Rajasthan में भारतीय ट्राइबल पार्टी की नई रणनीति, पूर्वी राजस्थान के चुनावी समर में उतरने की तैयारी

Rajasthan में भारतीय ट्राइबल पार्टी की नई रणनीति, पूर्वी राजस्थान के चुनावी समर में उतरने की तैयारी

जयपुर: दक्षिणी राजस्थान से चलकर भारतीय ट्राइबल पार्टी आगामी विधानसभा के चुनाव में पूर्वी राजस्थान का रुख कर सकती है. तकरीबन दो दर्जन ऐसे विधानसभा क्षेत्र है जिन्हें भारतीय ट्राइबल पार्टी प्रभावित कर सकती है. यह वह क्षेत्र है जहां आदिवासी मतदाता चुनावी हार-जीत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, मौजूदा घटनाक्रम जिस तरह से चल रहा है और हिंदू धर्म से परे अलग धार्मिक कोड बनाने की बात चल रही है उसका राजनीतिक रंग यह है कि दक्षिण और पूर्वी राजस्थान के आदिवासी तबके को एक जाजम पर लाने की तैयारी चल रही. 

पूर्व राजस्थान के आदिवासी क्षत्रपों को चुनौती मिलने वाली है पूर्वी राजस्थान के सबसे कद्दावर मीणा नेता डॉक्टर किरोडी लाल मीणा को. चुनौती मिलने वाली है रमेश मीणा, मुरारी लाल मीणा, जसकौर मीणा, परसादी लाल मीणा, नमो नारायण मीणा, ओम प्रकाश हुडला, लाखन सिंह मीणा, इंदिरा मीणा, लक्ष्मण मीणा जैसे सियासी आदिवासी क्षत्रपों को. इसके पीछे कारण है क्योंकि दक्षिण राजस्थान कि सबसे चर्चित पार्टी BTP रुख करने वाली पूर्वी राजस्थान का. आगामी विधानसभा चुनाव से पहले BTP ने नजरें गढ़ा दी है पूर्वी राजस्थान के उन विधानसभा क्षेत्रों पर जहां आदिवासी मीणा मतदाता सियासी तौर पर बेहद मजबूत है. कुछ सीटें एसटी रिजर्व है और कुछ ऐसी सीटें ऐसी है जो सामान्य वर्ग और ऐसी रिजर्व है लेकिन यहां मीणा मतदाता निर्णायक है. दौसा, महुआ, करौली जैसी कुछ सामान्य वर्ग की सीटों पर तो मीणा वर्ग के मतदाता ही प्रभावी है.  

--एसटी रिजर्व-- 
सपोटरा, लालसोट, बामनवास, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, बस्सी, जमवारामगढ़

वो सीटें जहां ST वर्ग हार-जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है...
दौसा, महुवा, सिकराय, सवाई माधोपुर, थानागाजी, करौली, बयाना, खंडार, चाकसू, आमेर

- वह लोकसभा क्षेत्र जो पूर्वी राजस्थान में आते हैं और मीणा मतदाताओं से प्रभावित है

- दौसा तो एसटी रिजर्व लोकसभा क्षेत्र है

- करौली धौलपुर एससी रिजर्व लोकसभा क्षेत्र लेकिन मीणा मतदाता निर्णायक है

- टोंक सवाई माधोपुर सामान्य लोकसभा क्षेत्र है लेकिन मीणा मतदाता यहां निर्णायक भूमिका अदा करते हैं.

-अलवर लोकसभा क्षेत्र भी सामान्य है लेकिन बड़ी तादाद में मीणा वर्ग के यहां मतदाता है. 

- अलवर को मत्स्य प्रदेश भी कहा जाता है जहां की प्रमुख जनजाति मीणा ही थी और इनका शासन भी रहा है.

- जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र में भी बड़ी तादाद में मीणा वर्ग के मतदाता है.

आदिवासी आंदोलन ने BTP को और ताकत दी है. बीते दिनों हिंदू धर्म से परे जाकर अलग धार्मिक कोड बनाने की मांग भी बीटीपी और कांग्रेस के आदिवासी विधायक और पुरजोर ढंग से कर रहे हैं, मांग के समर्थन में अब एसटी वर्ग से आने वाले पूर्वी राजस्थान के कुछ विधायक भी शामिल हो गए हैं. बीते विधानसभा चुनाव के वक्त BTP ने उदयपुर संभाग के करीब हर जिले में उम्मीदवार उतारे थे. बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़ जिलों पर फोकस किया था. उदयपुर डिवीजन की 17 सीटें ऐसी है जहां 70 फीसदी के लगभग आदिवासी वोटर है. बीते विधानसभा चुनाव में बीटीपी ने 12 उम्मीदवार उतारे थे और दो जीते, रामप्रसाद रोत् और राजकुमार रोत् विधायक बने.  अब रणनीति बदलते हुए भारतीय ट्राईबल पार्टी उस क्षेत्र का रुख करने जा रही है झांकी सियासी संस्कृति दक्षिणी राजस्थान से बिल्कुल अलग है. इतना जरूर है कि अगर रणनीति कामयाब रही तो बड़े दलों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. बीटीपी का गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, एमपी के वनवासी बेल्ट में प्रभाव है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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