्रक्रिया के सरलीकरण पर जोर दिया गया है. आबकारी विभाग में इंस्पेक्टर राज पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रावधान किए गए हैं. जिसके तहत विभाग की अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन किया जाएगा तथा देशी मदिरा के गोदामों पर परमिट व विक्रय हेतु मांग पत्रों को स्प्रिट के संचालन हेतु जारी होने वाले परमिट ब्रांड तथा लेवल पंजीयन की प्रक्रिया विभाग द्वारा जारी होने वाले समस्त प्रकार के प्रावधानों को समय सीमा में ऑनलाइन किया जाएगा.

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दुकानों का लाइसेंस तीन दिवस में जारी किया जाना अनिवार्य: 
मदिरा दुकानों की लोकेशन की जांच संबंधित क्षेत्र के निरीक्षक के अलावा जिले में किसी अन्य निरीक्षक अथवा सहायक आबकारी अधिकारी या स्वयं जिला आबकारी अधिकारी द्वारा भी की जा सकेगी. दुकानों का लाइसेंस तीन दिवस में जारी किया जाना अनिवार्य होगा. राज सरकार ने पहली बार मदिरा की बिक्री पर ग्राहकों के हित में बिल उपलब्ध कराने की अनिवार्यता की है, जिससे मदिरा की अधिक दर पर विक्रय की पूर्ण पाबंदी लगेगी तथा उपभोक्ता को होने वाले शोषण से मुक्ति मिलेगी. प्रदेश में इस बार से आरटीडीसी, आरएसबीसीएल व गंगानगर शुगर मिल द्वारा भी मदिरा विक्रय किया जाएगा. नीति में पहली बार देसी मदिरा पर भी एमआरपी निश्चित की गई है इस प्रकार से इस बार से देशी मदिरा पर न्यूनतम एवं अधिकतम विक्रय मूल्य दोनों लागू होंगे. 

आबकारी निरोधक दल को मजबूत किया जाएगा:
गंगानगर शुगर मिल द्वारा निर्मित की जाने वाली हेरिटेज मदिरा का विकास किया जाएगा तथा राजघरानों से प्राप्त रेसिपी द्वारा विभिन्न ब्रांड जैसे केसर कस्तूरी, रॉयल चंद्रहास, जगमोहन, मवालीन, हेरिटेज सौंफ एवं इलायची ब्रांड इत्यादि का विकास किया जाएगा. इस मदिरा में विभिन्न मसालों का मिश्रण किया जाता है जिससे हर्बल एवं औषधीय मदिरा का निर्माण विस्तृत पैमाने पर किया जाएगा. यूनेस्को द्वारा जयपुर को हाल ही में हेरिटेज सिटी घोषित किए जाने के कारण उक्त मदिरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित किया जाएगा. नकली एवं अवैध मदिरा के निर्माण बेचान और परिवहन पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग द्वारा आबकारी निरोधक दल को मजबूत किया जाएगा.

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अधिक से अधिक निरोधात्मक कार्रवाई की जाएगी:
पुलिस विभाग से समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक निरोधात्मक कार्रवाई की जाएगी. विक्रय की जाने वाली मदिरा पर होलोग्राम एवं क्यूआर कोड लगाया जाएगा. ट्रेक एंड ट्रेस पद्धति से अवैध और नकली शराब की रोकथाम की जा सकेगी. अब मदिरा की दुकान पर स्कूल धार्मिक स्थलों की तरह आंगनवाड़ी केंद्रों से भी नियम अनुसार न्यूनतम 200 मीटर से कम दूरी पर संचालित नहीं होगी. नकली व मिलावटी मदिरा को रोकने के लिए देशी मदिरा एवं अंग्रेजी मदिरा की तीन प्रतिशत मात्रा एग्रीटेक टेट्रा पैक में उपलब्ध होगी पराई होती है तथा इसमें नहीं लगते इस वजह से मिलावट संभव नहीं उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश के कई अन्य प्रदेशों में भी उपलब्ध है. 
 

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