प्रदेश की जेलों में नहीं पीने योग्य पानी !

Naresh Sharma Published Date 2019/01/19 09:17

जयपुर। राजस्थान के आधे से अधिक जिलों की जेलों में कैदियों के लिए पीने योग्य पानी नहीं है। जलदाय विभाग की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है और यह पूरी रिपोर्ट फर्स्ट इंडिया के पास मौजूद हैं। राजधानी जयपुर की सेंट्रल जेल का पानी भी पीने योग्य नहीं माना है गया है। एक्सक्लुसिव रिपोर्ट-

—33 में से 19 जिलों की जेलों में बुरा हाल
—कहीं पर नाइट्रेट ज्यादा, तो कहीं क्लोराइड
—किसी जेल के पानी में कठोरता है प्रचुरता में
—अधिकांश जेलों की कैमिकल जांच नेगेटिव
—बूंदी के जेलो में बैक्टेरियोलॉजिकल जांच भी नेगेटिव
—सिर्फ 14 जिलों की जेल का पानी है सुरक्षित

सुनकर भले ही आपको आश्चर्य लग रहा होगा, लेकिन हकीकत यही है, हालात ऐसे ही हैं। राज्य के 33 जिलों में से 19 जिलों की जेलों में पानी पीने के लायक ही नहीं है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद जलदाय विभाग की रिपोर्ट इन हालातों को बयां कर रही है। विभाग ने राज्य की जेलों व सब-जेलों में पानी की जांच कराई। जीवाणु परीक्षण में तो लगभग सभी जगह के जल स्त्रोत सही पाए गए, लेकिन रासायनिक परीक्षण में लगभग 30 जेल व सब जेल का पानी फेल हो गया। राजधानी जयपुर की ही बात सबसे पहले करें, तो सेंट्रल जेल में नाइट्रेट की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई। घाटगेट स्थित महिला जेल में नाइट्रेट व कठोरता ज्यादा है। सांगानेर की ओपन जेल में भी पानी पीने लायक नहीं है। झुंझुनू व कोटा में भी हालत ठीक नहीं है। दौसा छह जगह सैंपल ले लिए गए, लेकिन एक भी जगह पीने योग्य पानी नहीं मिला।

—जयपुर की सेंट्रल जेल में नाइट्रेट की अधिकता
—घाटगेट, खुली जेल व सांगानेर जेल में हालत खराब
—झुंझुनूं व कोटा में भी स्थिति ठीक नहीं
—दौसा के सभी छह सैंपल जांच में फेल
—फर्स्ट इंडिया के पास है जेल की पानी पूरी रिपोर्ट
—सितंबर से नवंबर के बीच हुई थी पानी की जांच

वहीं अजमेर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, चूरू, चित्तौडगढ़, धौलपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ, झालावाड़, राजसमंद, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुर व प्रतापगढ़ की जेलों में पानी सही पाया गया। यहां पानी में कोई भी रासायनिक पदार्थ तय सीमा से ज्यादा नहीं मिला। लेकिन अलवर में नाइट्रेट ज्यादा मिला, तो भरतपुर की जेलों में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पायी गई।  अटरू, नोखा की जेलों में भी पीने योग्य पानी नहीं है।  मेड्तासिटी की जेल में टीडीएस ज्यादा था, तो क्लाराइड व कठोरता भी मानक से ऊपर पायी गई। सीकर में सीकर व फतेहपुर की जेल में पीने योग्य पानी नहीं है, हालांकि नीम का थाना में पानी सही मिला। विभिन्न जेलों के पानी की जांच भी ऊपर से दबाव पड़ने के कारण हुई है, वरना कई जिलों में तो आम जनता के पानी की जांच करने के लिए तो सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। कहीं स्टाफ की कमी है, तो कहीं उपकरण नहीं है। मोबाइल लैब की बात तो कागजों से बाहर नहीं निकल सकी।

—अलवर में नाइट्रेट की ज्यादा मात्रा
—अटरू की जेल में भी खराब पानी
—भरतपुर की जेलों में क्लोराइड की मात्रा ज्यादा
—नोखा की जेल में भी पीने योग्य पानी नहीं
—दौसा में भी पानी है पूरी तरह से दूषित

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