Uttar Pradesh: सपा के बागी विधायक नितिन अग्रवाल बने उप्र विधानसभा के उपाध्यक्ष, नरेन्द्र वर्मा को 244 वोट से दी शिकस्त

Uttar Pradesh: सपा के बागी विधायक नितिन अग्रवाल बने उप्र विधानसभा के उपाध्यक्ष, नरेन्द्र वर्मा को 244 वोट से दी शिकस्त

Uttar Pradesh: सपा के बागी विधायक नितिन अग्रवाल बने उप्र विधानसभा के उपाध्यक्ष, नरेन्द्र वर्मा को 244 वोट से दी शिकस्त

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी समर्थित समाजवादी पार्टी के बागी विधायक नितिन अग्रवाल सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुये. अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नरेंद्र वर्मा को 244 मतों के भारी अंतर से पराजित किया. सोमवार को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में संपन्न हुए विधानसभा उपाध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम की घोषणा विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने की. दीक्षित ने बताया कि कुल 368 सदस्यों ने मतदान किया जिसमें से 364 मत वैध पाए गए . इनमें से नितिन अग्रवाल को 304 तथा नरेंद्र वर्मा को 60 मत मिले. विधानसभा सूत्रों के अनुसार चार मत अवैध घोषित हुए जिनमें तीन नितिन अग्रवाल को तथा एक नरेंद्र वर्मा को पड़ा था.

इससे पहले लगभग 11.45 बजे मतदान शुरू हुआ जो दोपहर तीन बजे तक चला और करीब चार बजे परिणाम घोषित हुआ . विपक्षी बसपा और कांग्रेस के विधायकों ने चुनाव का बहिष्कार किया. तीसरे कार्यकाल के विधायक नितिन अग्रवाल राज्य के पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल के बेटे हैं, जिन्होंने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था . 1981 में जन्मे नितिन अग्रवाल पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार में मंत्री थे. उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में सदन में फिलहाल भाजपा के 304 तथा सपा के 49 सदस्य हैं. इनमें सपा के टिकट पर चुनाव जीते शिवपाल सिंह यादव, हरिओम यादव और नितिन अग्रवाल ने सपा से विद्रोह करके अपनी अलग राह बना ली है. इस स्थिति को देखते हुए माना जा रहा था कि चुनाव एकतरफा है और नितिन अग्रवाल की जीत पक्की है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में होना है 
हालांकि संख्या बल के हिसाब से सपा के अधिकृत उम्मीदवार नरेंद्र सिंह वर्मा के पक्ष में 15 अतिरिक्त सदस्यों ने मतदान किया जिसमें एक मत अवैध था. सदन में बसपा के 16 विधायक हैं, भाजपा की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के 9 विधायक हैं, कांग्रेस के पास सात सीटें हैं, जबकि रालोद और निषाद पार्टी के पास 1-1 विधायक हैं तथा तीन निर्दलीय सदस्य और दो असम्बद्ध हैं. सात सीटें खाली हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में होना है और उसके कुछ महीने पहले हुए इस चुनाव में जहां भाजपा और सपा ने मतदान में हिस्सा लिया वहीं कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने मतदान का बहिष्कार किया. इससे यह साफ हो गया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सभी अलग-अलग लड़ेंगे. सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि उनका किसी बड़े राजनीतिक दल से समझौता नहीं होगा और वह छोटे दलों के लिए अपने दरवाजे खुले रखेंगे.

भाजपा के राजेश अग्रवाल वर्ष 2004 में विधानसभा उपाध्यक्ष चुने गये थे 
भाजपा के राजेश अग्रवाल वर्ष 2004 में विधानसभा उपाध्यक्ष चुने गये थे और उनका कार्यकाल 2007 तक था. इसके बाद से विधानसभा में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव नहीं हुआ था. परंपराओं के अनुसार, प्रमुख विपक्षी दल के एक विधायक को विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया जाता है. परिणाम घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नितिन अग्रवाल को बधाई देते हुए कहा कि वे एक युवा का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष पिछले साढ़े चार साल में एक युवा चेहरे को सामने नहीं ला सका. उन्होंने सपा को "युवा विरोधी" भी करार दिया, जो अपने ही सदस्य को स्वीकार करने में असमर्थ था. आदित्यनाथ ने कहा कि तकनीकी रूप से नितिन सपा से विधायक हैं. नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने कहा कि वह सदन के कामकाज में सभी सदस्यों को साथ लेकर चलेंगे.

नितिन अग्रवाल को लॉलीपॉप दे दिया गया है
नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने नितिन अग्रवाल की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया और जब सदन का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, तो उन्हें 'लॉलीपॉप' दे दिया गया है. विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपाध्यक्ष पद पर नितिन अग्रवाल के चुने जाने पर हार्दिक बधाई दी. अध्यक्ष ने कहा कि संसदीय परिपाटी में उपाध्यक्ष चुने जाने की व्यवस्था हमारे संविधान में की गयी है और वैदिक परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि अध्यक्ष और उसके नीचे उपाध्यक्ष की व्यवस्था हमारी पुरानी वैदिक परिपाटी में भी है और उपाध्यक्ष पद अपने आप में महत्वपूर्ण एवं दायित्वपूर्ण है. सोर्स- भाषा
 

और पढ़ें